पिथौरागढ़। किसी ने फसल के सहारे बच्चों की पढ़ाई का सपना देखा था, तो किसी को इसी उपज से अपने परिवार का खर्च चलाने की उम्मीद थी। महीनों तक खेतों में पसीना बहाया, दिन-रात मेहनत की, लेकिन कुदरत के कहर ने किसानों की उम्मीदों पर ओलों की चोट कर दी। अब खेतों में नुकसान देखकर किसान परेशान हैं और उनके सामने सबसे बड़ा सवाल है कि आखिर इस नुकसान की भरपाई कैसे होगी?
पिथौरागढ़ जिले के जौलजीबी क्षेत्र के गराली गांव से ओलावृष्टि और भारी बारिश के चलते कृषि फसलों को नुकसान पहुंचने की खबर सामने आई है। स्थानीय ग्रामीण सुरेश कुमार के अनुसार, मौसम की मार से किसानों की मेहनत पर पानी फिर गया है। खेती पर निर्भर परिवारों के सामने आर्थिक संकट की चिंता गहराने लगी है।
पहाड़ में खेती करना पहले ही आसान नहीं है। सीमित संसाधन, बढ़ती लागत और मौसम की अनिश्चितता के बीच किसान बड़ी उम्मीद के साथ फसल तैयार करते हैं। ऐसे में जब फसल तैयार होने के समय ओलावृष्टि नुकसान पहुंचाती है, तो किसान के पास केवल चिंता और इंतजार ही बचता है।
बाजपुर के किसानों का दर्द समझने पहुंचे मुख्यमंत्री, पहाड़ के किसानों को भी इंतजार हाल ही में मुख्यमंत्री ने हल्द्वानी से देहरादून लौटते समय बाजपुर में ओलावृष्टि से प्रभावित क्षेत्रों का हवाई सर्वेक्षण और स्थलीय निरीक्षण कर फसलों को हुए नुकसान का जायजा लिया। इस दौरान उन्होंने प्रभावित किसानों से मुलाकात कर उनकी समस्याएं सुनीं और संबंधित अधिकारियों को फसलों के नुकसान का विस्तृत आकलन शीघ्र पूरा करने के निर्देश दिए, ताकि प्रभावित किसानों को नियमानुसार राहत उपलब्ध कराने की कार्रवाई की जा सके।
मुख्यमंत्री का यह कदम प्रभावित किसानों के लिए राहत की उम्मीद जगाता है। लेकिन पिथौरागढ़ के गराली और आसपास के क्षेत्रों के किसानों के मन में भी अब यही आस है कि उनकी समस्याओं पर भी सरकार और प्रशासन का ध्यान पहुंचेगा।
क्या पहाड़ के किसानों तक भी पहुंचेगी राहत ?
सवाल यह नहीं है कि बाजपुर के किसानों की सुध क्यों ली गई, बल्कि सवाल यह है कि पिथौरागढ़ के किसानों की पीड़ा पर ध्यान कब दिया जाएगा? यदि गराली और आसपास के गांवों में फसलों को नुकसान हुआ है, तो वहां भी अधिकारियों की टीम भेजकर वास्तविक स्थिति का आकलन किया जाना चाहिए।
ग्रामीणों की मांग है कि प्रभावित खेतों का स्थलीय निरीक्षण हो, नुकसान का निष्पक्ष सर्वे किया जाए और पात्र किसानों को नियमानुसार मुआवजा एवं राहत उपलब्ध कराई जाए। समय पर सहायता मिलने से ही किसानों को अगली फसल की तैयारी और परिवार की जरूरतों को पूरा करने में सहारा मिल सकता है।
खेतों में बिखरे ओले, किसानों की आंखों में भविष्य की चिंता किसान के लिए फसल केवल अनाज या आमदनी का साधन नहीं, बल्कि पूरे परिवार की उम्मीद होती है। जब प्राकृतिक आपदा उस उम्मीद को तोड़ देती है, तो उसका असर केवल खेत तक सीमित नहीं रहता, बल्कि घर के चूल्हे, बच्चों की पढ़ाई और परिवार की आर्थिक स्थिति पर भी पड़ता है।
अब निगाहें जिला प्रशासन और प्रदेश सरकार पर टिकी हैं। क्या गराली के प्रभावित किसानों के नुकसान का आकलन होगा? क्या उनकी समस्याएं शासन तक पहुंचेंगी? और क्या उन्हें समय पर राहत मिल पाएगी?
सबसे बड़ा सवाल यही है—ओलावृष्टि ने जब पहाड़ के किसानों की मेहनत उजाड़ दी है, तो क्या सरकार उनकी पीड़ा समझकर मदद के लिए आगे आएगी?


