नई दिल्ली। प्रसिद्ध शिक्षा सुधारक और पर्यावरण कार्यकर्ता सोनम वांगचुक की जंतर-मंतर पर चल रही अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल लगातार जारी है। अनशन लंबा खिंचने के साथ उनकी स्वास्थ्य स्थिति को लेकर चिंताएं बढ़ गई हैं। इस बीच, उनके समर्थन में विभिन्न सामाजिक संगठनों और नागरिक समूहों ने सरकार से वार्ता शुरू करने तथा शांतिपूर्ण समाधान निकालने की अपील की है।
वांगचुक ने यह अनशन शिक्षा व्यवस्था में कथित अनियमितताओं और जवाबदेही तय करने की मांग को लेकर शुरू किया है। उनके समर्थकों का कहना है कि आंदोलन पूरी तरह शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक तरीके से चलाया जा रहा है तथा सरकार को उनकी मांगों पर गंभीरता से विचार करना चाहिए। दूसरी ओर, सरकार की ओर से इस मुद्दे पर अब तक कोई विस्तृत सार्वजनिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
इधर, वांगचुक के स्वास्थ्य को लेकर दायर एक जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए दिल्ली हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार और दिल्ली सरकार से जवाब तलब किया है। अदालत ने यह जानना चाहा है कि अनशन के दौरान उनकी स्वास्थ्य सुरक्षा और चिकित्सा सहायता के लिए अब तक क्या कदम उठाए गए हैं।
वांगचुक के समर्थन में कई सामाजिक संगठनों ने एक दिवसीय सामूहिक भूख हड़ताल और अन्य शांतिपूर्ण कार्यक्रमों की घोषणा की है। समर्थकों का कहना है कि उनका उद्देश्य सरकार और आंदोलनकारियों के बीच संवाद स्थापित कर लोकतांत्रिक तरीके से समाधान निकालना है।
विशेषज्ञों का कहना है कि लंबे समय तक चलने वाली भूख हड़ताल स्वास्थ्य के लिए गंभीर जोखिम पैदा कर सकती है। ऐसे मामलों में प्रशासन की जिम्मेदारी प्रदर्शनकारियों के स्वास्थ्य की निगरानी करना और आवश्यक चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराना होती है, वहीं लोकतांत्रिक व्यवस्था में शांतिपूर्ण विरोध और संवाद दोनों का संतुलन बनाए रखना भी महत्वपूर्ण माना जाता है.


