CAG रिपोर्ट में PMKVY पर सवाल: ₹10,194 करोड़ खर्च, फिर भी सिर्फ 41% प्रशिक्षित युवाओं को मिला रोजगार
2015-22 के तीन चरणों का ऑडिट; योजना, निगरानी और वित्तीय प्रबंधन में कई कमियां उजागर, सरकार ने PMKVY 4.0 में सुधारों का किया दावा

नई दिल्ली। प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना (PMKVY) के क्रियान्वयन को लेकर भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) की रिपोर्ट संख्या 20 वर्ष 2025 में कई महत्वपूर्ण टिप्पणियां सामने आई हैं। वर्ष 2015 से 2022 के बीच योजना के पहले तीन चरणों के प्रदर्शन का मूल्यांकन करते हुए CAG ने योजना की कार्यप्रणाली, प्रशिक्षण की गुणवत्ता, रोजगार परिणाम, वित्तीय प्रबंधन और निगरानी व्यवस्था में कई कमियों की ओर संकेत किया है। वहीं, कौशल विकास एवं उद्यमिता मंत्रालय (MSDE) ने कहा है कि इन कमियों को दूर करने के लिए PMKVY 4.0 में व्यापक सुधार लागू किए जा चुके हैं। क्या है प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना? प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना (PMKVY) की शुरुआत जुलाई 2015 में युवाओं को उद्योगों की आवश्यकता के अनुरूप कौशल प्रशिक्षण देकर रोजगार योग्य बनाने के उद्देश्य से की गई थी। वर्ष 2015 से 2022 के बीच योजना के तीन चरणों में लगभग ₹10,194 करोड़ जारी किए गए तथा 1.10 करोड़ युवाओं को कौशल प्रमाणन दिया गया। 41 प्रतिशत प्रशिक्षित युवाओं को ही मिला रोजगार CAG की रिपोर्ट के अनुसार, शॉर्ट टर्म ट्रेनिंग (STT) और स्पेशल प्रोजेक्ट (SP) के अंतर्गत 56.14 लाख अभ्यर्थियों को प्रमाणित किया गया, लेकिन इनमें से केवल 23.18 लाख (लगभग 41 प्रतिशत) उम्मीदवारों को ही रोजगार मिल सका। रिपोर्ट में कहा गया है कि योजना का प्रमुख उद्देश्य रोजगार उपलब्ध कराना था, लेकिन रोजगार परिणाम अपेक्षा के अनुरूप नहीं रहे। पात्रता की जांच में भी मिली कमियां ऑडिट में पाया गया कि कई मामलों में प्रशिक्षणार्थियों का चयन उनकी आयु, शैक्षणिक योग्यता और कार्यानुभव से जुड़े निर्धारित मानकों की पर्याप्त जांच किए बिना किया गया। इसके अलावा बेरोजगार युवाओं और स्कूल/कॉलेज छोड़ चुके विद्यार्थियों की पहचान एवं सत्यापन के लिए प्रभावी व्यवस्था उपलब्ध नहीं थी। रोजगार की मांग और प्रशिक्षण में नहीं था तालमेल रिपोर्ट के अनुसार कई राज्यों और विभिन्न क्षेत्रों में प्रशिक्षण कार्यक्रम स्थानीय उद्योगों और रोजगार बाजार की वास्तविक मांग के अनुरूप नहीं थे। CAG ने यह भी कहा कि माइक्रो स्तर पर कौशल आवश्यकताओं (Skill Gap) का पर्याप्त अध्ययन नहीं किया गया और राष्ट्रीय कौशल विकास योजना (National Skill Development Plan) भी तैयार नहीं हो सकी। वित्तीय प्रबंधन पर भी उठे सवाल रिपोर्ट में राज्यों को धनराशि जारी करने और उसके उपयोग में देरी का उल्लेख किया गया है। CAG के अनुसार वित्तीय संसाधनों के गलत आकलन और लगभग ₹222.63 करोड़ की राशि के हस्तांतरण में देरी हुई। ऑडिट के बाद ₹12.16 करोड़ का ब्याज वापस वसूला गया, जबकि राष्ट्रीय कौशल विकास निगम (NSDC) द्वारा ₹24.13 करोड़ प्रशासनिक व्यय अधिक वसूलने का मामला भी सामने आया। निगरानी व्यवस्था में कमियां ऑडिट के दौरान कई प्रशिक्षण केंद्रों में आधार आधारित बायोमेट्रिक उपस्थिति प्रणाली (AEBAS) या तो स्थापित नहीं मिली या कार्यरत नहीं थी। कुछ मामलों में प्रशिक्षण एवं रोजगार से जुड़े दस्तावेजों की विश्वसनीयता पर भी सवाल उठाए गए हैं। रिपोर्ट किस आधार पर तैयार हुई? यह रिपोर्ट CAG द्वारा किए गए Performance Audit (कार्य निष्पादन लेखा परीक्षा) पर आधारित है। ऑडिट में वर्ष 2015 से 2022 तक संचालित PMKVY के पहले तीन चरणों की समीक्षा की गई। इस दौरान कौशल विकास एवं उद्यमिता मंत्रालय (MSDE), राष्ट्रीय कौशल विकास निगम (NSDC), राष्ट्रीय कौशल विकास निधि (NSDF) तथा राष्ट्रीय व्यावसायिक शिक्षा एवं प्रशिक्षण परिषद (NCVET) के रिकॉर्ड, वित्तीय दस्तावेजों और Skill India Portal के आंकड़ों की जांच की गई। साथ ही असम, बिहार, झारखंड, केरल, महाराष्ट्र, ओडिशा, राजस्थान और उत्तर प्रदेश सहित आठ राज्यों का चयन कर राज्य कौशल विकास मिशनों, जिला कौशल समितियों और प्रशिक्षण केंद्रों का निरीक्षण किया गया। ऑडिट टीम ने 90 प्रशिक्षण केंद्रों का भौतिक सत्यापन किया तथा 1,045 लाभार्थियों का सर्वेक्षण भी किया। सरकार ने क्या कहा? कौशल विकास एवं उद्यमिता मंत्रालय ने ऑडिट के दौरान और बाद में CAG को बताया कि PMKVY 4.0 में कई महत्वपूर्ण सुधार लागू किए गए हैं। इनमें आधार आधारित e-KYC, Skill India Digital Hub (SIDH), उम्मीदवारों का डिजिटल सत्यापन, एक वर्ष तक पोस्ट-सर्टिफिकेशन ट्रैकिंग, बेहतर डेटा प्रबंधन और निगरानी व्यवस्था को मजबूत करने जैसे कदम शामिल हैं। मंत्रालय का कहना है कि इन सुधारों से योजना की पारदर्शिता और प्रभावशीलता में वृद्धि होगी। CAG की प्रमुख सिफारिशें प्रशिक्षण को उद्योगों की वास्तविक मांग और Skill Gap के अनुरूप बनाया जाए। राष्ट्रीय कौशल विकास योजना शीघ्र तैयार की जाए। राज्यों और केंद्र की विभिन्न कौशल योजनाओं के बीच बेहतर समन्वय स्थापित किया जाए। डेटा सुरक्षा और रिकॉर्ड संरक्षित रखने की स्पष्ट नीति बनाई जाए। पात्र लाभार्थियों का चयन निर्धारित मानकों के अनुसार सुनिश्चित किया जाए। वित्तीय नियंत्रण और निगरानी व्यवस्था को और मजबूत किया जाए। निष्कर्ष प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना देश के युवाओं को रोजगारोन्मुखी कौशल प्रदान करने की एक महत्वपूर्ण पहल है। CAG की रिपोर्ट में योजना के क्रियान्वयन, वित्तीय प्रबंधन और निगरानी से जुड़ी कई कमियों की ओर संकेत किया गया है, वहीं सरकार का कहना है कि इन कमियों को दूर करने के लिए PMKVY 4.0 में व्यापक सुधार लागू किए जा चुके हैं। आने वाले वर्षों में इन सुधारों का वास्तविक प्रभाव योजना के परिणामों से स्पष्ट होगा। (यह समाचार भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) की "Report No.
20 of 2025 – Skill Development under Pradhan Mantri Kaushal Vikas Yojana" पर आधारित है। समाचार में CAG के ऑडिट निष्कर्षों के साथ-साथ कौशल विकास एवं उद्यमिता मंत्रालय द्वारा रिपोर्ट में दिए गए जवाब और सुधारात्मक कदमों को भी शामिल किया गया है।).
