पिथौरागढ़। सेना मेडल और विशिष्ट सेवा मेडल से सम्मानित ब्रिगेडियर दिग्विजय सिंह बसेड़ा (सेवानिवृत्त) के निदेशक सैनिक कल्याण एवं पुनर्वास, उत्तराखंड का दायित्व संभालने के बाद प्रथम जनपद भ्रमण पर पिथौरागढ़ पहुंचने पर पूर्व सैनिकों में उत्साह और खुशी का माहौल रहा। इस दौरान उन्होंने जिला सैनिक कल्याण एवं पुनर्वास कार्यालय में जनपद के पूर्व सैनिकों से भेंटवार्ता कर उनकी समस्याओं, जरूरतों और कल्याणकारी योजनाओं पर चर्चा की। कार्यक्रम में 98 पूर्व सैनिकों ने प्रतिभाग किया। वहीं, पूर्व सैनिक संगठन पिथौरागढ़ की ओर से भी ब्रिगेडियर बसेड़ा का आत्मीय स्वागत किया गया और लंबे समय से लंबित सैनिक विश्रामगृह की मांग प्रमुखता से उठाई गई।
जिला सैनिक कल्याण एवं पुनर्वास परिसर पिथौरागढ़ में आयोजित भेंटवार्ता के दौरान निदेशक ब्रिगेडियर दिग्विजय सिंह बसेड़ा ने केंद्र एवं राज्य सरकार द्वारा पूर्व सैनिकों और उनके आश्रितों के कल्याण के लिए संचालित विभिन्न योजनाओं की जानकारी दी। उन्होंने पूर्व सैनिकों से इन योजनाओं का अधिकाधिक लाभ उठाने की अपील करते हुए कहा कि सैनिक कल्याण से जुड़ी योजनाओं को प्रभावी ढंग से जरूरतमंदों तक पहुंचाना प्राथमिकता है।
उन्होंने पूर्व सैनिकों एवं उनके परिवारों के हित में संचालित योजनाओं को नई गति देने का आश्वासन भी दिया। साथ ही सैनिक जीवन में अनुशासन, उच्च आचरण और आत्मविश्वास के महत्व को रेखांकित करते हुए पूर्व सैनिकों को सदैव प्रसन्न, आत्मविश्वासी और निर्भीक रहने के लिए प्रेरित किया।
जिला सैनिक कल्याण अधिकारी करम सिंह बिष्ट ने बताया कि ब्रिगेडियर बसेड़ा इससे पूर्व केंद्रीय सैनिक बोर्ड, नई दिल्ली में सचिव के पद पर कार्यरत रहते हुए देशभर के भूतपूर्व सैनिकों के कल्याण एवं उत्थान में योगदान दे चुके हैं। वह 8 सितंबर 2026 से निदेशक सैनिक कल्याण एवं पुनर्वास, उत्तराखंड के पद पर कार्यरत हैं।
सैनिक कल्याण कार्यालय में संवाद कार्यक्रम के बाद ब्रिगेडियर बसेड़ा पूर्व सैनिकों के प्रयासों से स्थापित पूर्व सैनिक संगठन पिथौरागढ़ के संगठन कार्यालय एवं सम्मान स्थल पहुंचे। यहां देवलथल क्षेत्र के संयोजक सूबेदार मेजर शंकर सामंत ने पुष्पगुच्छ भेंट कर उनका स्वागत किया। संगठन की ओर से उन्हें स्मृति चिह्न और संगठन की लघु पुस्तिका भी भेंट की गई।
इस अवसर पर ब्रिगेडियर बसेड़ा ने पिथौरागढ़ के पूर्व सैनिकों द्वारा किए जा रहे सामाजिक एवं संगठनात्मक कार्यों की सराहना की। उन्होंने कहा कि पूर्व सैनिक संगठन जनपद में पूर्व सैनिकों, उनके परिवारों और समाज के हित में सराहनीय कार्य कर रहा है। सैन्य सेवा के दौरान भी उन्होंने संगठन की गतिविधियों को देखा है। अब निदेशक सैनिक कल्याण के रूप में अपने ही जनपद में पूर्व सैनिकों को समर्पण और सक्रियता के साथ कार्य करते देखना उनके लिए गर्व का विषय है।
कार्यक्रम के दौरान पूर्व सैनिक संगठन ने जनपद में लंबे समय से चली आ रही सैनिक विश्रामगृह की मांग को प्रमुखता से उठाया। संगठन का कहना था कि जनपद में आने वाले पूर्व सैनिकों और उनके परिवारों की सुविधा के लिए सैनिक विश्रामगृह की उपलब्धता बेहद आवश्यक है।
इस पर ब्रिगेडियर बसेड़ा ने बताया कि सैनिक विश्रामगृह उपलब्ध कराने की दिशा में प्रयास किए जा रहे हैं और जल्द से जल्द इसकी व्यवस्था करने का प्रयास किया जाएगा। संगठन की ओर से यह मांग भी रखी गई कि नया सैनिक विश्रामगृह बनने तक पूर्व में उपलब्ध विश्रामगृह व्यवस्था को दोबारा पूर्व सैनिकों के लिए खोला जाए। इस पर भी निदेशक ने सकारात्मक कार्रवाई का भरोसा दिया। इस आश्वासन से पूर्व सैनिकों को लंबे समय से चली आ रही मांग के पूरा होने की उम्मीद जगी है।
पूर्व सैनिक संगठन के अध्यक्ष मयूख भट्ट ने कहा कि ब्रिगेडियर बसेड़ा के साथ बैठकर चर्चा करना ऐसा अनुभव है, मानो परिवार के किसी वरिष्ठ सदस्य के साथ बैठकर विचार-विमर्श किया जा रहा हो। उन्होंने कहा कि ब्रिगेडियर बसेड़ा के निदेशक सैनिक कल्याण बनने से जनपद के पूर्व सैनिकों में नई उम्मीद जगी है। ब्रिगेडियर बसेड़ा ने पूर्व सैनिकों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि पूर्व सैनिक समुदाय की गरिमा और सम्मान को और मजबूत करना सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है। उन्होंने पूर्व सैनिकों एवं उनके परिवारों के हित में मिलकर कार्य करने तथा सैनिक कल्याण से जुड़े प्रयासों को आगे बढ़ाने पर जोर दिया।
जनपद भ्रमण के दौरान देवलथल क्षेत्र के पूर्व सैनिकों ने एक निजी विद्यालय में भी ब्रिगेडियर बसेड़ा का स्वागत किया। कार्यक्रम का संचालन सूबेदार मेजर दिवाकर बोहरा ने किया। इस अवसर पर कैप्टन शेर सिंह, देव सिंह भाटिया, महेश पांडे, राजेंद्र जोरा, धर्म सिंह, प्रह्लाद सिंह, देवेंद्र दिगारी, किशन सिंह सहित बड़ी संख्या में पूर्व सैनिक उपस्थित रहे। ब्रिगेडियर बसेड़ा के जनपद भ्रमण और पूर्व सैनिकों के साथ सीधे संवाद को सैनिक कल्याण योजनाओं को मजबूत करने, समस्याओं के समाधान और पूर्व सैनिकों के हितों को आगे बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल के रूप में देखा जा रहा है।


