देहरादून। प्रधानमंत्री आवास के बाहर कांग्रेस सांसद एवं लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी द्वारा दिए गए धरने के विरोध में बुधवार को देहरादून में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के कार्यकर्ताओं ने प्रदेश अध्यक्ष के नेतृत्व में कांग्रेस मुख्यालय के घेराव का प्रयास किया। प्रदर्शन को देखते हुए भारी पुलिस बल तैनात किया गया था। पुलिस ने बैरिकेडिंग लगाकर भाजपा कार्यकर्ताओं को कांग्रेस मुख्यालय की ओर बढ़ने से रोक दिया, जिससे कुछ देर तक तनाव की स्थिति बनी रही, हालांकि हालात पूरी तरह नियंत्रण में रहे।

भाजपा कार्यकर्ताओं ने कांग्रेस के खिलाफ जमकर नारेबाजी करते हुए आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री आवास जैसे अति-सुरक्षित क्षेत्र में धरना देकर कांग्रेस ने लोकतांत्रिक परंपराओं और संवैधानिक मर्यादाओं का उल्लंघन किया है। प्रदर्शन में शामिल नेताओं का कहना था कि केंद्र सरकार विकास और जनकल्याण के कार्यों में लगी है, जबकि कांग्रेस देश में अराजकता का माहौल बनाने का प्रयास कर रही है।

पुलिस प्रशासन ने सुरक्षा व्यवस्था के मद्देनज़र कांग्रेस मुख्यालय की ओर जाने वाले मार्गों पर बैरिकेडिंग कर दी। भाजपा कार्यकर्ताओं ने आगे बढ़ने की कोशिश की, लेकिन पुलिस ने उन्हें निर्धारित स्थान पर ही रोक दिया। इस दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच हल्की नोकझोंक भी हुई, हालांकि किसी अप्रिय घटना की सूचना नहीं है।

भाजपा नेताओं ने कहा कि राहुल गांधी का प्रधानमंत्री आवास के बाहर धरना केवल राजनीतिक प्रचार का माध्यम है और इससे लोकतांत्रिक संस्थाओं की गरिमा प्रभावित होती है। उन्होंने कहा कि जनता सरकार के विकास कार्यों के साथ खड़ी है और कांग्रेस का आंदोलन केवल राजनीतिक अस्थिरता पैदा करने का प्रयास है। वहीं कांग्रेस पहले ही अपने आंदोलन को युवाओं और परीक्षा संबंधी मुद्दों से जुड़ा लोकतांत्रिक विरोध बता चुकी है।

लोकतंत्र में सत्ता पक्ष का विरोध प्रदर्शन राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि भारतीय लोकतंत्र में सामान्यतः विपक्ष सरकार के खिलाफ आंदोलन करता है, लेकिन कई अवसरों पर सत्तारूढ़ दल भी विपक्ष के विरोध में प्रदर्शन, धरना, रैली या घेराव आयोजित करते रहे हैं। ऐसे राजनीतिक विरोध लोकतांत्रिक व्यवस्था का हिस्सा माने जाते हैं, बशर्ते वे कानून-व्यवस्था और संवैधानिक मर्यादाओं के दायरे में हों।

मीडिया स्रोत: मीडिया रिपोर्ट ।