पिथौरागढ़। सीमांत जनपद पिथौरागढ़ को मुख्यालय से जोड़ने वाले राष्ट्रीय राजमार्ग-09 (NH-09) के घाट क्षेत्र में सड़क की बदहाल स्थिति एक बार फिर सवालों के घेरे में है। घाट के समीप मुन्ना बैंड में लगातार हो रहे भूस्खलन और सड़क पर गिर रहे पत्थरों के कारण शनिवार को यातायात प्रभावित रहा। इस दौरान कई वाहन और यात्री परेशान हुए।
इस मामले को लेकर इंडियन यूथ कांग्रेस के नेशनल सेक्रेटरी रिशेंद्र महर ने अपने फेसबुक पोस्ट के माध्यम से शासन-प्रशासन और संबंधित विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं।
रिशेंद्र महर ने अपने पोस्ट में दावा किया कि मुन्ना बैंड के पास सड़क की स्थिति पिछले एक वर्ष से अधिक समय से चिंताजनक बनी हुई है। उनके अनुसार, उन्होंने पूर्व में भी संबंधित विभाग के अधिकारियों तथा सोशल मीडिया के माध्यम से इस स्थान को मानसून से पहले दुरुस्त किए जाने की मांग उठाई थी।
महर का आरोप है कि समय रहते सड़क की समस्या का स्थायी समाधान नहीं किया गया, जिसका खामियाजा अब आम यात्रियों को भुगतना पड़ रहा है। उन्होंने अपने पोस्ट में कहा कि शनिवार को सुबह से ही पहाड़ी से लगातार पत्थर गिरते रहे, जिसके चलते बड़ी संख्या में वाहन राष्ट्रीय राजमार्ग पर फंसे रहे।
रिशेंद्र महर ने अपने फेसबुक पोस्ट में विशेष रूप से NDA परीक्षा देने जा रहे अभ्यर्थियों की परेशानी का उल्लेख किया है। उनका कहना है कि सड़क बाधित होने के कारण कुछ अभ्यर्थियों को वापस लौटना पड़ा, जबकि कई वाहन देर शाम तक रास्ते में फंसे रहे।
उन्होंने यह भी दावा किया कि सड़क बाधित होने से ऐसे यात्रियों को भी परेशानी हुई जिनकी ट्रेन या फ्लाइट निर्धारित थी। मरीजों और उनके परिजनों को भी इस दौरान दिक्कतों का सामना करना पड़ा।
हालांकि, इन दावों और घटनाक्रम को लेकर संबंधित विभाग अथवा प्रशासन का पक्ष सामने आना अभी बाकी है।
मुन्ना बैंड की स्थिति ने एक बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है—अगर किसी संवेदनशील स्थान पर लंबे समय से भूस्खलन का खतरा बना हुआ था और इसकी जानकारी विभागीय अधिकारियों तक पहुंचाई जा रही थी, तो मानसून से पहले वहां स्थायी सुरक्षा उपाय क्यों नहीं किए गए?
क्या केवल मलबा हटाकर यातायात सुचारू करना ही पर्याप्त है, या ऐसे संवेदनशील स्थानों का स्थायी उपचार भी किया जाना चाहिए?
और सबसे अहम सवाल—यदि लगातार पत्थर गिरने से किसी दिन कोई बड़ा हादसा हो जाता है, तो उसकी जिम्मेदारी आखिर किसकी होगी?
फिलहाल मुन्ना बैंड की स्थिति ने NH-09 की सुरक्षा व्यवस्था, पहाड़ी कटान और मानसून से पहले किए गए सुरक्षा उपायों को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब देखना होगा कि संबंधित विभाग और प्रशासन इस मामले में क्या जवाब देता है और संवेदनशील स्थल को स्थायी रूप से सुरक्षित करने के लिए क्या कदम उठाए जाते हैं।
_ कपिल भट्ट वाणी न्यूज


