पिथौरागढ़। उत्तराखंड के शांत पहाड़ों में नशे का बढ़ता खतरा समाज के लिए गंभीर चिंता का विषय बनता जा रहा है। युवा पीढ़ी को नशे से बचाने की चुनौती के बीच पिथौरागढ़ जिले के बेरीनाग क्षेत्र में पुलिस ने एक 22 वर्षीय युवक को स्मैक के साथ गिरफ्तार किया है। यह कार्रवाई जहां नशे के अवैध कारोबार के खिलाफ पुलिस अभियान का हिस्सा है, वहीं यह सवाल भी खड़ा करती है कि आखिर पहाड़ के युवाओं तक स्मैक जैसे खतरनाक नशीले पदार्थ पहुंच कैसे रहे हैं?
पुलिस अधीक्षक पिथौरागढ़ के निर्देशन में नशे के अवैध कारोबार के विरुद्ध चलाए जा रहे अभियान के तहत 8 अक्टूबर 2026 को थानाध्यक्ष बेरीनाग नरेश कुमार गंगवार के नेतृत्व में पुलिस टीम सेराघाट क्षेत्र में चेकिंग कर रही थी। इस दौरान संदेह के आधार पर एक युवक को रोककर तलाशी ली गई। पुलिस के अनुसार, युवक के कब्जे से 1.40 ग्राम अवैध स्मैक बरामद हुई।
आरोपी की पहचान हरपाल सिंह (22 वर्ष), निवासी ग्राम बांस के रूप में हुई है। पुलिस ने उसे हिरासत में लेकर कोतवाली बेरीनाग में एनडीपीएस एक्ट की धारा 8/21 के तहत मुकदमा दर्ज किया है। पुलिस अब स्मैक के स्रोत और इस अवैध कारोबार में अन्य लोगों की संभावित संलिप्तता के संबंध में पूछताछ कर रही है।
कार्रवाई जरूरी, लेकिन क्या इतना ही काफी है?
नशे के खिलाफ पुलिस की कार्रवाई आवश्यक है, लेकिन इस समस्या का समाधान केवल गिरफ्तारी और चेकिंग तक सीमित नहीं रह सकता। पहाड़ के गांवों और कस्बों में युवाओं को नशे से बचाने के लिए परिवार, विद्यालय, सामाजिक संगठनों और प्रशासन को भी मिलकर प्रयास करने होंगे।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि युवाओं तक स्मैक पहुंचाने वाले नेटवर्क की पहचान और उसे तोड़ने के लिए कितनी प्रभावी कार्रवाई हो रही है? क्या संवेदनशील क्षेत्रों में नियमित निगरानी के साथ नशे के स्रोत तक पहुंचने की कोशिश की जा रही है? क्या स्कूल-कॉलेजों और ग्रामीण क्षेत्रों में युवाओं को नशे के शारीरिक, मानसिक और सामाजिक दुष्परिणामों के प्रति लगातार जागरूक किया जा रहा है?
इन सवालों पर गंभीरता से काम करना इसलिए जरूरी है, क्योंकि नशे की समस्या केवल कानून-व्यवस्था का विषय नहीं, बल्कि युवाओं के भविष्य, परिवारों की सुरक्षा और पूरे समाज के स्वास्थ्य से जुड़ी चुनौती है।
युवाओं को बचाने के लिए समाज की भूमिका अहम नशे की शुरुआत के पीछे अलग-अलग कारण हो सकते हैं। साथियों का दबाव, तनाव, गलत संगत और समय पर मार्गदर्शन का अभाव कुछ युवाओं को इसकी ओर धकेल सकता है। ऐसे में परिवारों को बच्चों के व्यवहार में अचानक आए बदलावों पर संवेदनशीलता से ध्यान देने, संवाद बनाए रखने और जरूरत पड़ने पर विशेषज्ञ सहायता लेने की आवश्यकता है।
प्रशासन और पुलिस को नशे की आपूर्ति करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई के साथ स्कूलों, कॉलेजों और गांवों में जागरूकता अभियान, परामर्श सुविधाओं और नशामुक्ति सहायता को भी मजबूत करना चाहिए। साथ ही, नशे की लत से जूझ रहे युवाओं को केवल अपराधी के रूप में देखने के बजाय उन्हें उचित उपचार और पुनर्वास उपलब्ध कराने पर भी ध्यान देना जरूरी है।
पिथौरागढ़ पुलिस ने आम लोगों से नशे के अवैध कारोबार की सूचना देने और नशामुक्त समाज के निर्माण में सहयोग करने की अपील की है।
सवाल सिर्फ यह नहीं है कि स्मैक के साथ कितने लोग पकड़े गए, बल्कि यह भी है कि कितने युवाओं को इसकी गिरफ्त में आने से बचाया गया। पहाड़ की युवा पीढ़ी को नशे से बचाने के लिए कार्रवाई, जागरूकता, उपचार और सामाजिक जिम्मेदारी—इन सभी मोर्चों पर एक साथ काम करना समय की मांग है।


