पिथौरागढ़। जनपद पिथौरागढ़ के मुनस्यारी और धारचूला विकासखंड की महिला बुनकरों ने अपनी अद्भुत कलात्मक प्रतिभा का प्रदर्शन करते हुए ऊनी कालीनों पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी, राष्ट्रीय प्रतीक अशोक स्तंभ और ‘सत्यमेव जयते’ की आकृतियां उकेरी हैं। ऊन के धागों से तैयार की गई ये कलाकृतियां महिलाओं के हुनर, मेहनत, धैर्य और रचनात्मकता का उत्कृष्ट उदाहरण हैं।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में एक जनपद, एक उत्पाद (ODOP) योजना के अंतर्गत चयनित पिथौरागढ़ के वूलन प्रोडक्ट्स महिला सशक्तिकरण, स्थानीय हस्तशिल्प और स्वरोजगार को नई दिशा दे रहे हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आत्मनिर्भर भारत के संकल्प को साकार करने की दिशा में जिले की महिलाएं पारंपरिक बुनकारी को आधुनिक डिजाइन और रचनात्मकता के साथ जोड़कर नए अवसर तलाश रही हैं।
पारंपरिक दनकालीन बुनकारी को मिल रही नई पहचान पिथौरागढ़ की पारंपरिक दनकालीन बुनकारी यहां की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत का महत्वपूर्ण हिस्सा है। क्षेत्र की महिलाएं स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से इस कला को संरक्षित करने और अगली पीढ़ी तक पहुंचाने का कार्य कर रही हैं। पारंपरिक उत्पादों के साथ बाजार की मांग के अनुरूप नए डिजाइन और आकर्षक उत्पाद तैयार कर महिलाएं अपनी कला को स्वरोजगार के अवसरों में बदल रही हैं।
आत्मनिर्भरता का माध्यम बन रही बुनकारी जिला उद्योग केंद्र, पिथौरागढ़ के मार्गदर्शन में महिला समूहों को आधुनिक बाजार की आवश्यकताओं के अनुरूप उत्पाद तैयार करने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है। इससे स्थानीय हस्तशिल्प को नई पहचान मिलने के साथ महिला बुनकरों के उत्पादों को बाजार तक पहुंचाने की संभावनाएं भी बढ़ रही हैं।
महिला बुनकरों के लिए कालीन निर्माण अब केवल पारंपरिक कला तक सीमित नहीं है, बल्कि यह आजीविका और आर्थिक आत्मनिर्भरता का महत्वपूर्ण माध्यम बन रहा है। स्थानीय संसाधनों और पारंपरिक कौशल का उपयोग कर महिलाएं अपनी आर्थिक भागीदारी बढ़ाने के साथ उत्तराखंड की सांस्कृतिक विरासत को भी सहेज रही हैं।
मुनस्यारी और धारचूला की महिला बुनकरों की यह पहल दर्शाती है कि पारंपरिक हुनर को उचित मार्गदर्शन, आधुनिक डिजाइन और बाजार के अवसर मिलें, तो वही हुनर महिला सशक्तिकरण, स्थानीय रोजगार और आत्मनिर्भरता की मजबूत नींव बन सकता है।


