थल, पिथौरागढ़। थल क्षेत्र के बलतिर गांव स्थित नागीमल मंदिर में सातूं-आठूं पर्व हर्षोल्लास और पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ मनाया गया। पर्व के समापन पर महिलाओं ने कुमाऊंनी परिधान में सज-धजकर घरों से ढोल-नगाड़ों की थाप के बीच गौरा और महेश्वर की प्रतिमाओं को सिर पर धारण कर दोपहर करीब तीन बजे नागीमल मंदिर पहुंचाया।

विदाई यात्रा में गांव की महिलाओं, पुरुषों और बच्चों ने बड़ी संख्या में भाग लिया। मंदिर पहुंचने के बाद श्रद्धालुओं ने चेली गौरा और जमाता महेश्वर को नम आंखों से ससुराल कैलाश के लिए विदा किया और अगले वर्ष पुनः आने का निमंत्रण दिया। मंदिर में अवतरित देव डांगरों ने श्रद्धालुओं को आशीर्वाद प्रदान किया।

इसके बाद मंदिर परिसर में मेले का आयोजन हुआ। देर शाम तक महिलाओं ने पारंपरिक चांचरी खेलकर पर्व के माहौल में रंग भर दिया, जबकि पुरुषों ने ढोल की थाप पर झोड़ा खेलकर मेले की रौनक बढ़ाई। हुड़के की थाप और पारंपरिक लोकगीतों ने पूरे वातावरण को कुमाऊंनी संस्कृति से सराबोर कर दिया।

समापन अवसर पर सातूं-आठूं की पारंपरिक मान्यता के अनुसार देवी के प्रसाद स्वरूप फलों को आसमान में उछाला गया। प्रसाद पाने के लिए श्रद्धालुओं में खासा उत्साह दिखाई दिया। इस दौरान आसपास के गांवों से भी बड़ी संख्या में ग्रामीण और श्रद्धालु मंदिर पहुंचे।

मंदिर के पुजारी कवींद्र सिंह नवे ने विधि-विधान से पूजा-अर्चना संपन्न कराई। इस अवसर पर मंदिर समिति अध्यक्ष त्रिभुवन सिंह भैसोड़ा, व्यवस्थापक सुरेंद्र सिंह भैसोड़ा, दीवान सिंह, प्रह्लाद सिंह, मनोहर राम, गोविंद सिंह, जगत सिंह, हेमा नवे, रेनु भैसोड़ा, कविता भैसोड़ा, कौशल्या भैसोड़ा, रेखा भैसोड़ा, गीता भैसोड़ा, हीरा देवी, मंजू भैसोड़ा, रेणु भैसोड़ा सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण मौजूद रहे।

रिपोर्ट : अनिल कार्की, थल VANI NEWS