नई दिल्ली।

भारतीय सेना को आपूर्ति किए गए दोषपूर्ण गोला-बारूद के कारण सरकार को ₹62.10 करोड़ का वित्तीय नुकसान हुआ। यह जानकारी पहले भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) की रिपोर्ट संख्या 15/2019 में सामने आई थी, जिसकी पुष्टि रक्षा मंत्रालय ने लोकसभा में भी की है। हाल ही में संसद की लोक लेखा समिति (PAC) ने इस मामले पर अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत करते हुए गुणवत्ता नियंत्रण प्रणाली को और मजबूत बनाने की आवश्यकता पर जोर दिया।

लोकसभा में पूछे गए एक प्रश्न के लिखित उत्तर में रक्षा राज्य मंत्री अजय भट्ट ने बताया कि ऑर्डनेंस फैक्ट्री बड़माल द्वारा सेना को आपूर्ति किए गए दोषपूर्ण गोला-बारूद को बदलने के कारण ₹62.10 करोड़ का नुकसान हुआ। यह तथ्य CAG Report No. 15 of 2019 (Audit Para 3.5) में दर्ज है।

रक्षा मंत्रालय के अनुसार, इस मामले की प्रारंभिक जांच DGQA (Directorate General of Quality Assurance) ने अगस्त 2016 में की थी। इसके बाद 7 अक्टूबर 2017 को एक विशेष टास्क फोर्स का गठन किया गया। जांच में पाया गया कि नुकसान का प्रमुख कारण TNT (Trinitrotoluene) विस्फोटक में आवश्यक एकरूपता (Homogeneity) का अभाव था, जिससे गोला-बारूद की गुणवत्ता प्रभावित हुई।

संसद की लोक लेखा समिति (PAC) ने अपनी हालिया रिपोर्ट में इस मामले को गंभीर मानते हुए रक्षा उत्पादन और गुणवत्ता परीक्षण व्यवस्था को और प्रभावी बनाने की सिफारिश की है। समिति का कहना है कि रक्षा उपकरणों और गोला-बारूद की गुणवत्ता में किसी भी प्रकार की कमी राष्ट्रीय सुरक्षा के दृष्टिकोण से चिंता का विषय है और उत्पादन से लेकर आपूर्ति तक प्रत्येक चरण में कठोर गुणवत्ता परीक्षण सुनिश्चित किया जाना चाहिए।

हालांकि, उपलब्ध आधिकारिक दस्तावेजों में कहीं भी यह उल्लेख नहीं है कि इन दोषपूर्ण गोला-बारूद के कारण किसी सैन्य अभियान में सैनिकों की जान गई या किसी युद्ध अभियान पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा। मामला मुख्य रूप से गुणवत्ता संबंधी खामी और उससे हुए आर्थिक नुकसान से जुड़ा है।

स्रोत: लोकसभा में रक्षा मंत्रालय का लिखित उत्तर, CAG रिपोर्ट संख्या 15/2019 तथा मीडिया रिपोर्ट्स।