पिथौरागढ़, 7 अगस्त।
जनपद में संचालित नशा मुक्ति केंद्रों की व्यवस्थाओं को और अधिक पारदर्शी एवं व्यवस्थित बनाने के उद्देश्य से मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. जे.एस. चुफाल ने कृषि विज्ञान केंद्र गैना के समीप स्थित हिग्रास नशा मुक्ति केंद्र का औचक निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान उन्होंने केंद्र की व्यवस्थाओं का गहन जायजा लिया और उपचार प्रक्रिया से लेकर दवा प्रबंधन तक हर पहलू की बारीकी से जांच की।
सीएमओ ने केंद्र में तैनात कार्मिकों से उनके दायित्वों और कार्यप्रणाली की जानकारी लेते हुए मरीजों को दी जा रही दवाओं के रखरखाव एवं रिकॉर्ड को पूरी पारदर्शिता के साथ संधारित करने के निर्देश दिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि प्रत्येक मरीज को दवा देने से पहले उसकी जानकारी और सहमति से संबंधित कंसेंट फॉर्म अनिवार्य रूप से भरवाकर सुरक्षित रखा जाए तथा हर मरीज का माहवार उपचार रिकॉर्ड व्यवस्थित रूप से तैयार किया जाए।
निरीक्षण के दौरान डॉ. चुफाल ने केंद्र में कार्यरत सभी कर्मचारियों की शैक्षिक योग्यता से संबंधित आवश्यक प्रमाण-पत्रों की अलग फाइल तैयार कर सुरक्षित रखने के निर्देश भी दिए। उन्होंने मरीजों को उपलब्ध कराए जा रहे भोजन की गुणवत्ता, स्वच्छता और पोषण स्तर पर विशेष ध्यान देने को कहा।
सीएमओ ने नारकोटिक्स दवाओं और अन्य एलोपैथिक दवाओं को अलग-अलग सुरक्षित रखने, उनके स्टॉक का नियमित रिकॉर्ड बनाए रखने तथा दवाओं के उपयोग की निगरानी सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। इसके साथ ही केंद्र में लगे सीसीटीवी कैमरों की मेमोरी क्षमता बढ़ाने के लिए आवश्यक कार्रवाई करने को भी कहा।
निरीक्षण में सामने आई कमियों पर नाराजगी जताते हुए उन्होंने केंद्र संचालक को सभी खामियों को शीघ्र दूर करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि नशा मुक्ति केंद्रों में मरीजों की सुरक्षा, गुणवत्तापूर्ण उपचार और दवा प्रबंधन में किसी भी प्रकार की लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी। व्यवस्थाओं की गुणवत्ता बनाए रखने के लिए समय-समय पर ऐसे औचक निरीक्षण जारी रहेंगे।
निरीक्षण के दौरान जिला मानसिक स्वास्थ्य कार्यक्रम के नोडल अधिकारी डॉ. ललित भट्ट, जिला औषधि निरीक्षक पंकज पंत सहित स्वास्थ्य विभाग के अन्य अधिकारी एवं कर्मचारी भी उपस्थित रहे।
VANI NEWS नशा मुक्ति केंद्र केवल उपचार का स्थान नहीं, बल्कि नई जिंदगी की शुरुआत का माध्यम हैं। ऐसे केंद्रों में पारदर्शी व्यवस्था, सुरक्षित दवा प्रबंधन और मरीजों के अधिकारों का सम्मान ही सफल पुनर्वास की सबसे बड़ी कुंजी है।


