पिथौरागढ़। जिले में निराश्रित और आवारा पशुओं की समस्या एक बार फिर चर्चा में है। सोशल मीडिया पर वायरल एक पोस्ट में आरोप लगाया गया है कि कुछ ट्रक और पिकअप चालक कथित रूप से गाय मालिकों से पैसे लेकर रात के समय गायों को बंदरलीमा से ओगला-चरमा के बीच जंगल क्षेत्र में छोड़ रहे हैं। पोस्ट में इस पूरे मामले की जांच कर जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की गई है।

यह आरोप पूर्व ब्रजवासी गो रक्षा सेना दल के जिला अध्यक्ष पिथौरागढ़ हरीश सिंह खोलिया तथा पूर्व क्षेत्र पंचायत सदस्य तोली-चुफात राजेंद्र सिंह खोलिया की ओर से सोशल मीडिया पोस्ट के माध्यम से लगाए गए हैं। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि अभी नहीं हुई है।

पोस्ट में दावा किया गया है कि जंगल और सड़क के आसपास छोड़ी जा रही गायों के सामने भोजन और पानी का संकट पैदा हो रहा है। साथ ही सड़क पर भटकने वाले पशुओं के वाहनों की चपेट में आने की आशंका भी जताई गई है। जंगल में जंगली जानवरों से उनके लिए खतरा होने की बात भी पोस्ट में कही गई है।

गौ संरक्षण से जुड़े इस मुद्दे का एक दूसरा पहलू ग्रामीण किसानों की समस्या भी है। निराश्रित पशुओं के खेतों में पहुंचने से फसलों को नुकसान पहुंचने की शिकायतें समय-समय पर सामने आती रही हैं। ऐसे में सवाल यह है कि पशुओं को छोड़ने के बजाय उनके संरक्षण, आश्रय और उचित प्रबंधन की स्थायी व्यवस्था क्यों नहीं विकसित की जा रही है।

पोस्ट के माध्यम से मांग की गई है कि बंदरलीमा से ओगला-चरमा मार्ग पर रात के समय आने-जाने वाले पिकअप और ट्रकों की जांच की जाए। साथ ही क्षेत्र में उपलब्ध सीसीटीवी फुटेज की जांच कर यह पता लगाया जाए कि क्या वास्तव में बाहर से लाकर पशुओं को यहां छोड़ा जा रहा है। यदि किसी व्यक्ति या वाहन संचालक द्वारा पैसे लेकर पशुओं को जानबूझकर लावारिस छोड़ने की बात जांच में सामने आती है, तो संबंधित कानूनों के तहत कार्रवाई किए जाने की मांग भी उठाई गई है।

इस पूरे मामले ने एक बड़ा सवाल जरूर खड़ा किया है कि गौ संरक्षण केवल भावनात्मक या धार्मिक मुद्दा बनकर न रह जाए, बल्कि इसके लिए व्यावहारिक व्यवस्था भी हो। पशु मालिकों की जिम्मेदारी, स्थानीय निकायों की भूमिका, पशु चिकित्सा व्यवस्था, गौशालाओं की क्षमता और निराश्रित पशुओं के पुनर्वास जैसे मुद्दों पर प्रशासन को स्पष्ट नीति और प्रभावी व्यवस्था सुनिश्चित करनी होगी।

साथ ही यह भी जरूरी है कि सोशल मीडिया पर सामने आने वाले आरोपों की निष्पक्ष जांच हो, ताकि यदि पशुओं को जानबूझकर छोड़े जाने का मामला सही है तो जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई हो और यदि आरोपों में तथ्य नहीं हैं तो वास्तविक स्थिति भी सामने आ सके।

गौ संरक्षण के साथ-साथ पशु कल्याण और किसानों की फसल सुरक्षा—तीनों पहलुओं को ध्यान में रखते हुए प्रशासन द्वारा इस मामले की जांच कर स्थिति स्पष्ट करना आवश्यक है । स्रोत : हरीश सिंह खोलिया फेसबुक पोस्ट