पिथौरागढ़ जिले के मड़मानले क्षेत्र में एक ऐसा गांव भी है, जहां रहने वाले ग्रामीणों को अपने ही देश के मोबाइल नेटवर्क के लिए तरसना पड़ रहा है। भारत का हिस्सा होने के बावजूद मड़ गांव के लोग संचार सुविधा के लिए नेपाल के नेटवर्क पर निर्भर हैं। गांव में भारतीय मोबाइल नेटवर्क नहीं पहुंचने के कारण ग्रामीणों को आए दिन परेशानियों का सामना करना पड़ता है।
स्थानीय संवाददाता किशोर धामी के अनुसार, मड़ गांव में नेटवर्क की समस्या लंबे समय से बनी हुई है। ग्रामीणों का कहना है कि उन्होंने कई बार जनप्रतिनिधियों के सामने अपनी समस्या रखी, लेकिन हर बार आश्वासन ही मिला। जमीनी स्तर पर समस्या के समाधान के लिए अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है।
मड़ गांव में बड़ी संख्या में लोग सेना में जवान हैं। ऐसे में गांव में सुचारू मोबाइल नेटवर्क नहीं होने से जवानों और उनके परिवारों को काफी दिक्कत होती है। जरूरी समय पर परिवार से संपर्क करना भी मुश्किल हो जाता है। ग्रामीणों का कहना है कि नेटवर्क की समस्या के कारण बच्चों की पढ़ाई भी प्रभावित हो रही है। छुट्टियों में बच्चे गांव आने से भी कतराते हैं, क्योंकि यहां इंटरनेट और मोबाइल नेटवर्क की सुविधा नहीं होने से उनके ऑनलाइन काम और पढ़ाई प्रभावित होती है।
ग्रामीणों ने सरकार और संबंधित विभाग से मांग की है कि मड़ गांव की भौगोलिक परिस्थितियों और लंबे समय से चली आ रही संचार समस्या को देखते हुए यहां जल्द से जल्द मोबाइल टावर स्थापित किया जाए, ताकि गांव के लोगों को देश के नेटवर्क से जोड़ा जा सके।
सवाल यह है कि आखिर भारत के इस गांव के लोगों को अपने ही देश के नेटवर्क के लिए कब तक नेपाल के नेटवर्क पर निर्भर रहना पड़ेगा? क्या जिम्मेदार विभाग और जनप्रतिनिधि इस गंभीर समस्या का स्थायी समाधान निकालेंगे ?
_ रिपोर्ट: किशोर धामी, मड़मानले


