चम्पावत। वर्ष 2030 तक चम्पावत को आत्मनिर्भर और आदर्श जनपद बनाने की दिशा में एक और महत्वपूर्ण पहल करते हुए विकास भवन चम्पावत में एक दिवसीय उद्यमिता विकास प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य महिला स्वयं सहायता समूहों, स्थानीय उद्यमियों और विभिन्न संगठनों के प्रतिनिधियों को आधुनिक व्यवसायिक कौशल से जोड़ते हुए स्वरोजगार और ग्रामीण उद्यमिता को बढ़ावा देना था।

यह प्रशिक्षण उत्तराखण्ड राज्य विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद (UCOST) के वित्तपोषण तथा दून विश्वविद्यालय के सेंटर ऑफ एक्सीलेंस इन लॉजिस्टिक्स एंड सप्लाई चेन मैनेजमेंट के सहयोग से संचालित 'आदर्श चम्पावत @2030' परियोजना के अंतर्गत आयोजित किया गया।

कार्यक्रम में स्वयं सहायता समूहों, क्लस्टर लेवल फेडरेशन, ग्रामोत्थान और आरबीआई से जुड़े उद्यमियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। दून विश्वविद्यालय के एसोसिएट प्रोफेसर एवं परियोजना के प्रधान अन्वेषक डॉ. सुधांशु जोशी तथा परियोजना सहायक तनुजा जोशी ने प्रतिभागियों को बिजनेस मॉडल कैनवास, डिजिटल मार्केटिंग, ब्रांडिंग, पैकेजिंग, FSSAI पंजीकरण, ई-कॉमर्स, वित्तीय प्रबंधन और विभिन्न सरकारी योजनाओं की विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने स्थानीय संसाधनों पर आधारित उद्योग स्थापित कर आत्मनिर्भर बनने का आह्वान भी किया।

प्रशिक्षण के बाद परियोजना दल ने जिलाधिकारी मनीष कुमार और अपर परियोजना निदेशक विमी जोशी से मुलाकात कर जनपद में उद्यमिता, मूल्य संवर्धन और आजीविका विकास की संभावनाओं पर चर्चा की। इस दौरान जिलाधिकारी ने प्रशासन, विश्वविद्यालय और स्थानीय समुदायों के समन्वय से शोध आधारित विकास मॉडल तैयार करने पर विशेष बल दिया।

विशेषज्ञों के अनुसार, यह प्रशिक्षण ग्रामीण उद्यमिता को नई दिशा देने के साथ-साथ महिला स्वयं सहायता समूहों की आय बढ़ाने, स्थानीय उत्पादों की प्रभावी ब्रांडिंग और उन्हें व्यापक बाजार उपलब्ध कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

कार्यक्रम में जिला परियोजना प्रबंधक ममराज चौहान, सहायक प्रबंधक सचिन चंखवान, इन्क्यूबेशन मैनेजर विश्वास दीपक, रीप टीम तथा विकासखंड चम्पावत के अधिकारी एवं कर्मचारी भी उपस्थित रहे।