बागेश्वर/पिथौरागढ़। बागेश्वर जिले के कपकोट विकासखंड का अंतिम गांव कालापेर कापड़ी आज भी मूलभूत सुविधाओं के अभाव से जूझ रहा है। पिथौरागढ़ जिले की सीमा से लगे इस गांव तक आज तक सड़क नहीं पहुंच सकी है। थल - मुनस्यारी मुख्य सड़क से गांव की दूरी मात्र लगभग 3 किलोमीटर है, लेकिन यह छोटा-सा फासला भी ग्रामीणों के लिए वर्षों से विकास की सबसे बड़ी बाधा बना हुआ है।

गांव में लगभग 50 से 60 परिवार निवास करते हैं। ग्रामीणों का कहना है कि सड़क निर्माण के कई दावे हुए, लेकिन आज तक गांव को मोटर मार्ग से नहीं जोड़ा जा सका। गांव के आंतरिक पैदल मार्ग भी अत्यंत जर्जर और जोखिम भरे हैं, जिससे रोजमर्रा का जीवन कठिन बना हुआ है।

सबसे अधिक परेशानी स्कूली बच्चों को उठानी पड़ रही है। छोटे-छोटे बच्चे प्रतिदिन करीब 7 किलोमीटर पैदल दुर्गम और खतरनाक रास्तों से होकर स्कूल जाने को मजबूर हैं। बरसात के दिनों में यह सफर और भी जानलेवा हो जाता है। ग्रामीणों का कहना है कि बच्चों की सुरक्षा को लेकर हमेशा चिंता बनी रहती है।

ग्रामीणों के अनुसार गांव के लिए एक पुल का निर्माण कार्य शुरू तो हुआ, लेकिन वह आज तक पूरा नहीं हो पाया। अधूरा पुल ग्रामीणों की मुश्किलें कम करने के बजाय सरकारी कार्यों की धीमी गति का प्रतीक बनकर रह गया है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि सड़क, पुल और आंतरिक मार्गों की बदहाल स्थिति के कारण शिक्षा, स्वास्थ्य और आपातकालीन सेवाओं तक पहुंचना भी चुनौती बना हुआ है। किसी मरीज को अस्पताल ले जाना हो या दैनिक जरूरतों के लिए बाजार पहुंचना हो, हर कार्य कठिन संघर्ष में बदल जाता है।

ग्रामीणों ने सरकार और प्रशासन से मांग की है कि कालापेर कापड़ी गांव को शीघ्र मोटर मार्ग से जोड़ा जाए, अधूरे पुल का निर्माण पूरा किया जाए तथा आंतरिक पैदल मार्गों का भी सुधार किया जाए, ताकि ग्रामीणों को सुरक्षित आवागमन की सुविधा मिल सके।

सरकार अक्सर अंतिम पंक्ति में खड़े व्यक्ति तक विकास पहुंचाने का दावा करती है, लेकिन सड़क से महज 3 किलोमीटर दूर स्थित यह गांव उन दावों पर कई सवाल खड़े करता है। जब आज भी बच्चे जान जोखिम में डालकर शिक्षा के लिए पैदल चलने को मजबूर हों, तो यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि आखिर विकास की राह इस गांव तक कब पहुंचेगी।