समाचार | विशेष संवाददाता आज जब पूरी दुनिया दो गंभीर संकटों—जलवायु परिवर्तन और युवाओं में तेजी से बढ़ती नशे की प्रवृत्ति—से जूझ रही है, ऐसे समय में समाज को जागरूक करने के लिए साहित्य को माध्यम बनाकर एक सार्थक पहल सामने आई है। पर्यावरण संरक्षण एवं सामाजिक जागरूकता के क्षेत्र में वर्षों से सक्रिय डॉ. पीताम्बर अवस्थी ने अपनी लेखनी के माध्यम से इन दोनों ज्वलंत विषयों पर व्यापक जनचेतना का अभियान प्रारंभ किया है।

डॉ. अवस्थी द्वारा लिखित दो महत्वपूर्ण कृतियाँ—"हिमालय में जलवायु परिवर्तन: समस्या और समाधान" तथा "नशे पर प्रहार"—सिर्फ पुस्तकें नहीं, बल्कि वर्तमान और भावी पीढ़ियों के प्रति समाज की सामूहिक जिम्मेदारी का गंभीर दस्तावेज हैं। इन पुस्तकों में हिमालयी क्षेत्रों पर जलवायु परिवर्तन के बढ़ते प्रभाव, प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण, पर्यावरणीय संतुलन तथा युवाओं को नशे जैसी सामाजिक बुराई से दूर रखने के व्यावहारिक उपायों का विस्तृत और विचारोत्तेजक वर्णन किया गया है।

समाजहित के इन विचारों को राष्ट्रीय स्तर पर नीति-निर्माताओं तक पहुँचाने के उद्देश्य से डॉ. अवस्थी ने अपनी दोनों पुस्तकें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू, उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी, उत्तराखंड के राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह (सेवानिवृत्त), केंद्रीय पर्यावरण मंत्री कीर्तिवर्धन सिंह, गृह मंत्री अमित शाह, उत्तराखंड के वन एवं पर्यावरण मंत्री राम सिंह कैड़ा, समाज कल्याण मंत्री खजान दास तथा बौद्धिक प्रकाशन के केशरी नंदन त्रिपाठी को प्रेषित की हैं।

डॉ. अवस्थी ने इन सभी गणमान्य व्यक्तियों से अपेक्षा व्यक्त की है कि वे पुस्तकों में प्रस्तुत सुझावों एवं विचारों का अवलोकन कर पर्यावरण संरक्षण और नशामुक्त समाज के निर्माण की दिशा में सार्थक मार्गदर्शन प्रदान करेंगे। उनका मानना है कि यदि जलवायु परिवर्तन की चुनौती और नशे की बढ़ती प्रवृत्ति पर समय रहते प्रभावी कदम नहीं उठाए गए, तो इसका दुष्प्रभाव आने वाली पीढ़ियों को गंभीर रूप से प्रभावित करेगा।

डॉ. अवस्थी का कहना है कि साहित्य केवल शब्दों का संग्रह नहीं, बल्कि समाज को नई दिशा देने वाला सशक्त माध्यम है। उनकी यह पहल इस विश्वास को और अधिक मजबूत करती है कि जागरूक नागरिक, संवेदनशील साहित्य और दूरदर्शी नेतृत्व मिलकर ही एक स्वस्थ, सुरक्षित और पर्यावरण-संतुलित भारत का निर्माण कर सकते हैं।

यह प्रयास न केवल पर्यावरण संरक्षण और नशामुक्ति के प्रति जनजागरण का प्रेरक अभियान है, बल्कि समाज को यह संदेश भी देता है कि सकारात्मक परिवर्तन की शुरुआत विचारों से होती है, और विचारों को जन-जन तक पहुँचाने का सबसे प्रभावी माध्यम साहित्य ही है।