पिथौरागढ़। लाखों रुपये की निवेश धोखाधड़ी के चर्चित मामले में पिथौरागढ़ न्यायालय ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। न्यायालय ने अभियुक्त अभय श्रीवास्तव और दीपा श्रीवास्तव को दोषी करार देते हुए 6-6 वर्ष के सश्रम कारावास तथा ₹20-20 हजार के अर्थदंड से दंडित किया है। इसके साथ ही मामले में संलिप्त आधार मल्टीपल पिथौरागढ़ सेन्ट्रल निधि लिमिटेड कंपनी पर ₹2 लाख का जुर्माना भी लगाया गया है।

मामला वर्ष 2020 का है। दिनांक 12 फरवरी 2020 को वादिनी श्रीमती पूर्णिमा थापा की तहरीर पर कोतवाली पिथौरागढ़ में अभय श्रीवास्तव एवं दीपा श्रीवास्तव, निवासी राजाजीपुरम, थाना तालकटोरा, लखनऊ के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया था। आरोप था कि कंपनी के माध्यम से निवेश के नाम पर लोगों से करीब ₹26 लाख की धोखाधड़ी की गई।

मामले में धारा 406, 409, 420 भा.दं.सं. तथा धारा 3 उत्तराखण्ड निक्षेपक हित संरक्षण अधिनियम, 2005 के तहत अभियोग पंजीकृत किया गया।

वैज्ञानिक तरीके से हुई विवेचना प्रकरण की विवेचना तत्कालीन विवेचक उपनिरीक्षक सुशील जोशी ने की। पुलिस के अनुसार विवेचना के दौरान पर्याप्त साक्ष्य संकलित किए गए और 22 मार्च 2021 को आरोप पत्र न्यायालय में दाखिल किया गया।

मामले की पैरवी सहायक निदेशक अभियोजन राकेश चन्द के पर्यवेक्षण में जिला शासकीय अधिवक्ता प्रमोद पन्त द्वारा की गई।

सुनवाई के बाद सत्र न्यायाधीश पिथौरागढ़ धनंजय चतुर्वेदी ने दोनों अभियुक्तों को दोषी ठहराते हुए 6-6 वर्ष के सश्रम कारावास और ₹20-20 हजार के अर्थदंड की सजा सुनाई। अर्थदंड जमा नहीं करने पर दोनों को 2-2 माह का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा।

कंपनी पर भी ₹2 लाख का जुर्माना न्यायालय ने आधार मल्टीपल पिथौरागढ़ सेन्ट्रल निधि लिमिटेड पर भी ₹2 लाख का आर्थिक दंड लगाया है। इसकी वसूली कंपनी के प्रबंध निदेशक अभय श्रीवास्तव एवं मुख्य प्रबंध निदेशक दीपा श्रीवास्तव से की जाएगी।

पुलिस के अनुसार यह मामला उत्तराखण्ड निक्षेपक हित संरक्षण (UPID) अधिनियम के तहत जनपद पिथौरागढ़ में पहली दोषसिद्धि तथा कंपनी पर आर्थिक दंड से जुड़ा महत्वपूर्ण मामला है। फैसला निवेशकों के हितों की सुरक्षा और आर्थिक अपराधों के मामलों में कानूनी कार्रवाई के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

निवेशकों के लिए जरूरी संदेश किसी भी योजना, कंपनी, निधि या निवेश संस्था में पैसा लगाने से पहले उसकी पूरी जानकारी और वैधता की जांच जरूर करें। कंपनी का पंजीकरण, दस्तावेज, निवेश की शर्तें, रिटर्न का आधार और संबंधित सरकारी/नियामकीय स्वीकृतियों की जानकारी प्राप्त करने के बाद ही निवेश करें।

सिर्फ अधिक मुनाफे या कम समय में पैसा दोगुना करने के लालच में आकर निवेश न करें। अनजान लोगों या संदिग्ध संस्थाओं को अपनी मेहनत की कमाई सौंपने से पहले पूरी तरह सत्यापन करें। सावधानी ही आर्थिक धोखाधड़ी से बचाव का सबसे मजबूत उपाय है ।