काठमांडू/रसुवा। पड़ोसी देश नेपाल में बुधवार, 26 अगस्त को भोटेकोशी नदी में आई अचानक और बेहद तेज बाढ़ ने भारी तबाही मचा दी। उत्तरी नेपाल के रसुवा जिले में तिब्बत की ओर से अचानक पानी का सैलाब आने के बाद तिमुरे, स्याफ्रुबेसी समेत नदी किनारे के कई इलाकों में बाढ़ ने कहर बरपाया। कई घर, वाहन, पुल, सड़कें, बाजार और जलविद्युत परियोजनाएं इसकी चपेट में आ गईं।

अचानक बढ़ा नदी का जलस्तर स्थानीय अधिकारियों के अनुसार बाढ़ बुधवार सुबह करीब 9 बजे अचानक आई। खास बात यह है कि रसुवा जिला मुख्यालय के आसपास उस समय भारी बारिश नहीं हो रही थी। अधिकारियों ने बताया कि बाढ़ का पानी तिब्बत की ओर से भोटेकोशी नदी में आया। इसके पीछे ग्लेशियल झील के फटने, हिमस्खलन या ऊपरी क्षेत्र में अचानक जलभराव जैसी संभावनाओं की जांच की जा रही है। अभी बाढ़ के सटीक कारण की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।

31 लोगों की मौत, 384 लोग लापता शाम तक सामने आई रिपोर्टों के अनुसार भोटेकोशी और त्रिशूली नदी क्षेत्र में आई इस आपदा में कम से कम 31 लोगों की मौत हो चुकी है। नेपाल में राहत एवं बचाव अभियान लगातार जारी है। वहीं नेपाल पर्यटन बोर्ड से जुड़ी जानकारी के अनुसार 384 पर्यटक और अन्य यात्री लापता बताए गए हैं, जिनमें बड़ी संख्या विदेशी नागरिकों की है। अलग-अलग रिपोर्टों में भारतीय लापता लोगों की संख्या में अंतर है, इसलिए अंतिम आधिकारिक आंकड़े का इंतजार किया जा रहा है।

तिमुरे और स्याफ्रुबेसी में सबसे ज्यादा नुकसान चीन-नेपाल सीमा के पास स्थित तिमुरे में बाढ़ ने बड़े पैमाने पर नुकसान पहुंचाया है। स्थानीय बाजार, वाहन और सीमा से जुड़ी सुविधाएं प्रभावित हुई हैं। स्याफ्रुबेसी समेत आसपास की कई बस्तियों में भी बाढ़ का पानी घुसा और भारी नुकसान की खबर है। करीब एक दर्जन बस्तियों के प्रभावित होने की जानकारी सामने आई है।

बाढ़ की चपेट में कई जलविद्युत परियोजनाएं भी आई हैं। एक परियोजना के बह जाने तथा अन्य परियोजनाओं को नुकसान पहुंचने की सूचना है। इससे नेपाल के बिजली उत्पादन और सीमा व्यापार पर भी असर पड़ने की आशंका है।

राहत और बचाव अभियान तेज नेपाल सरकार ने सेना, सशस्त्र पुलिस बल और नेपाल पुलिस को राहत एवं बचाव कार्यों में लगाया है। प्रभावित क्षेत्रों में हेलीकॉप्टरों के जरिए लोगों को निकालने की कोशिश की जा रही है। हालांकि कई स्थानों पर मलबे, क्षतिग्रस्त सड़कों और दुर्गम पहाड़ी भूभाग के कारण राहत दलों को पहुंचने में कठिनाई हो रही है।

तिमुरे में बचाव के लिए भेजा गया एक हेलीकॉप्टर सुरक्षित लैंडिंग की जगह नहीं मिलने के कारण वापस लौट गया। स्थानीय प्रशासन ने बताया कि बाढ़ से हेलिपैड तक बह गया, जिससे हवाई बचाव अभियान भी चुनौतीपूर्ण हो गया।

त्रिशूली नदी के किनारे भी हाई अलर्ट भोटेकोशी का पानी आगे चलकर त्रिशूली नदी में पहुंचता है। इसी कारण नेपाल के नुवाकोट और धादिंग सहित त्रिशूली नदी के किनारे बसे इलाकों में लोगों को सतर्क किया गया है। प्रशासन ने नदी किनारे रहने वाले लोगों और वहां काम करने वालों को तत्काल सुरक्षित स्थानों की ओर जाने की सलाह दी है।

प्रशासन को आशंका है कि पानी का असर आगे के इलाकों तक पहुंच सकता है। इस वजह से नदी किनारे के बाजारों और बस्तियों में विशेष निगरानी रखी जा रही है।

भारत और चीन ने मदद का भरोसा दिया इस भीषण आपदा के बाद भारत और चीन की ओर से भी सहायता का भरोसा दिए जाने की खबर है। चीन की ओर से सीमा क्षेत्र में बचाव दल सक्रिय किए गए हैं, जबकि भारत की ओर से भी मानवीय सहायता की पेशकश की गई है।

लगातार सामने आ रही हैं तबाही की तस्वीरें भोटेकोशी नदी की बाढ़ ने एक बार फिर हिमालयी क्षेत्र में अचानक आने वाली बाढ़ के खतरे को सामने ला दिया है। वर्ष 2025 में भी इसी क्षेत्र में अचानक आई बाढ़ से भारी नुकसान हुआ था। इस बार भी प्रशासन के सामने सबसे बड़ी चुनौती लापता लोगों को तलाशना, प्रभावित लोगों को सुरक्षित निकालना और नदी के निचले इलाकों को संभावित दूसरी बाढ़ से बचाना है।

फिलहाल नेपाल में राहत और बचाव अभियान युद्धस्तर पर जारी है। मृतकों और लापता लोगों का आंकड़ा अभी अंतिम नहीं माना जा रहा है और आने वाले घंटों में स्थिति की पूरी तस्वीर सामने आने की उम्मीद है।

हम ईश्वर से प्रार्थना करते हैं कि इस प्राकृतिक आपदा में फंसे सभी लोग सुरक्षित हों और राहत एवं बचाव दल जल्द से जल्द हर प्रभावित व्यक्ति तक पहुंच सकें।