देहरादून। अंकिता भंडारी हत्याकांड में न्याय की मांग और कथित VIP को सिक्किम का राज्यपाल बनाए जाने के विरोध में कांग्रेस ने केंद्र सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। देहरादून के गांधी पार्क स्थित गांधी प्रतिमा के सामने कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल पार्टी कार्यकर्ताओं के साथ मौन उपवास पर बैठे। कांग्रेस ने इस मामले को उत्तराखंड की अस्मिता, जनभावनाओं और न्याय व्यवस्था से जुड़ा गंभीर सवाल बताया।
प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल ने कहा कि अंकिता भंडारी के माता-पिता द्वारा VIP के रूप में जिस व्यक्ति का नाम लिया गया है, उस मामले में FIR और निष्पक्ष जांच की मांग उठनी चाहिए थी। कांग्रेस का आरोप है कि संबंधित व्यक्ति को जांच और कानूनी प्रक्रिया का सामना कराने के बजाय राज्यपाल की संवैधानिक जिम्मेदारी सौंपना जनता के मन में गंभीर सवाल खड़े करता है।
गोदियाल ने केंद्र सरकार के फैसले पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि यह कदम संबंधित व्यक्ति को बचाने की मंशा से उठाया गया है। उन्होंने कहा कि यदि किसी व्यक्ति पर गंभीर आरोप हैं, तो उन आरोपों की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए और सच्चाई कानूनी प्रक्रिया के जरिए सामने आनी चाहिए। कांग्रेस ने मांग की कि अंकिता को न्याय दिलाने के लिए मामले से जुड़े सभी सवालों का पारदर्शी तरीके से जवाब दिया जाए।
कांग्रेस ने कहा कि अंकिता भंडारी हत्याकांड में VIP का मुद्दा लंबे समय से प्रदेश की राजनीति और जनचर्चा में बना हुआ है। पार्टी का सवाल है कि जब अंकिता के माता-पिता भी इस संबंध में नाम सामने आने की बात कह रहे हैं, तो मामले की निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करना सरकार की प्राथमिकता क्यों नहीं है?
गणेश गोदियाल ने प्रदेशवासियों से इस फैसले के खिलाफ आवाज उठाने की अपील करते हुए कहा कि अंकिता को न्याय दिलाने की मांग किसी एक राजनीतिक दल तक सीमित नहीं है, बल्कि यह उत्तराखंड की जनता की भावनाओं से जुड़ा विषय है।
न्याय की मांग पर सियासी संग्राम तेज अंकिता भंडारी प्रकरण को लेकर कांग्रेस ने केंद्र सरकार के फैसले पर कड़े सवाल उठाए हैं। मौन उपवास के जरिए पार्टी ने यह संदेश देने की कोशिश की कि मामले में उठ रहे सवालों का जवाब केवल राजनीतिक बयानों से नहीं, बल्कि निष्पक्ष जांच और पारदर्शी कानूनी प्रक्रिया से मिलना चाहिए।
हालांकि, कथित VIP से जुड़े आरोपों और उनके कानूनी निष्कर्षों के बीच अंतर करना जरूरी है। किसी व्यक्ति के खिलाफ आरोप अपने आप में अपराध सिद्ध नहीं करते। ऐसे में मामले की निष्पक्ष जांच और न्यायिक प्रक्रिया ही सच्चाई सामने लाने का आधार है।


