पिथौरागढ़। धारचूला क्षेत्र में एक बार फिर भारी बारिश ने सीमांत इलाकों की कनेक्टिविटी को बड़ा झटका दिया है। कुलागाड़ में बनाया गया वैकल्पिक बेली पुल बीती रात नदी के तेज बहाव की चपेट में आकर पूरी तरह बह जाने की सूचना है। स्थानीय लोगों द्वारा साझा किए गए फोटो और वीडियो में पुल के स्थान पर उफनती नदी और क्षतिग्रस्त क्षेत्र दिखाई दे रहा है।

बताया जा रहा है कि बीती रात क्षेत्र में हुई भारी बारिश के बाद कुलागाड़ नदी का जलस्तर अचानक बढ़ गया। तेज बहाव इतना अधिक था कि हाल ही में तैयार किया गया वैकल्पिक पुल भी इसकी चपेट में आ गया। स्थानीय लोगों के अनुसार पुल के बह जाने से धारचूला से गुंजी, व्यास घाटी, दारमा और चौदास घाटी की ओर जाने वाली आवाजाही एक बार फिर प्रभावित हो सकती है।

गौरतलब है कि इससे पहले भी कुलागाड़ में पुल क्षतिग्रस्त होने के बाद सीमांत क्षेत्र का संपर्क कई दिनों तक बाधित रहा था। इसके बाद सीमा सड़क संगठन (BRO) ने युद्धस्तर पर काम करते हुए वैकल्पिक बेली पुल तैयार किया था, जिसके बाद क्षेत्र में यातायात बहाल हुआ था।

अब वैकल्पिक पुल के भी बह जाने की खबर ने सीमांत क्षेत्र के लोगों की चिंता बढ़ा दी है। स्थानीय लोगों का कहना है कि हर बार बारिश के दौरान पुल और सड़क व्यवस्था प्रभावित होने से उन्हें भारी परेशानियों का सामना करना पड़ता है।

हालांकि, पुल के पूरी तरह बह जाने और वर्तमान में मार्ग की वास्तविक स्थिति की आधिकारिक पुष्टि संबंधित विभाग और प्रशासन की ओर से किया जाना बाकी है। प्रशासन और BRO की टीम मौके पर पहुंचकर स्थिति का जायजा लेने तथा यातायात बहाली के लिए आगे की कार्रवाई कर सकती है।

कुलागाड़ में दोबारा पैदा हुआ यह संकट सीमांत क्षेत्र की संवेदनशील सड़क और पुल व्यवस्था पर भी सवाल खड़े कर रहा है। अब सबसे बड़ी चुनौती प्रभावित मार्ग को जल्द से जल्द बहाल करना होगी, ताकि सीमांत गांवों और सुरक्षा चौकियों तक आवागमन सामान्य हो सके। _ रोहित :धारचुला