पिथौरागढ़। पहाड़ों में खेती करना किसानों के लिए पहले ही किसी चुनौती से कम नहीं है। कभी जंगली जानवरों से फसलों को बचाने की चिंता, तो कभी मौसम की मार किसानों की सालभर की मेहनत पर पानी फेर देती है। ऐसा ही दर्द कनालीछीना विकासखंड के गर्जिया क्षेत्र में सामने आया है, जहां भारी ओलावृष्टि ने धान की फसल को नुकसान पहुंचाया है। खेतों में लहलहाती फसल पर पड़े ओलों ने किसानों की उम्मीदों को बड़ा झटका दिया है।
जानकारी के अनुसार, बंगापानी तहसील के अंतर्गत गर्जिया क्षेत्र में करीब एक घंटे तक लगातार भारी ओलावृष्टि हुई। ग्रामीणों के मुताबिक, ओलों का आकार काफी बड़ा था और कुछ ओलों का वजन लगभग 250 ग्राम तक बताया गया है। अचानक हुई इस ओलावृष्टि से धान की फसल प्रभावित हुई है। फसल को हुए नुकसान से किसानों के सामने अब अपनी सालभर की मेहनत और परिवार की आजीविका को लेकर चिंता खड़ी हो गई है।
सालभर की मेहनत पर चंद मिनटों में फिरा पानी पहाड़ी क्षेत्रों में किसान सीमित संसाधनों के बीच खेती करते हैं। खेतों की तैयारी, बीज, खाद और मेहनत के बाद जब फसल तैयार होने लगती है, तो किसानों को अच्छी पैदावार और परिवार के लिए अनाज मिलने की उम्मीद रहती है। लेकिन प्राकृतिक आपदा के रूप में आई ओलावृष्टि उनकी इन उम्मीदों को तोड़ देती है।
गर्जिया में हुई ओलावृष्टि ने एक बार फिर पहाड़ के किसानों की मुश्किलों को सामने ला दिया है। खेती पर निर्भर परिवारों के लिए फसल को होने वाला नुकसान केवल आर्थिक क्षति नहीं, बल्कि पूरे साल की मेहनत और भविष्य की योजनाओं पर भी असर डालता है।
ग्राम प्रधान गायत्री देवी ने उठाई किसानों के नुकसान की बात ग्राम पंचायत गर्जिया की ग्राम प्रधान गायत्री देवी, पत्नी नरेंद्र सिंह, ने क्षेत्र में हुई भारी ओलावृष्टि और धान की फसल को पहुंचे नुकसान की जानकारी दी। ग्रामीणों के अनुसार, ओलों की तीव्रता और आकार ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है। अब प्रभावित किसानों को नुकसान का आकलन होने और राहत मिलने की उम्मीद है।
कभी वन्यजीवों का खतरा, तो कभी प्रकृति की मार पहाड़ में खेती-किसानी का संकट लगातार गंभीर होता जा रहा है। कई क्षेत्रों में जंगली जानवर किसानों की फसलों को नुकसान पहुंचाते हैं, वहीं दूसरी ओर अतिवृष्टि, ओलावृष्टि और अन्य प्राकृतिक आपदाएं बची हुई उम्मीदों पर भी पानी फेर देती हैं। ऐसी परिस्थितियों में किसानों के सामने खेती जारी रखने और अपनी आजीविका बचाने की चुनौती खड़ी हो जाती है।
पूर्व में भाजपा के पूर्व प्रवक्ता सुरेश जोशी भी किसानों की समस्याओं और प्राकृतिक आपदाओं से होने वाले नुकसान का मुद्दा सोशल मीडिया के माध्यम से सरकार के सामने रख चुके हैं। अब गर्जिया में ओलावृष्टि से प्रभावित किसानों की समस्या ने एक बार फिर इस मुद्दे को चर्चा में ला दिया है।
सरकार से मुआवजे की उम्मीद ओलावृष्टि से प्रभावित किसानों को अब सरकार और प्रशासन से राहत की उम्मीद है। ग्रामीणों की मांग है कि संबंधित विभाग की टीम मौके पर पहुंचकर धान की फसल को हुए नुकसान का स्थलीय निरीक्षण करे और निष्पक्ष आकलन तैयार करे। नुकसान की पुष्टि होने पर पात्र किसानों को नियमानुसार उचित मुआवजा दिया जाए, ताकि उन्हें आर्थिक संकट से उबरने में मदद मिल सके।
किसानों का दर्द यह है कि वे दिन-रात मेहनत करके खेतों में अनाज उगाते हैं, लेकिन जब प्रकृति उनकी फसल छीन लेती है, तो उनकी भरपाई करना आसान नहीं होता। ऐसे में जरूरी है कि प्रभावित किसानों की समस्या को गंभीरता से लेते हुए समय पर सर्वेक्षण और राहत की कार्रवाई की जाए। पहाड़ की खेती को बचाने के लिए किसानों को केवल आश्वासन नहीं, बल्कि संकट के समय ठोस सहायता की जरूरत है।


