पिथौरागढ़। जनपद पिथौरागढ़ के उच्च हिमालयी क्षेत्रों में जनगणना का कार्य शुरू हो गया है। मुनस्यारी और धारचूला तहसीलों के बर्फ से ढके और दुर्गम इलाकों में 1 सितंबर से 30 सितंबर 2026 तक घर-घर जाकर जनगणना की जाएगी। इसके लिए प्रशासन ने प्रगणक दलों की तैनाती कर सभी आवश्यक तैयारियां पूरी कर ली हैं।

जनगणना के तहत जोहार, दारमा और व्यांस घाटियों के कुल 35 गांवों को शामिल किया गया है। इन क्षेत्रों में वर्तमान समय में कई ग्रामीण अपने उच्च हिमालयी गांवों में ही निवास कर रहे हैं। ऐसे में प्रगणक दल गांव-गांव और घर-घर पहुंचकर परिवारों एवं प्रत्येक व्यक्ति की जानकारी दर्ज करेंगे।

अपर जिलाधिकारी योगेंद्र सिंह ने बताया कि जनगणना प्रपत्र में निर्धारित मानकों के अनुसार उच्च हिमालयी क्षेत्रों में रहने वाली आबादी की गणना के लिए प्रगणक दलों को तैनात किया गया है। दारमा और व्यांस घाटी के उच्च हिमालयी क्षेत्रों में लगभग प्रत्येक 650 लोगों पर एक प्रगणक की तैनाती की गई है।

जनगणना के दौरान प्रत्येक व्यक्ति से 40 से अधिक प्रश्न पूछे जाएंगे। इनमें परिवार से जुड़े विवरण के साथ-साथ व्यक्ति का व्यवसाय, शैक्षिक योग्यता, महिलाओं की प्रजनन स्थिति, आवास और रहन-सहन की परिस्थितियां तथा जाति और अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति से संबंधित जानकारी शामिल होगी।

जिलाधिकारी एवं पिथौरागढ़ के प्रमुख जनगणना अधिकारी आशीष भटगांई ने बताया कि जोहार, दारमा और व्यांस घाटियों के उच्च हिमालयी क्षेत्रों में घर-घर जनगणना के लिए सभी आवश्यक तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। तीनों घाटियों के 35 गांवों में जनगणना कार्य के लिए टीमों का गठन कर उनकी तैनाती कर दी गई है।

जिलाधिकारी ने कहा कि उच्च हिमालय के दुर्गम और बर्फीले क्षेत्रों की चुनौती के बावजूद जनगणना कार्य को निर्धारित मानकों और प्रक्रिया के तहत समयबद्ध तरीके से पूरा किया जाएगा। इस अभियान के जरिए इन सीमांत और उच्च हिमालयी गांवों में निवासरत लोगों का आधिकारिक जनसांख्यिकीय विवरण दर्ज किया जाएगा। _ वाणी न्यूज