पिथौरागढ़। अपने पैतृक गांव पहुंचे मशहूर फिल्म अभिनेता ने पिथौरागढ़ के ऐतिहासिक एवं प्राचीन सोरगढ़ किले का भ्रमण किया। इस दौरान उनकी मुलाकात भाव-राग-ताल नाट्य अकादमी के कलाकारों से हुई। अभिनेता ने कलाकारों के अभिनय, समर्पण और सांस्कृतिक संरक्षण के प्रयासों की मुक्त कंठ से सराहना करते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की।

मौके पर अकादमी द्वारा आगामी 14 एवं 15 जुलाई को नगर निगम सभागार, पिथौरागढ़ में आयोजित होने वाले दो महत्वपूर्ण नाटकों 'नदी प्यासी थी' और 'आनंदमठ' के मंचन की जानकारी भी साझा की गई।

इस अवसर पर श्री पांडेय ने जनपदवासियों से अधिक से अधिक संख्या में नाटक देखने की अपील करते हुए कहा कि सभी लोग अपने परिवार और बच्चों के साथ इन प्रस्तुतियों का आनंद लेने अवश्य आएं। उन्होंने कहा कि रंगमंच केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं, बल्कि समाज, संस्कृति और संवेदनाओं को जीवंत रखने का सशक्त माध्यम है।

उन्होंने कहा कि नई पीढ़ी को थिएटर, संगीत और कला से जोड़ना समय की आवश्यकता है। यदि बच्चे बचपन से ही ऐसे सांस्कृतिक आयोजनों से जुड़ेंगे तो उनमें रचनात्मकता, संवेदनशीलता और अपनी सांस्कृतिक विरासत के प्रति सम्मान विकसित होगा।

भाव-राग-ताल नाट्य अकादमी ने भी जनपद के सभी नागरिकों से अपील की है कि वे इस सांस्कृतिक आयोजन में अपनी सहभागिता सुनिश्चित करें और स्थानीय रंगमंच को प्रोत्साहित करें।