पिथौरागढ़। शहर के बिण क्षेत्र में रविवार देर रात हुआ बाइक और बुलेट का भीषण हादसा एक बार फिर सड़क सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर गया। इस दुर्घटना में 20 वर्षीय धीरज भट्ट की जान चली गई, जबकि तीन अन्य युवक गंभीर रूप से घायल हो गए। हादसे ने एक परिवार की खुशियां छीन लीं और कई परिवारों को चिंता और पीड़ा में डाल दिया।

रात करीब 12 बजे बिण पेट्रोल पंप के पास बाइक और बुलेट की आमने-सामने टक्कर हो गई। टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि दोनों वाहनों को भारी नुकसान पहुंचा और उन पर सवार चारों युवक सड़क पर गिरकर घायल हो गए। स्थानीय लोगों की मदद से सभी को जिला अस्पताल पहुंचाया गया। गंभीर स्थिति को देखते हुए चिकित्सकों ने उन्हें हायर सेंटर रेफर कर दिया।

हादसे में बस्तड़ी निवासी और वर्तमान में जाजरदेवल में रह रहे धीरज भट्ट ने उपचार के लिए ले जाते समय दम तोड़ दिया। धीरज एलएसएम परिसर में स्नातक का छात्र था। उसके पिता आईटीबीपी में तैनात हैं। बेटे की असमय मौत की खबर से परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। दुर्घटना में बाइक सवार केशव शर्मा और बुलेट पर सवार कुमाऊं रेजिमेंट के जवान महिमन सिंह व राजेश रावत भी गंभीर रूप से घायल हुए। सेना अपने जवानों को उपचार के लिए सैनिक अस्पताल ले गई, जबकि धीरज के परिजन उसे बेहतर इलाज की उम्मीद में बरेली की ओर लेकर निकले थे। लेकिन रास्ते में ही उसकी सांसें थम गईं।

यह दुर्घटना केवल एक दुखद खबर नहीं, बल्कि हर उस व्यक्ति के लिए चेतावनी है जो रात में दोपहिया वाहन लेकर सड़क पर निकलता है। सड़क पर जरा-सी लापरवाही, जरूरत से ज्यादा रफ्तार या कुछ पल की असावधानी जिंदगी भर का दर्द दे सकती है। वाहन चलाते समय हमें सिर्फ अपनी मंजिल तक पहुंचने की जल्दी नहीं, बल्कि सुरक्षित घर लौटने की जिम्मेदारी भी याद रखनी चाहिए। क्योंकि सड़क पर हमारा इंतजार सिर्फ हम नहीं, बल्कि हमारा पूरा परिवार कर रहा होता है। एक हादसा किसी मां की उम्मीद, पिता का सहारा और भाई-बहन की खुशियां छीन सकता है। इसलिए सवाल सिर्फ यह नहीं कि हादसा कैसे हुआ, बल्कि यह भी है कि क्या हम अपनी और दूसरों की जिंदगी की कीमत समझते हैं ?

रात में वाहन चलाते समय गति नियंत्रित रखें, सामने से आने वाले वाहन की रोशनी और दूरी पर ध्यान दें, हेलमेट का इस्तेमाल करें और नशे की हालत में कभी वाहन न चलाएं। सड़क खाली होने का अर्थ यह नहीं कि वह पूरी तरह सुरक्षित है। थोड़ी-सी असावधानी भी जिंदगी बदल सकती है। धीरज की मौत एक परिवार की अपूरणीय क्षति है। उम्मीद है कि इस हादसे से सबक लेते हुए लोग यातायात नियमों को केवल कानूनी मजबूरी नहीं, बल्कि अपनी और दूसरों की जिंदगी बचाने की जिम्मेदारी समझेंगे ।