देहरादून। उत्तराखंड सरकार ने प्रांतीय रक्षक दल (PRD) के स्वयंसेवकों के हित में एक महत्वपूर्ण और संवेदनशील निर्णय लिया है। अब ड्यूटी अथवा प्रशिक्षण के दौरान घायल या बीमार होकर अस्पताल में भर्ती होने वाले पीआरडी स्वयंसेवकों को उपचार अवधि के दौरान भी ड्यूटी पर मानते हुए पूरा मानदेय (ड्यूटी भत्ता) प्रदान किया जाएगा। इस संबंध में युवा कल्याण एवं प्रांतीय रक्षक दल विभाग ने शासनादेश जारी कर नई व्यवस्था को तत्काल प्रभाव से लागू कर दिया है।
जारी शासनादेश के अनुसार यदि कोई पीआरडी स्वयंसेवक ड्यूटी या प्रशिक्षण के दौरान घायल अथवा बीमार होकर चिकित्सालय में भर्ती होता है, तो मुख्य चिकित्साधिकारी अथवा चिकित्सक द्वारा भर्ती की पुष्टि होने के बाद उसे उपचार अवधि के दौरान ड्यूटी पर ही माना जाएगा। इस अवधि में स्वयंसेवक को अधिकतम छह माह (180 दिन) तक मानदेय का भुगतान किया जाएगा।
नई व्यवस्था के तहत अस्पताल में भर्ती होने और उपचार संबंधी चिकित्सकीय प्रमाणपत्र प्रस्तुत करना अनिवार्य होगा। संबंधित क्षेत्रीय युवा कल्याण एवं प्रांतीय रक्षक दल अधिकारी उपचार अवधि का पूरा अभिलेख सुरक्षित रखेंगे तथा स्वस्थ होने के बाद चिकित्सकीय प्रमाणपत्र के आधार पर आदेश जारी कर मानदेय का भुगतान सुनिश्चित करेंगे।
शासनादेश में यह भी स्पष्ट किया गया है कि विभागीय ड्यूटी पर तैनात स्वयंसेवकों का मानदेय युवा कल्याण विभाग द्वारा तथा गैर-विभागीय ड्यूटी पर तैनात स्वयंसेवकों का मानदेय संबंधित विभाग द्वारा वहन किया जाएगा। प्रत्येक मामले का रिकॉर्ड निर्धारित पंजिका में सुरक्षित रखा जाएगा और उपचार अवधि से संबंधित सभी दस्तावेज संलग्न करना अनिवार्य होगा।
यह निर्णय मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की उस घोषणा के अनुरूप लिया गया है, जिसमें उन्होंने कहा था कि ड्यूटी के दौरान अस्पताल में भर्ती होने वाले पीआरडी जवानों को उपचार अवधि में भी आर्थिक सुरक्षा प्रदान की जाएगी। सरकार का मानना है कि इस व्यवस्था से स्वयंसेवकों को इलाज के दौरान आय की चिंता नहीं रहेगी और वे पूरी निष्ठा के साथ अपनी सेवाएं दे सकेंगे।
राज्य सरकार ने इसे पीआरडी स्वयंसेवकों के सामाजिक सुरक्षा कवच को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बताया है। इससे प्रदेश के हजारों पीआरडी जवानों और उनके परिवारों को सीधा लाभ मिलेगा तथा सेवा के दौरान उनके मनोबल में भी वृद्धि होगी।


