डीडीहाट/पिथौरागढ़। ग्राम पंचायत सौगांव एवं चिटगलगांव के ग्रामीणों ने राजकीय आयुर्वेदिक चिकित्सालय चिटगलगांव के लिए चयनित नवीन भूमि और प्रस्तावित निर्माण को लेकर प्रशासन का ध्यान गंभीर विषय की ओर आकर्षित किया है। ग्रामीणों ने उप जिलाधिकारी डीडीहाट को 30 जुलाई 2026 को ज्ञापन सौंपकर मांग की है कि दुर्गम एवं अनुपयुक्त स्थल पर प्रस्तावित चिकित्सालय भवन निर्माण पर तत्काल रोक लगाई जाए और पहले से उपलब्ध सरकारी भवन का ही चिकित्सालय के रूप में उपयोग सुनिश्चित किया जाए।

ग्रामीणों का कहना है कि जिस भवन में कभी राजकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय सौगांव संचालित होता था, वह भवन वर्तमान में उपयोग में नहीं है और इसके 6 कमरे, शौचालय तथा संबंधित भूमि को वर्ष 2020 में राजकीय आयुर्वेदिक चिकित्सालय चिटगलगांव को विधिवत हस्तांतरित किया जा चुका है।

2019 में ही अस्पताल के लिए दी गई थी सहमति SDM को दिए गए ज्ञापन में ग्रामीणों ने दस्तावेजों का हवाला देते हुए बताया कि 16 दिसंबर 2019 को विद्यालय प्रबंधन समिति (SMC) की बैठक में पुराने विद्यालय भवन एवं भूमि को राजकीय आयुर्वेदिक चिकित्सालय चिटगलगांव के संचालन के लिए दिए जाने का प्रस्ताव पारित किया गया था। इसमें विद्यालय प्रबंधन समिति एवं जनप्रतिनिधियों की सहमति का भी उल्लेख है।

इसके बाद 15 मई 2020 को विभागीय स्तर पर भौतिक हस्तांतरण की प्रक्रिया पूरी की गई। ज्ञापन के अनुसार जिला शिक्षा अधिकारी (माध्यमिक), पिथौरागढ़ के आदेश के अनुपालन में विद्यालय के प्रधानाचार्य द्वारा पुराने विद्यालय भवन के 6 कमरे, शौचालय एवं संबंधित भूमि राजकीय आयुर्वेदिक चिकित्सालय चिटगलगांव के चिकित्साधिकारी को विधिवत Hand Over कर दिए गए थे।

2026 की रिपोर्ट में भी भवन खाली होने की पुष्टि ग्रामीणों ने अपने ज्ञापन के साथ शिक्षा विभाग से संबंधित दस्तावेज भी संलग्न किए हैं। ज्ञापन में उल्लेख है कि ग्रामीणों की शिकायत के संदर्भ में 16 जून 2026 को खंड शिक्षा अधिकारी, डीडीहाट द्वारा जिला शिक्षा अधिकारी को स्थानीय निरीक्षण आख्या भेजी गई, जिसमें पुराने विद्यालय भवन के खाली होने की पुष्टि का उल्लेख है।

ग्रामीणों का कहना है कि इससे यह सवाल और महत्वपूर्ण हो जाता है कि जब अस्पताल के संचालन के लिए पहले ही सरकारी भवन उपलब्ध कराया जा चुका है, तो नई जगह पर चिकित्सालय भवन निर्माण की प्रक्रिया क्यों आगे बढ़ाई जा रही है।

2023 में तड़खेत में कराया गया नया दान-विलेख ज्ञापन में ग्रामीणों ने एक अन्य महत्वपूर्ण तथ्य की ओर भी प्रशासन का ध्यान खींचा है। उनके अनुसार पुराने विद्यालय की भूमि के मूल दाननामा अथवा भू-अभिलेख तत्काल उपलब्ध नहीं होने की तकनीकी स्थिति के कारण स्वास्थ्य विभाग द्वारा वर्ष 2023 में ग्राम तड़खेत में दूसरी भूमि का दान-विलेख/दाखिल-खारिज कराया गया।

ग्रामीणों का आरोप है कि यह नया चयनित स्थल अत्यंत दुर्गम, एकांत और चढ़ाई पर स्थित है, जहां सामान्य ग्रामीणों, बुजुर्गों, महिलाओं और बीमार मरीजों के लिए पहुंचना बेहद कठिन है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि यहां चिकित्सालय भवन बनाया जाता है तो मरीजों को स्वास्थ्य सुविधा लेने के बजाय पहले दुर्गम रास्ते की समस्या का सामना करना पड़ेगा।

ग्रामीणों का सवाल—जब भवन है तो नई जमीन क्यों?

ग्रामीणों का मुख्य सवाल यही है कि जब गांव के बीच 6 कमरों वाला पक्का सरकारी भवन पहले से मौजूद है और उसे वर्ष 2020 में आयुर्वेदिक चिकित्सालय के लिए हस्तांतरित भी किया जा चुका है, तो फिर दुर्गम स्थान पर नई भूमि लेकर निर्माण करने की आवश्यकता क्यों पड़ी?

ग्रामीणों ने आशंका जताई है कि यदि नवीन दुर्गम स्थल पर नए सिरे से भवन निर्माण किया गया तो सरकारी धन का बड़ा हिस्सा ऐसे स्थान पर खर्च होगा, जहां मरीजों की पहुंच ही मुश्किल होगी। दूसरी ओर पहले से निर्मित सरकारी भवन उपयोग से बाहर पड़ा रह सकता है।

ग्रामीणों ने प्रशासन से की तीन प्रमुख मांगें ज्ञापन के माध्यम से ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि— पहली, नवीन दुर्गम स्थल पर प्रस्तावित चिकित्सालय भवन निर्माण कार्य पर तत्काल रोक लगाई जाए, ताकि सरकारी धन का अनावश्यक व्यय न हो।

दूसरी, राजस्व विभाग/एसडीएम/तहसीलदार डीडीहाट के माध्यम से पुराने विद्यालय की भूमि का स्थलीय सत्यापन एवं संयुक्त पंचनामा कराया जाए तथा उपलब्ध तथ्यों के आधार पर राजस्व अभिलेखों को दुरुस्त किया जाए।

तीसरी, वर्ष 2020 में पूर्ण हुए भौतिक हस्तांतरण को मान्यता देते हुए पुराने सुदृढ़ सरकारी भवन में ही राजकीय आयुर्वेदिक चिकित्सालय संचालित करने के लिए आवश्यक प्रशासनिक एवं वित्तीय स्वीकृति प्रदान की जाए।

दस्तावेजों के साथ SDM के सामने रखा मामला ग्रामीणों ने अपने ज्ञापन के साथ मामले से संबंधित कई दस्तावेज भी प्रस्तुत किए हैं। इनमें 16 दिसंबर 2019 का SMC प्रस्ताव, 15 मई 2020 का Hand Over/Take Over प्रमाण-पत्र, 6 अप्रैल 2026 से संबंधित शिक्षा विभाग की रिपोर्ट, 16 जून 2026 की स्थानीय निरीक्षण आख्या तथा वर्ष 2023 में तड़खेत की भूमि से संबंधित दान-विलेख/दाखिल-खारिज के दस्तावेज शामिल हैं।

अब मामला प्रशासन के सामने है और ग्रामीणों की निगाह इस बात पर है कि प्रशासन पुराने सरकारी भवन और नई प्रस्तावित भूमि—दोनों का स्थलीय एवं अभिलेखीय परीक्षण कर क्या निर्णय लेता है।

जनहित में उठे सवाल का जवाब जरूरी यह मामला केवल एक भवन या भूमि का नहीं, बल्कि सरकारी संपत्ति के उचित उपयोग, मरीजों की सुविधा और सरकारी धन के विवेकपूर्ण इस्तेमाल से जुड़ा है।

यदि वर्ष 2020 का हस्तांतरण और वर्तमान में पुराने भवन की उपलब्धता दस्तावेजों के आधार पर सही पाई जाती है, तो प्रशासन के सामने यह स्पष्ट करना जरूरी होगा कि नई भूमि का चयन क्यों किया गया, पुराने भवन का उपयोग क्यों नहीं किया गया और दुर्गम स्थल पर अस्पताल निर्माण की उपयोगिता क्या है।

ग्रामीणों ने प्रशासन से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर जनहित और सरकारी धन की बचत को प्राथमिकता देने की मांग की है।

नोट: यह समाचार ग्रामीणों द्वारा SDM को दिए गए ज्ञापन और उसमें संलग्न दस्तावेजों में उल्लिखित तथ्यों पर आधारित है। नई भूमि के चयन की प्रशासनिक प्रक्रिया, तकनीकी रिपोर्ट और निर्माण की स्वीकृति से संबंधित आधिकारिक पक्ष अभी सामने आना बाकी है।