पिथौरागढ़/बंगापानी। आपदा से प्रभावित ग्रामीणों को राहत और मुआवजा दिलाने की व्यवस्था एक बार फिर सवालों के घेरे में है। ग्राम पंचायत सिरतोला के ग्रामीणों ने राजस्व उपनिरीक्षक दीपक सैलोनी पर आपदा से हुई क्षति के मामलों में लापरवाही और कथित कमीशनखोरी के आरोप लगाए हैं। ग्रामीणों का कहना है कि फसल, भूमि, भवन और पशुहानि से जुड़े मामलों की जानकारी देने के बावजूद उन्हें अपेक्षित राहत नहीं मिली। ग्रामीणों ने इस संबंध में तहसीलदार बंगापानी को शिकायत सौंपकर मामले की जांच और आवश्यक कार्रवाई की मांग की है।
ग्रामीणों की ओर से दिए गए शिकायत पत्र के अनुसार, वर्षाकाल में ग्राम पंचायत सिरसोला के अंतर्गत मलबा आने से फसल और भूमि को नुकसान पहुंचा। कुछ आवासीय मकानों में पानी और मलबा घुसने तथा एक भवन के क्षतिग्रस्त होने की बात भी कही गई है। इसके अलावा पशुहानि का मामला भी उठाया गया है।
शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि कई बार राजस्व उपनिरीक्षक को सूचना देने के बावजूद संबंधित मामलों में राहत और मुआवजे की प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ी। शिकायत पत्र में यह भी आरोप लगाया गया है कि कुछ मामलों में रिपोर्ट आगे बढ़ाने के लिए कथित तौर पर सुविधा शुल्क की मांग की गई। ग्रामीणों ने इन आरोपों की निष्पक्ष जांच कर जिम्मेदारी तय करने की मांग की है।
हालांकि, ये आरोप फिलहाल शिकायतकर्ताओं के दावे हैं। इनकी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और न ही किसी जांच के निष्कर्ष के आधार पर आरोपों को सिद्ध माना जा सकता है।
इस संबंध में राजस्व उपनिरीक्षक दीपक सैलोनी से फोन पर बातचीत की गई। उन्होंने पशुहानि के मामलों को पुराना बताते हुए कहा कि इसी कारण वे मामले बंद हो गए थे।
भू कटाव के मामले में उन्होंने बताया कि भूगर्भीय सर्वेक्षण कराया गया है और उसकी रिपोर्ट आना अभी बाकी है। उन्होंने यह भी कहा कि अन्य मामलों में उनके पास कोई शिकायत प्राप्त नहीं हुई है। उनका पक्ष सामने आने के बाद अब मामले में कायतकर्ताओं के आरोपों और विभागीय रिकॉर्ड की जांच महत्वपूर्ण हो गई है।
आपदा के समय प्रभावित परिवारों को समय पर राहत और मुआवजा उपलब्ध कराना प्रशासन की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है। ऐसे में यदि ग्रामीणों की शिकायतें लंबित हैं, तो यह देखना जरूरी है कि देरी का कारण क्या है और जिम्मेदारी किस स्तर पर तय होती है।
एक ओर ग्रामीण कथित अनियमितताओं और सुविधा शुल्क की मांग के आरोप लगा रहे हैं, वहीं दूसरी ओर संबंधित राजस्व उपनिरीक्षक ने अन्य शिकायतें प्राप्त न होने की बात कही है। ऐसे में प्रशासन के सामने चुनौती केवल आरोपों का जवाब देने की नहीं, बल्कि शिकायतों, क्षति के आकलन, सर्वेक्षण रिपोर्ट और मुआवजा प्रक्रिया की पारदर्शी जांच कर वास्तविक स्थिति स्पष्ट करने की भी है।
ग्रामीणों ने मामले की निष्पक्ष जांच नहीं होने पर आंदोलन करने की चेतावनी दी है। अब देखना होगा कि तहसील प्रशासन शिकायत पर क्या कार्रवाई करता है और प्रभावित परिवारों को राहत दिलाने की दिशा में क्या कदम उठाए जाते हैं।
शिकायत और मामले को लेकर उपस्थित लोगों में ग्राम प्रधान कंचन गोस्वामी, उपप्रधान बिशन सिंह, एडवोकेट भरत गोस्वामी, गगन धामी, जगदीश राम, यश राणा, हीरा सिंह, हीरा देवी, हेमा देवी, जमुना देवी, लक्ष्मी देवी, संतोषी देवी, इंद्रा देवी, कमला देवी सहित अन्य ग्रामीण शामिल रहे।


