डीडीहाट। सीमांत क्षेत्र डीडीहाट में लोक संस्कृति, परंपराओं और स्थानीय प्रतिभाओं को बढ़ावा देने के उद्देश्य से डीडीहाट महोत्सव 2026 का आयोजन 22 नवंबर से 26 नवंबर तक किया जाएगा। पांच दिवसीय महोत्सव का आयोजन जीआईसी मैदान डीडीहाट में होगा। आयोजन को भव्य और आकर्षक स्वरूप देने के लिए तैयारियां शुरू कर दी गई हैं।

डीडीहाट नगरपालिका अध्यक्ष गिरीश चुफाल के प्रयासों से आयोजित होने जा रहे इस महोत्सव को लेकर क्षेत्रवासियों में खासा उत्साह है। महोत्सव का उद्देश्य क्षेत्र की समृद्ध लोक संस्कृति को मंच प्रदान करने के साथ ही स्थानीय कलाकारों और युवाओं को अपनी प्रतिभा प्रदर्शित करने का अवसर उपलब्ध कराना है।

महोत्सव के दौरान उत्तराखंड की पारंपरिक लोक संस्कृति, लोकगीत, लोकनृत्य और सांस्कृतिक विरासत की झलक देखने को मिलेगी। विभिन्न सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के माध्यम से पहाड़ की परंपराओं को नई पीढ़ी तक पहुंचाने और क्षेत्र की सांस्कृतिक पहचान को व्यापक स्तर पर स्थापित करने का प्रयास किया जाएगा।

महोत्सव का प्रमुख आकर्षण स्टार नाइट होगी, जिसमें देशभर के कलाकार अपनी प्रस्तुतियों से दर्शकों का मनोरंजन करेंगे। हालांकि, स्टार नाइट में शामिल होने वाले कलाकारों के नाम और कार्यक्रमों का विस्तृत शेड्यूल अभी घोषित नहीं किया गया है।

महोत्सव में स्थानीय कलाकारों और उभरती प्रतिभाओं को विशेष प्राथमिकता दिए जाने पर जोर रहेगा। क्षेत्र के युवा गायन, नृत्य और अन्य सांस्कृतिक विधाओं के माध्यम से अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन कर सकेंगे। इसके साथ ही सांस्कृतिक एवं शैक्षिक कार्यक्रमों के जरिए लोक विरासत और शिक्षा से जुड़े विषयों को भी प्रमुखता दी जाएगी।

नगरपालिका अध्यक्ष गिरीश चुफाल के अनुसार, महोत्सव का उद्देश्य डीडीहाट की समृद्ध लोक संस्कृति और परंपराओं को प्रोत्साहित करने के साथ स्थानीय कलाकारों एवं युवाओं को बेहतर मंच उपलब्ध कराना है। उन्होंने क्षेत्रवासियों से महोत्सव में बढ़-चढ़कर भागीदारी करने और आयोजन को सफल बनाने की अपील की।

22 नवंबर से शुरू होकर 26 नवंबर तक चलने वाले इस महोत्सव में डीडीहाट सहित आसपास के क्षेत्रों से बड़ी संख्या में लोगों के पहुंचने की उम्मीद है। क्षेत्रवासियों को अब महोत्सव के विस्तृत कार्यक्रम और स्टार नाइट में प्रस्तुति देने वाले कलाकारों की आधिकारिक घोषणा का इंतजार है।

डीडीहाट महोत्सव 2026 स्थानीय कलाकारों को प्रोत्साहन देने के साथ ही सीमांत क्षेत्र की लोक संस्कृति, परंपराओं और सांस्कृतिक पहचान को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने का अवसर बन सकता है।