पिथौरागढ़। जनपद में साइबर अपराध के विरुद्ध चलाए जा रहे विशेष अभियान के तहत पिथौरागढ़ साइबर सेल एवं कोतवाली बेरीनाग पुलिस को बड़ी सफलता मिली है। पुलिस ने साइबर ठगी में इस्तेमाल किए जा रहे 'म्यूल अकाउंट' (Mule Account) गिरोह का खुलासा करते हुए दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है। जांच में सामने आया कि इन बैंक खातों के माध्यम से ₹1.17 करोड़ से अधिक की संदिग्ध धनराशि का लेन-देन किया गया था।
राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल (NCRP) पर प्राप्त शिकायतों के आधार पर पुलिस अधीक्षक पिथौरागढ़ के निर्देशन में प्रभारी निरीक्षक साइबर सेल श्री नीरज भाकुनी के नेतृत्व में टीम ने गहन जांच शुरू की। जांच के दौरान दो ऐसे बैंक खातों की पहचान हुई, जिनका उपयोग साइबर अपराधियों द्वारा ठगी से प्राप्त धनराशि को इधर-उधर भेजने और उसके वास्तविक स्रोत को छिपाने के लिए किया जा रहा था।
पुलिस जांच में पाया गया कि एक बैंक खाते में ₹12,35,832 तथा दूसरे खाते में ₹1,04,96,483 की संदिग्ध धनराशि जमा हुई थी। जांच में स्पष्ट हुआ कि दोनों खाते म्यूल अकाउंट के रूप में संचालित किए जा रहे थे।
क्या होता है म्यूल अकाउंट?
म्यूल अकाउंट वह बैंक खाता होता है, जिसका उपयोग साइबर अपराधी ठगी से प्राप्त धनराशि को एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुंचाने या उसके असली स्रोत को छिपाने के लिए करते हैं। कई बार खाते का वास्तविक धारक स्वयं ठगी नहीं करता, लेकिन लालच, कमीशन या अनजाने में अपना बैंक खाता उपलब्ध कराकर अपराध का हिस्सा बन जाता है।
ऐसे बनते हैं म्यूल अकाउंट साइबर ठग अक्सर भोले-भाले लोगों, विशेषकर युवाओं को जल्दी पैसा कमाने का लालच देकर अपने जाल में फंसाते हैं। वे नौकरी, पार्ट टाइम वर्क, ऑनलाइन इनकम या मोटे कमीशन का झांसा देकर लोगों से उनका बैंक खाता, एटीएम कार्ड, चेकबुक, पासबुक, मोबाइल नंबर, ओटीपी या नेट बैंकिंग की जानकारी ले लेते हैं। इसके बाद उसी खाते में साइबर फ्रॉड की रकम जमा कर उसे तुरंत अन्य खातों में ट्रांसफर कर दिया जाता है।
सबसे ज्यादा निशाने पर युवा पुलिस के अनुसार आजकल नवयुवक जल्दी धन कमाने, ऑनलाइन कमाई और कमीशन के लालच में अपना बैंक खाता किराए पर दे देते हैं। कई लोगों को यह एहसास भी नहीं होता कि उनका खाता साइबर अपराध में इस्तेमाल हो रहा है। लेकिन कानून की नजर में ऐसा करना गंभीर अपराध है और खाता धारक भी कानूनी कार्रवाई का सामना कर सकता है।
इन धाराओं में मुकदमा दर्ज मामले में कोतवाली बेरीनाग में धारा 318(4)/61(2) भारतीय न्याय संहिता (BNS) एवं आईटी एक्ट की धारा 66D के तहत अभियोग पंजीकृत किया गया।
विवेचना के दौरान प्रभारी निरीक्षक कोतवाली बेरीनाग श्री नरेश कुमार गंगवार द्वारा की गई जांच में पवन कुमार (22 वर्ष), निवासी ग्राम पौंसा, बेरीनाग, प्रियांशु कुमार (22 वर्ष), निवासी जाड़ापानी, कूलाखेत, पिथौरागढ़ तथा अमनदीप, निवासी गणाई गंगोली, पिथौरागढ़ के नाम प्रकाश में आए।
पुलिस टीम ने त्वरित कार्रवाई करते हुए प्रियांशु कुमार को हल्द्वानी के दमुवाढूंगा स्थित अम्बेडकर पार्क के पास से तथा पवन कुमार को उसके घर से गिरफ्तार कर लिया। मामले में अन्य आरोपियों की तलाश जारी है और पुलिस द्वारा विस्तृत जांच की जा रही है। गिरफ्तार अभियुक्तों को आवश्यक वैधानिक कार्रवाई के बाद न्यायालय में प्रस्तुत किया जा रहा है।
कैसे बचें म्यूल अकाउंट बनने से?
कभी भी अपना बैंक खाता किसी अन्य व्यक्ति को उपयोग के लिए न दें।
एटीएम कार्ड, चेकबुक, पासबुक, ओटीपी, यूपीआई पिन या नेट बैंकिंग की जानकारी किसी से साझा न करें।
नौकरी, पार्ट टाइम इनकम या कमीशन के नाम पर बैंक खाता मांगने वालों से सावधान रहें।
यदि कोई आपके खाते में पैसे मंगाकर आगे भेजने के लिए कहे तो तुरंत मना करें।
संदिग्ध लेन-देन दिखाई देने पर तुरंत अपने बैंक और साइबर हेल्पलाइन 1930 या www.cybercrime.gov.in पर शिकायत दर्ज कराएं।
किसी भी अनजान व्यक्ति के कहने पर अपने खाते में बड़ी धनराशि का लेन-देन न करें।
पुलिस की अपील पिथौरागढ़ पुलिस ने आमजन, विशेषकर युवाओं से अपील की है कि जल्दी पैसा कमाने के लालच में अपना बैंक खाता किसी को किराए पर न दें। कुछ हजार रुपये के कमीशन के लालच में किया गया यह कदम आपको साइबर अपराध के गंभीर मामले में आरोपी बना सकता है। सतर्क रहें, सुरक्षित रहें और किसी भी संदिग्ध गतिविधि की सूचना तुरंत पुलिस को दें।
गिरफ्तारी करने वाली पुलिस टीम प्रभारी निरीक्षक कोतवाली बेरीनाग – श्री नरेश कुमार गंगवार हेड कांस्टेबल संजीव यादव कांस्टेबल चालक नरेन्द्र मेहता — VANI NEWS


