पिथौरागढ़। नेपाल सीमा से लगे पिथौरागढ़ जिले के दूरस्थ गांव मजिरकांडा की कविता ने अपनी मेहनत, लगन और दृढ़ इच्छाशक्ति के दम पर सफलता की एक ऐसी कहानी लिखी है, जो क्षेत्र की बेटियों और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे युवाओं के लिए प्रेरणा बन सकती है। 14 सितंबर 2026 को घोषित अपर निजी सचिव परीक्षा-2024 के परिणाम में कविता का चयन हुआ है।

कविता के माता-पिता स्व. हरिश्चंद्र कल्पासी जी और श्रीमती मंजू देवी हैं। उन्होंने कविता को बचपन से ही शिक्षा के प्रति जागरूक और मेहनती बनने के लिए प्रेरित किया। पढ़ाई में कविता की रुचि लगातार बनी रही और उन्होंने उच्च शिक्षा हासिल करने का लक्ष्य अपने मन में रखा। वर्ष 2020 में विवाह के बाद कविता मजिरकांडा आईं। विवाह के बाद नई जिम्मेदारियां जरूर आईं, लेकिन उन्होंने अपनी पढ़ाई और भविष्य के लक्ष्य को पीछे नहीं छोड़ा ।

कविता की यह सफलता अचानक नहीं मिली। इसके पीछे वर्षों की मेहनत, पढ़ाई के प्रति लगन, परिवार का विश्वास और कठिन परिस्थितियों के बीच लक्ष्य पर लगातार टिके रहने की कहानी है।

कविता के माता-पिता श्रीमती मंजू देवी और स्व. हरिश्चंद्र कल्पासी जी हैं। उन्होंने कविता को बचपन से ही शिक्षा के प्रति जागरूक और मेहनती बनने के लिए प्रेरित किया। पढ़ाई में कविता की रुचि लगातार बनी रही और उन्होंने उच्च शिक्षा हासिल करने का लक्ष्य अपने मन में रखा ।

कविता की सफलता की कहानी में उनके ससुर केदार दत्त भट्ट, सास भैरवी भट्ट और पति कमलेश का योगदान बेहद महत्वपूर्ण रहा । परिवार ने कविता से कहा कि यदि उनकी पढ़ाई में रुचि है और वह प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करना चाहती हैं तो उन्हें पूरी मेहनत के साथ आगे बढ़ना चाहिए। परिवार के इसी विश्वास ने कविता को और अधिक आत्मविश्वास दिया । इसके बाद कविता और उनके पति कमलेश देहरादून चले गए, जहां कविता ने प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी शुरू की । पढ़ाई, घर-परिवार और अन्य जिम्मेदारियों के बीच उन्होंने लगातार मेहनत जारी रखी । कविता अपनी इस सफलता का पूरा श्रेय अपने परिवार को देती हैं। उनका कहना है कि परिवार ने जिस तरह हर कदम पर उनका साथ दिया, वही उनकी सबसे बड़ी ताकत बना।

कविता के अनुसार, मन में दृढ़ इच्छाशक्ति हो तो कुछ भी असंभव नहीं है। वह अपनी सफलता के पीछे अपने ईष्टदेव मनमहेश स्वामी की कृपा और परिवार के निरंतर सहयोग को सबसे बड़ी शक्ति मानती हैं।

उनका सफर यह बताता है कि सफलता के लिए परिस्थितियों का हमेशा अनुकूल होना जरूरी नहीं है। जरूरी है तो केवल लक्ष्य के प्रति ईमानदारी, निरंतर मेहनत और खुद पर विश्वास।

आज के दौर में युवाओं के सामने सोशल मीडिया, रील्स और नशे जैसी कई चुनौतियां हैं। समय का एक बड़ा हिस्सा मोबाइल स्क्रीन पर बीत जाता है और कई बार युवा अपने वास्तविक लक्ष्य से भटक जाते हैं।

ऐसे समय में मजिरकांडा की कविता जैसी युवतियों की कहानी यह संदेश देती है कि यदि समय और ऊर्जा को सही दिशा में लगाया जाए तो छोटे गांव से निकलकर भी बड़े सपनों को हासिल किया जा सकता है।

कविता ने किसी बड़े शहर की सुविधाओं से नहीं, बल्कि अपनी मेहनत और परिवार के भरोसे से अपनी राह बनाई। विवाह के बाद पढ़ाई जारी रखना, एमएससी पूरी करना, प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करना, नौकरी हासिल करना और फिर अपर निजी सचिव परीक्षा में सफलता प्राप्त करना—यह सफर अपने आप में प्रेरणादायक है।

कविता की कहानी केवल एक सरकारी पद पर चयन की कहानी नहीं है। यह उस विश्वास की कहानी है कि परिवार यदि बेटियों और बहुओं के सपनों को समझे और उन्हें आगे बढ़ने का अवसर दे, तो वे अपने साथ पूरे परिवार और समाज का नाम रोशन कर सकती हैं।

नेपाल सीमा से लगे एक दूरस्थ गांव की बेटी का यह सफर आज अनेक युवतियों को यह संदेश दे रहा है कि गांव में जन्म लेना या सीमित संसाधनों में रहना आपकी मंजिल तय नहीं करता।

कविता की सफलता निश्चित रूप से उन युवतियों के लिए एक प्रेरणा है, जो प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रही हैं और कभी-कभी असफलताओं या परिस्थितियों से निराश हो जाती हैं।

कविता का संदेश साफ है—लक्ष्य बड़ा रखिए, मेहनत लगातार कीजिए और अपने सपनों पर विश्वास रखिए। रास्ते कठिन हो सकते हैं, लेकिन दृढ़ इच्छाशक्ति के सामने कोई मंजिल असंभव नहीं । _ कपिल भट्ट वाणी न्यूज