डीडीहाट। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र डीडीहाट की स्वास्थ्य व्यवस्थाओं को लेकर डीडीहाट निवासी गोविंद सिंह द्वारा फेसबुक पर प्रसारित किए गए एक वीडियो के बाद अस्पताल की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो गए हैं। वीडियो में एक प्रसूता को अस्पताल पहुंचाने के दौरान सामने आई परिस्थितियों से लेकर नवजात की रात में निगरानी, वार्ड की बुनियादी सुविधाओं और स्टाफ के व्यवहार तक पर सवाल उठाए गए हैं।
परिजनों के अनुसार, गर्भवती महिला को प्रसव पीड़ा होने पर 108 एंबुलेंस सेवा के लिए संपर्क किया गया था। आरोप है कि उन्हें बताया गया कि डीडीहाट में उस समय एंबुलेंस उपलब्ध नहीं है और अस्कोट से एंबुलेंस भेजी जाएगी। स्थिति को देखते हुए परिवार ने एंबुलेंस का इंतजार करने के बजाय महिला को स्वयं अस्पताल ले जाने का निर्णय लिया।
परिवार का दावा है कि अस्पताल पहुंचने से पहले ही रास्ते में महिला का प्रसव हो गया। इसके बाद जच्चा और नवजात को CHC लाया गया। परिजनों का आरोप है कि रात के समय नवजात बच्चा लगातार रोता रहा। इसकी जानकारी ड्यूटी नर्स को दिए जाने के बावजूद उन्हें अपेक्षित प्रतिक्रिया नहीं मिली। परिजनों के मुताबिक, सुबह मामले की जानकारी दिए जाने के बाद नवजात को डॉक्टर की टेबल पर बुलाकर देखा गया।
इस पूरे घटनाक्रम ने रात के समय प्रसव के बाद नवजात की निगरानी और चिकित्सा व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। परिजनों ने अस्पताल के वार्ड की स्थिति को लेकर भी नाराजगी जताई है। उनका कहना है कि जिस कमरे में प्रसूता को रखा गया, उसमें खिड़की नहीं थी और मच्छरों की समस्या बनी हुई थी। आरोप है कि मच्छरों से बचाव के लिए परिवार को स्वयं बाहर से आवश्यक सामग्री खरीदकर लानी पड़ी। परिजनों ने अस्पताल के कुछ कर्मचारियों के व्यवहार को लेकर भी असंतोष जताया है। उनका कहना है कि जब उन्होंने व्यवस्थाओं को लेकर सवाल किए तो उन्हें संतोषजनक जवाब नहीं मिला।
मामले में सबसे महत्वपूर्ण सवाल 108 एंबुलेंस सेवा की उपलब्धता को लेकर है। परिजनों के अनुसार उन्हें रात में डीडीहाट में एंबुलेंस उपलब्ध नहीं होने और अस्कोट से एंबुलेंस भेजे जाने की जानकारी दी गई थी। वहीं बाद में अस्पताल परिसर में 108 एंबुलेंस खड़ी दिखाई देने के बाद परिवार ने पूरी व्यवस्था पर सवाल उठाया। हालांकि, उस समय एंबुलेंस वास्तव में कहां तैनात थी, उसकी ड्यूटी क्या थी, परिवार की कॉल पर क्या कार्रवाई हुई और अस्कोट से एंबुलेंस भेजे जाने की प्रक्रिया क्या रही—इन सवालों का स्पष्ट जवाब संबंधित विभाग की जांच के बाद ही सामने आ सकेगा।
मामले को लेकर CHC डीडीहाट के चिकित्सा प्रभारी बृजेश त्रिपाठी ने बताया कि 108 एंबुलेंस सेवा देहरादून से संचालित होती है। उन्होंने कहा कि उस समय वास्तविक स्थिति क्या रही होगी, इसके बारे में अभी निश्चित रूप से कुछ नहीं कहा जा सकता। उन्होंने स्पष्ट किया कि पूरे मामले की जांच के बाद ही वास्तविक स्थिति के बारे में कुछ कहा जा सकेगा।
ऐसे में विभागीय स्तर पर जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो पाएगा कि एंबुलेंस की उपलब्धता की वास्तविक स्थिति क्या थी और परिवार द्वारा लगाए गए अन्य आरोपों में कितनी सच्चाई है।
फिलहाल मामला आरोपों और जवाब के बीच है। परिवार ने वीडियो के माध्यम से अपनी शिकायत सार्वजनिक की है, जबकि CHC प्रभारी ने पूरे मामले की वास्तविक स्थिति जांच के बाद स्पष्ट होने की बात कही है। अब निगाहें विभागीय जांच पर हैं। जांच में सामने आने वाली सच्चाई ही यह तय करेगी कि मामला व्यवस्था की कमी का था, संसाधनों की उपलब्धता का था या फिर कहीं न कहीं जिम्मेदारी निभाने में चूक हुई थी।
इस पूरे घटनाक्रम ने डीडीहाट CHC की स्वास्थ्य व्यवस्थाओं को लेकर कई सवाल सामने ला दिए हैं। क्या प्रसव जैसी आपात स्थिति में अस्पताल तक पहुंचने के लिए मरीज के परिजनों को स्वयं व्यवस्था करनी पड़ेगी? रात में नवजात की निगरानी की जिम्मेदारी किसकी है? वार्ड में मच्छरों और बुनियादी सुविधाओं की कमी के लिए जवाबदेह कौन है? और सबसे बड़ा सवाल—आखिर इस नाकामी की जिम्मेदारी किसकी है ?
_हर्षित मेहरा डीडीहाट



