देहरादून/पिथौरागढ़। जंतर-मंतर पर चल रहे आंदोलन के दौरान वायरल हुए पूर्व उत्तराखंड पुलिसकर्मी शेर सिंह के बयान के बाद उत्तराखंड पुलिस ने आधिकारिक रूप से अपना पक्ष रखा है। कुमाऊं रेंज की पुलिस महानिरीक्षक (आईजी) निवेदिता कुकरेती ने उत्तराखंड पुलिस के आधिकारिक फेसबुक पेज पर जारी वीडियो संदेश में शेर सिंह के विरुद्ध दर्ज आपराधिक प्रकरणों तथा विभागीय कार्रवाई की जानकारी साझा की।

पुलिस के अनुसार, शेर सिंह 28 जून 2026 से पिथौरागढ़ में अपनी तैनाती के दौरान बिना अनुमति ड्यूटी से अनुपस्थित था। इस संबंध में पुलिस अधीक्षक पिथौरागढ़ द्वारा उसे नोटिस जारी कर स्पष्टीकरण मांगा गया, लेकिन निर्धारित समय तक कोई उत्तर प्राप्त नहीं हुआ। इसके बाद विभागीय नियमों के तहत 20 जुलाई 2026 को उसे निलंबित कर दिया गया।

आईजी कुमाऊं ने अपने बयान में यह भी कहा कि शेर सिंह का नाम पहले से एक गंभीर आपराधिक मामले में सामने आ चुका है। पुलिस के अनुसार, हरिद्वार-रुड़की का कुख्यात गैंगस्टर प्रवीण वाल्मीकि, जिसके विरुद्ध हत्या, हत्या के प्रयास, अवैध वसूली, अपहरण और भूमि पर अवैध कब्जे सहित दर्जनों आपराधिक मुकदमे दर्ज हैं, उसके गैंग से शेर सिंह के संबंध पाए गए थे।

पुलिस का दावा है कि उत्तराखंड पुलिस में कॉन्स्टेबल रहते हुए शेर सिंह ने अपने पद का दुरुपयोग किया। आरोप है कि उसने कई बार सितारगंज जेल तथा रुड़की कोर्ट में बंद गैंगस्टर प्रवीण वाल्मीकि से मुलाकात की और एक भूमि विवाद से जुड़ी पीड़िता एवं उसके परिवार पर मुकदमा वापस लेने का दबाव बनाया। पुलिस के अनुसार, अदालत में पेशी के दौरान भी पीड़ित परिवार को धमकाया गया तथा संबंधित भूमि की बिक्री से गैंग के सदस्यों ने अवैध आर्थिक लाभ अर्जित किया।

इसी मामले में थाना गंगनहर, जनपद हरिद्वार में मुकदमा संख्या 415/2025 के तहत भारतीय दंड संहिता (IPC) की धाराएँ 420, 467, 468, 471 और 120-बी तथा भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धाराएँ 111(2)(बी), 351(2) और 352 के अंतर्गत मुकदमा दर्ज किया गया था।

पुलिस के अनुसार, उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर शेर सिंह को 15 सितंबर 2025 को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया था। बाद में 7 नवंबर 2025 को उत्तराखंड उच्च न्यायालय से जमानत मिलने के बाद वह जेल से रिहा हो गया।

आईजी निवेदिता कुकरेती ने कहा कि सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे बयानों को लेकर जनता केवल आधिकारिक तथ्यों पर भरोसा करे और किसी भी भ्रामक जानकारी से सावधान रहे।

नोट: यह समाचार उत्तराखंड पुलिस के आधिकारिक फेसबुक पेज पर जारी बयान और विभागीय जानकारी के आधार पर तैयार किया गया है। समाचार में वर्णित आरोप पुलिस के दावों पर आधारित हैं। संबंधित मामला न्यायिक प्रक्रिया के अधीन है और शेर सिंह को पूर्व में इस मामले में जमानत मिल चुकी है। दोष या निर्दोष होने का अंतिम निर्णय न्यायालय द्वारा किया जाएगा।