मुवानी। रामगंगा घाटी की 15 सूत्रीय मांगों को लेकर क्षेत्र की जनता अब आर-पार की लड़ाई के मूड में नजर आ रही है। सोमवार को प्रमुख कस्बे मुवानी में बड़ी संख्या में ग्रामीण सड़कों पर उतरे और बोरायजर से चौसाली बाजार तक जुलूस निकालकर सरकार के खिलाफ अपना विरोध दर्ज कराया। आंदोलन को समर्थन देते हुए व्यापारियों ने दोपहर तक अपने प्रतिष्ठान बंद रखे।
रामगंगा घाटी विकास संघर्ष समिति के अध्यक्ष कमल दीप सिंह बिष्ट के नेतृत्व में शुरू हुए आंदोलन में क्षेत्र के सैकड़ों लोगों ने भागीदारी की। जुलूस के बाद मुवानी बाजार में तीन दिवसीय क्रमिक अनशन शुरू किया गया। आंदोलनकारियों ने स्पष्ट चेतावनी दी कि यदि सरकार ने उनकी 15 सूत्रीय मांगों पर शीघ्र सकारात्मक कार्रवाई नहीं की तो क्रमिक अनशन को अनिश्चितकालीन आमरण अनशन में तब्दील किया जाएगा।
सरकार को गांधीवादी आंदोलन के जरिए चेताने की कोशिश आंदोलनकारियों ने कहा कि क्षेत्र की समस्याओं को लेकर लंबे समय से शासन-प्रशासन का ध्यान आकर्षित किया जा रहा है, लेकिन अपेक्षित समाधान नहीं हुआ। समिति अध्यक्ष कमल दीप सिंह बिष्ट ने कहा कि आंदोलन गांधीवादी तरीके से चलाया जा रहा है और सरकार से जनहित की मांगों पर गंभीरता से कार्रवाई की अपेक्षा है।
मुवानी में सुबह से ही बाजार बंद रहने के कारण आंदोलन का व्यापक असर दिखाई दिया। स्थिति की संवेदनशीलता को देखते हुए पुलिस-प्रशासन की ओर से बड़ी संख्या में पुलिसकर्मियों की तैनाती की गई।
वक्ताओं ने एकजुट होकर उठाई आवाज क्रमिक अनशन स्थल पर आयोजित सभा में वक्ताओं ने क्षेत्र की समस्याओं को प्रमुखता से उठाते हुए आंदोलन को लगातार मजबूत करने की अपील की। संघर्ष समिति के कोषाध्यक्ष राम सिंह राठौर ने लोगों से आंदोलन में सहयोग बनाए रखने का आह्वान किया। उप ग्राम प्रधान शोभन कार्की ने क्षेत्र में पूर्व में हुए आंदोलनों की याद दिलाते हुए एकजुटता पर जोर दिया।
भूतपूर्व कैप्टन श्याम सिंह कार्की ने पूर्व सैनिक संगठन की ओर से आंदोलन को पूर्ण सहयोग देने की बात कही। भावना बिष्ट ने मातृशक्ति से भी बढ़-चढ़कर आंदोलन में भाग लेने का आग्रह किया। आंदोलन का संचालन कर रहे हंस पाल ने रामगंगा घाटी की भौगोलिक परिस्थितियों का हवाला देते हुए सरकार से सभी मांगों का शीघ्र समाधान करने की अपील की।
पहले दिन पांच लोग बैठे अनशन पर आंदोलन के पहले दिन क्रमिक अनशन पर कमल दीप सिंह, राम सिंह राठौर, शोभन कार्की, मेहर सिंह कठायत और त्रिलोक बोरा बैठे।
इस दौरान व्यापार संघ अध्यक्ष सुमित पाल सहित संजय भट्ट, सूरज गोरखा, दिगम्बर मारकुन, नवीन बसेड़ा, राहुल सोनार, दीवान सिंह बोरा, गोविंद भट्ट, मनोज भण्डारी, पप्पू पुजारा, कृष्ण कुमार शर्मा, अंकित मेहरा, मुकेश बोरा, हयात बिष्ट, धर्मेंद्र बिष्ट, हरीश बोरा, जितेश खनका, दीपक मंगला, लोक बहादुर चंद, पुष्कर बोरा, रवि गोस्वामी, किशोर भट्ट, दीपक कार्की, दिवाकर सोनार, दीवानी राम चन्याल, हरीश पुजारा, महेन्द्र खोलिया, नवल वर्मा, जगदीश कापड़ी, कुन बहादुर सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण मौजूद रहे।
महिलाओं की भी सक्रिय भागीदारी रही। मीना देवी, माधवी देवी, ललिता डोबाल, मंजू पुजारा, बिमला राठौर, गीता देवी, खुशी भट्ट, विनीता बोहरा और ललिता कार्की समेत सैकड़ों ग्रामीणों की मौजूदगी ने आंदोलन को व्यापक जनसमर्थन दिया।
अब निगाह सरकार की प्रतिक्रिया पर है। आंदोलनकारियों की चेतावनी के बाद आने वाले दिनों में सरकार और प्रशासन की ओर से क्या कदम उठाए जाते हैं, यह देखना महत्वपूर्ण होगा। _ कपिल भट्ट वाणी न्यूज


