डीडीहाट (पिथौरागढ़)। सीमांत क्षेत्र डीडीहाट की बेटी और युवा पर्वतारोही दीपिका टोलिया एक बार फिर उत्तराखंड का नाम रोशन करने की तैयारी में हैं। दीपिका इन दिनों लेह-लद्दाख की मारखा वैली स्थित माउंट कांग यात्से-2 (6,250 मीटर/20,505 फीट) के शिखर पर विजय प्राप्त करने के अभियान पर रवाना हुई हैं। उनके इस अभियान को लेकर डीडीहाट सहित पूरे क्षेत्र में उत्साह का माहौल है।
नगर पालिका अध्यक्ष गिरीश चुफाल ने दीपिका टोलिया को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि डीडीहाट की बेटी अपने साहस, मेहनत और संकल्प से पूरे क्षेत्र का नाम राष्ट्रीय स्तर पर रोशन कर रही हैं। उन्होंने विश्वास जताया कि दीपिका इस अभियान में भी सफलता प्राप्त कर तिरंगा फहराएंगी और क्षेत्र के युवाओं, विशेषकर बेटियों के लिए नई प्रेरणा बनेंगी। उन्होंने स्वामी मलयनाथ और मां नंदा से दीपिका की सुरक्षित एवं सफल यात्रा की कामना की।
दीपिका टोलिया की प्रारंभिक शिक्षा डीडीहाट में हुई। इसके बाद उन्होंने डिप्लोमा इन फार्मेसी की पढ़ाई पूरी की और नेहरू इंस्टीट्यूट ऑफ माउंटेनियरिंग (एनआईएम), उत्तरकाशी से पर्वतारोहण का प्रशिक्षण प्राप्त किया।
पर्वतारोहण के क्षेत्र में दीपिका पहले भी कई उल्लेखनीय उपलब्धियां हासिल कर चुकी हैं। उन्होंने बलजुरी पर्वत (19,425 फीट) का सफल आरोहण किया है। इसके अलावा सियोनला पास (17,867 फीट) अभियान पूरा किया तथा बारा शिगरी ग्लेशियर के ऑल वुमन एक्सपीडिशन में भी भाग लिया। उनकी सबसे बड़ी उपलब्धियों में दो वर्जिन (अविजित) पर्वत चोटियों का प्रथम सफल आरोहण शामिल है, जिन्हें उन्होंने हिमालयी क्षेत्र की महिलाओं को समर्पित करते हुए "शुकन्या" और "शक्ति" नाम दिया।
दीपिका ने मुद्गा टॉप (11,500 फीट) सहित उत्तराखंड हिमालय की अनेक ऊंची चोटियों और ट्रेकिंग अभियानों में भी सफल सहभागिता की है। वर्ष 2017 में हिमालय एवं गंगा नदी क्षेत्र में आयोजित विश्व के सबसे लंबे क्लाइम्बाथॉन का हिस्सा बनकर उन्होंने विश्व रिकॉर्ड स्थापित किया। वहीं, बिरथी वॉटरफॉल (148 मीटर) पर सबसे लंबी वॉटरफॉल रैपलिंग के लिए उनका नाम भारत बुक ऑफ रिकॉर्ड्स और एशिया बुक ऑफ रिकॉर्ड्स में दर्ज है।
अब दीपिका की निगाहें माउंट कांग यात्से-2 की चोटी पर हैं। यदि उनका अभियान सफल रहता है तो यह डीडीहाट, पिथौरागढ़ और पूरे उत्तराखंड के लिए एक और गौरवपूर्ण उपलब्धि होगी। क्षेत्रवासियों ने उनके सफल एवं सुरक्षित अभियान के लिए शुभकामनाएं दी हैं।


