पिथौरागढ़। उत्तराखण्ड के विभिन्न क्षेत्रों में गाय एवं भैंसों में तेजी से फैल रहे संक्रामक रोग लम्पी स्किन डिजीज (LSD) को देखते हुए पिथौरागढ़ जिला प्रशासन ने संक्रमण की रोकथाम और नियंत्रण के लिए कड़े कदम उठाए हैं।
जिलाधिकारी आशीष कुमार भटगांई ने पशुपालन विभाग की संस्तुति और शासन द्वारा जारी दिशा-निर्देशों के क्रम में जनपद में 25 सितंबर 2026 तक सभी गोवंशीय एवं भैंसवंशीय पशुओं के अंतर्राज्यीय एवं अंतर्जनपदीय परिवहन और आवागमन पर रोक लगाने के निर्देश दिए हैं। इस अवधि में पशु प्रदर्शनियों तथा इससे संबंधित अन्य गतिविधियों पर भी प्रतिबंध रहेगा।
यह कार्रवाई Prevention & Control of Infectious & Contagious Diseases of Animals Act, 2009 की धारा-6 के तहत की गई है।
ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में बढ़ेगी निगरानी जिलाधिकारी ने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि जनपद के ग्रामीण एवं शहरी क्षेत्रों में लम्पी स्किन डिजीज की रोकथाम के लिए प्रभावी निगरानी और आवश्यक नियंत्रणात्मक कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। संक्रमण फैलाने वाले कीटों की रोकथाम के लिए विभिन्न क्षेत्रों में फॉगिंग कराने के साथ ही नगर निकाय क्षेत्रों में भी आवश्यक फॉगिंग व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं।
रोगमुक्त प्रमाण-पत्र के बाद ही परिवहन की अनुमति प्रशासन द्वारा जारी आदेश के अनुसार एक माह की प्रतिबंध अवधि पूरी होने के बाद भी पशुओं के परिवहन को लेकर विशेष सावधानी बरती जाएगी। राजकीय पशु चिकित्सालयों में तैनात क्षेत्रीय पशु चिकित्सा अधिकारियों द्वारा जारी संक्रामक रोगमुक्त प्रमाण-पत्र वाले पशुओं के ही परिवहन की अनुमति होगी। यह व्यवस्था Transport of Animals Rules, 1978 के Rule-47 के तहत लागू की गई है।
पशुपालकों से सहयोग की अपील जिलाधिकारी ने आमजन और पशुपालकों से प्रशासन द्वारा जारी प्रतिबंधों एवं दिशा-निर्देशों का पूर्ण पालन करने की अपील की है। उन्होंने कहा कि पशुओं में लम्पी स्किन डिजीज के लक्षण दिखाई देने पर बिना देरी किए संबंधित पशु चिकित्सा अधिकारी को सूचना दें, ताकि समय रहते आवश्यक उपचार एवं नियंत्रणात्मक कार्रवाई की जा सके।
प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि संक्रमण की रोकथाम के लिए निगरानी, फॉगिंग और पशुओं के आवागमन पर नियंत्रण जैसी व्यवस्थाओं को प्रभावी ढंग से लागू किया जा रहा है। __vaninews


