डीडीहाट। मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR को लेकर डीडीहाट में कांग्रेस ने मोर्चा खोल दिया है। गांधी पार्क में ब्लॉक कांग्रेस के नेतृत्व में कार्यकर्ताओं ने धरना-प्रदर्शन कर चुनाव आयोग की प्रक्रिया और सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए। प्रदर्शन के दौरान कांग्रेस नेता आनंद रावत ने कहा कि डीडीहाट विधानसभा क्षेत्र में SIR के चलते कई परिवारों की महिलाओं, विशेषकर नेपाल से विवाह के बाद भारत में रह रही बहू-बेटियों के मताधिकार को लेकर गंभीर स्थिति पैदा हुई है।

आनंद रावत ने कहा कि डीडीहाट क्षेत्र में बड़ी संख्या में ऐसी महिलाएं हैं, जिनका विवाह नेपाल से हुआ है और वे लंबे समय से यहां परिवार के साथ रह रही हैं। उनके मुताबिक इनमें से कई महिलाएं पहले ग्राम प्रधान, क्षेत्र पंचायत सदस्य और जिला पंचायत सदस्य जैसे लोकतांत्रिक पदों पर भी रह चुकी हैं। रावत का आरोप है कि SIR की प्रक्रिया के दौरान ऐसी कई महिलाओं के नाम मतदाता सूची से प्रभावित हुए हैं।

हालांकि, किसी व्यक्ति की नागरिकता और मतदाता बनने की पात्रता अलग-अलग कानूनी प्रश्न हैं, इसलिए केवल भारत में विवाह या लंबे समय से निवास को अपने-आप भारतीय मतदाता होने का प्रमाण नहीं माना जा सकता। डीडीहाट में SIR के दौरान प्रशासन ने भी स्पष्ट किया था कि आधार कार्ड पहचान के लिए मान्य है, लेकिन नागरिकता का प्रमाण नहीं है।

आनंद रावत ने आरोप लगाते हुए कहा कि SIR की प्रक्रिया में नियमों के नाम पर ऐसी महिलाओं के नाम भी प्रभावित हुए हैं, जिनका परिवार और सामाजिक जीवन लंबे समय से क्षेत्र में है। उन्होंने कहा कि यह केवल राजनीतिक दल का मुद्दा नहीं बल्कि उन परिवारों के लोकतांत्रिक अधिकार से जुड़ा सवाल है।

उत्तराखंड में SIR के बाद अंतिम मतदाता सूची 3 अक्टूबर 2026 को जारी हुई है। अंतिम सूची में 71,58,949 मतदाता दर्ज हैं, जबकि SIR शुरू होने के समय राज्य में 79,60,762 मतदाता थे। चुनाव आयोग ने कहा है कि जिन पात्र लोगों के नाम अंतिम सूची में नहीं आ पाए हैं, वे फॉर्म-6 के माध्यम से दोबारा नाम जुड़वाने के लिए आवेदन कर सकते हैं और BLO को घर-घर जाकर ऐसे मतदाताओं की पहचान करने के निर्देश दिए गए हैं।

धरने को संबोधित करते हुए आनंद रावत ने चुनाव आयोग की निष्पक्षता को लेकर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि पिछले दिनों मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के संबंध में उनके सहयोगियों द्वारा आयोग की निष्पक्षता पर सवाल उठाए जाने की बातें सामने आई थीं और कांग्रेस लंबे समय से इसी मुद्दे को उठाती रही है। कांग्रेस प्रदेश और देश के विभिन्न हिस्सों में SIR को लेकर चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठा रही है। पार्टी का मुख्य तर्क है कि पुनरीक्षण की प्रक्रिया में पात्र मतदाताओं के नाम न कटें और नाम हटाने की प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी हो।

धरने के दौरान आनंद रावत ने डीडीहाट क्षेत्र की खस्ताहाल सड़कों का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने आरोप लगाया कि क्षेत्र की कई सड़कों की हालत लगातार खराब होती जा रही है और सरकार तथा स्थानीय विधायक इस ओर पर्याप्त ध्यान नहीं दे रहे हैं।

रावत ने कहा कि कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में इन सड़कों के निर्माण और सुधार के लिए टोकन मनी तक जारी हो चुकी थी, लेकिन वर्तमान सरकार और स्थानीय विधायक की कथित उदासीनता के कारण काम आगे नहीं बढ़ पाया। उन्होंने कहा कि सड़कें क्षेत्र के ग्रामीणों की रोजमर्रा की जिंदगी और आर्थिक गतिविधियों से सीधे जुड़ी हैं, इसलिए इनके निर्माण में देरी का असर आम जनता पर पड़ रहा है।

डीडीहाट में कांग्रेस का यह आंदोलन फिलहाल दो प्रमुख मुद्दों पर केंद्रित दिखाई दिया—SIR के बाद मतदाता सूची में नामों को लेकर उठे सवाल और क्षेत्र की सड़कों की बदहाल स्थिति। कांग्रेस नेताओं ने कहा कि दोनों ही मुद्दे सीधे आम जनता के अधिकार और सुविधा से जुड़े हैं।

वहीं चुनाव आयोग की ओर से कहा गया है कि SIR के बाद भी पात्र मतदाताओं के लिए नाम दर्ज कराने की प्रक्रिया खुली है और छूटे हुए लोगों की पहचान के लिए विशेष अभियान चलाया जा रहा है। अब डीडीहाट में बड़ा सवाल यही है कि SIR से प्रभावित होने का दावा कर रहे लोगों के मामलों में कितने लोग वास्तव में मतदाता बनने की कानूनी पात्रता रखते हैं और कितने नाम दस्तावेजी या अन्य कारणों से सूची से बाहर हुए हैं। इस सवाल का जवाब व्यक्तिगत मामलों के सत्यापन के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा।