पिथौरागढ़। नैनीसैनी , देवत , पधेड़ा और कुमडार क्षेत्र के ग्रामीणों के लिए जिला मुख्यालय से जोड़ने वाली यह सड़क महज एक रास्ता नहीं, बल्कि उनकी लाइफ लाइन है। इसी सड़क से रोजाना कमर्शियल वाहनों के साथ स्कूली वाहन, एंबुलेंस, बाइक-स्कूटी और पैदल राहगीरों की आवाजाही होती है। छोटे बच्चे भी इसी मार्ग से पैदल स्कूल जाते हैं। इसके बावजूद सड़क की बदहाल स्थिति ग्रामीणों के लिए लगातार परेशानी और खतरे का कारण बनी हुई है। कपिल भट्ट वाणी न्यूज बरसात के दिनों में सड़क के गड्ढों में पानी भर जाने से हालात और खराब हो जाते हैं। जगह-जगह पानी जमा होने से गड्ढे दिखाई नहीं देते और दोपहिया वाहन चालकों के साथ-साथ पैदल चलने वालों के लिए भी दुर्घटना का खतरा बना रहता है। स्कूली बच्चों को भी इन गड्ढों और कीचड़ से होकर गुजरना पड़ता है।
सड़क की बदहाली को लेकर ग्रामीणों का आक्रोश उस समय सामने आया, जब उन्होंने खुद आगे बढ़कर सड़क के गड्ढों को भरने का काम शुरू कर दिया। ग्रामीणों ने श्रमदान करते हुए सड़क के गड्ढों में सामग्री डालकर उन्हें समतल करने का प्रयास किया, ताकि कम से कम फिलहाल राहगीरों को कुछ राहत मिल सके। इस कार्य में नवीन सिंह, पूर्व प्रधान देवट देव सिंह, वर्तमान प्रधान नाघर-कुंडार सुरेंद्र सिंह, गजेंद्र सिंह उर्फ गजवा, बीटीसी मेंबर कुसोली-शेरी नवीन सिंह सुस्याल और ग्राम प्रधान शेरी-कुंडार दीपक सिंह बिष्ट सहित अन्य ग्रामीणों ने योगदान दिया।
ग्रामीणों का कहना है कि यह नैनीसैनी , देवत , पधेड़ा और कुमडार सहित आसपास के गांवों को जिला मुख्यालय से जोड़ने वाली एकमात्र प्रमुख सड़क है। ऐसे में इसकी अनदेखी सीधे तौर पर ग्रामीणों की रोजमर्रा की जिंदगी और सुरक्षा को प्रभावित करती है। ग्रामीणों ने तंज कसते हुए कहा कि "क्या पता, ग्रामीणों द्वारा खुद सड़क के गड्ढे भरने का यह प्रयास देखकर ही जिम्मेदार विभाग की आंखें खुल जाएं।"
ग्रामीणों का कहना है कि उन्होंने अपनी तरफ से तत्काल समस्या को कम करने की कोशिश कर दी है, लेकिन सड़क की स्थायी मरम्मत और रखरखाव संबंधित विभाग की जिम्मेदारी है। ग्रामीणों ने मांग की है कि सड़क के बचे हुए गड्ढों को भी जल्द भरा जाए और पूरी सड़क की स्थिति का स्थायी समाधान किया जाए।
वहीं, विधानसभा चुनाव नजदीक आने के बीच सड़क की बदहाली ने जवाबदेही और विकास के दावों पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय रहते सड़क की हालत नहीं सुधारी गई तो चुनाव के दौरान क्षेत्र में आने वाले राजनीतिक दलों और जनप्रतिनिधियों से इस मुद्दे पर सवाल किए जाएंगे।
सरकारी प्रेस विज्ञप्तियों, संचार माध्यमों और मीडिया में अक्सर शासन-प्रशासन की सक्रियता और विकास कार्यों की तस्वीर सामने आती है।
लेकिन नैनीसैनी , देवत , पधेड़ा और कुमडार की इस सड़क की तस्वीर कुछ और कहानी कहती है।
क्या कागजों और खबरों में दिखाई जाने वाली शासन-प्रशासन की सक्रियता वास्तव में धरातल पर भी दिखाई देती है?
अगर जिला मुख्यालय से गांवों को जोड़ने वाली एकमात्र सड़क के गड्ढे भरने के लिए ग्रामीणों को खुद आगे आना पड़े, तो फिर जिम्मेदार विभाग और जनप्रतिनिधियों की जवाबदेही आखिर किसकी है ?
ग्रामीणों ने तो अपनी जिम्मेदारी निभा दी—क्या अब उनकी यह पहल देखकर जिम्मेदार विभाग की आंखें खुलेंगी ?


