पिथौरागढ़। सीमांत जनपद पिथौरागढ़ में नशे के खिलाफ पुलिस का अभियान लगातार जारी है। चेकिंग और निगरानी के दौरान आए दिन स्मैक और हेरोइन की बरामदगी हो रही है। पुलिस छोटे स्तर पर नशे की खेप लेकर पहुंचने वालों को गिरफ्तार भी कर रही है, लेकिन इन कार्रवाइयों के बीच अब एक बड़ा सवाल खड़ा हो रहा है—आखिर पिथौरागढ़ में इतनी स्मैक पहुंच कहां से रही है और इसके पीछे कौन सा नेटवर्क काम कर रहा है?
ताजा मामले में कोतवाली पिथौरागढ़, चौकी ऐचोली, चौकी घाट और एसओजी की संयुक्त टीम ने घाट रोड पर चेकिंग के दौरान दो युवकों को पकड़ा। पुलिस के अनुसार तलाशी में उनके पास से 6.8 ग्राम और 4.8 ग्राम, कुल 11.6 ग्राम स्मैक बरामद हुई। दोनों के खिलाफ एनडीपीएस एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है।
इससे ठीक पहले पिथौरागढ़ पुलिस और एसओजी ने घाट चौकी क्षेत्र में एक कार से 40.78 ग्राम स्मैक बरामद की थी। इस मामले में पिथौरागढ़ निवासी 31 वर्षीय हिमांशु जोशी उर्फ हेम और चंपावत निवासी 35 वर्षीय ज्योत्सना खाती को गिरफ्तार किया गया था। पुलिस के मुताबिक दोनों यूएसनगर के झनकट से स्मैक खरीदकर पिथौरागढ़ ला रहे थे और इसे आगे बेचने की तैयारी में थे।
यह मामला इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि यहां बरामदगी की मात्रा ताजा मामले में पकड़ी गई 11.6 ग्राम की खेप से काफी अधिक थी ।
सितंबर में भी पुलिस ने घाट चौकी के पास 12 ग्राम हेरोइन के साथ एक युवक को गिरफ्तार किया था। पुलिस के अनुसार पूछताछ में युवक ने बताया था कि वह हेरोइन खटीमा से लेकर आया था और उसे पिथौरागढ़ में ऊंचे दामों पर बेचने की तैयारी थी। पुलिस को एक कथित सप्लायर का नाम भी बताया गया था और आगे की कड़ी की जांच की बात कही गई थी।
यानी हाल के मामलों को एक साथ देखें तो तस्वीर में तराई क्षेत्र से पिथौरागढ़ की ओर नशे की खेप आने की कड़ी दिखाई देती है। हालांकि इन मामलों को आपस में सीधे जोड़ना अभी जांच का विषय है।
अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या पिथौरागढ़ में स्मैक छोटी-छोटी खेपों में अलग-अलग कैरियरों के जरिए पहुंचाई जा रही है?
या फिर इन सभी के पीछे कोई ऐसा संगठित नेटवर्क है, जो तराई से नशा खरीदकर सीमांत जिले तक पहुंचा रहा है और यहां आगे अलग-अलग लोगों के माध्यम से इसकी बिक्री कर रहा है?
पुलिस की हर गिरफ्तारी के बाद अगर नशे का स्रोत सामने आता है, तो जांच को केवल गिरफ्तार व्यक्ति तक सीमित रखने के बजाय सप्लायर से लेकर मुख्य कारोबारी तक की पूरी श्रृंखला तक पहुंचना चुनौती होगी।
नशे के खिलाफ चेकिंग और गिरफ्तारी निश्चित रूप से जरूरी है। लेकिन असली चुनौती उस नेटवर्क तक पहुंचने की है, जहां से नशे की खेप जिले में प्रवेश कर रही है। क्या पुलिस गिरफ्तार आरोपियों से मिली जानकारी के आधार पर तराई क्षेत्र में बैठे सप्लायरों तक पहुंच पाएगी ? क्या यह पता लगाया जा सकेगा कि पिथौरागढ़ में नशे की खेप किसे दी जाती है और आगे इसे किन इलाकों में खपाया जाता है ?
क्या पिथौरागढ़ पुलिस छोटे कैरियरों की गिरफ्तारी से आगे बढ़कर नशे के असली सौदागरों और पूरी सप्लाई चेन तक पहुंच पाएगी ? फिलहाल पुलिस का कहना है कि गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ कर नशे के स्रोत और सप्लाई चेन से जुड़े अन्य लोगों की जानकारी जुटाई जा रही है। अब इस जांच का अगला कदम ही बताएगा कि कार्रवाई छोटी खेप पकड़ने तक सीमित रहती है या नशे के बड़े नेटवर्क तक पहुंचती है।


