पिथौरागढ़, 7 जुलाई 2026। उत्तराखंड की प्रथम लोकगायिका स्वर्गीय श्रीमती कबूतरी देवी की आठवीं पुण्यतिथि के अवसर पर मंगलवार को पिथौरागढ़ जिला पंचायत सभागार में श्रद्धांजलि समारोह का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में उनके उत्तराखंड की लोकसंस्कृति, लोकगीतों और लोक परंपराओं के संरक्षण एवं प्रचार-प्रसार में दिए गए अमूल्य योगदान को भावपूर्ण श्रद्धांजलि अर्पित की गई।

स्वर्गीय कबूतरी देवी का जन्म 18 जनवरी 1945 को हुआ था। उन्होंने उत्तराखंड की लोकसंस्कृति और लोकविधाओं को आकाशवाणी नजीबाबाद तथा विभिन्न सांस्कृतिक मंचों के माध्यम से देश-विदेश तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उन्हें उत्तराखंड की पहली लोकगायिका के रूप में सम्मानपूर्वक याद किया जाता है। सत्तर के दशक में उन्होंने आकाशवाणी के माध्यम से उत्तराखंडी लोकगीतों को नई पहचान दिलाई तथा आकाशवाणी के लिए 100 से अधिक लोकगीतों का गायन किया।

श्रद्धांजलि समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में डॉ. मनोज गोरकेला, सीजीपीएसी (काउंसिल), भारत सरकार, विशेष अधिवक्ता, छत्तीसगढ़ एवं मध्य प्रदेश सरकार तथा माननीय सर्वोच्च न्यायालय में अधिवक्ता, उपस्थित रहे। उन्होंने स्वर्गीय कबूतरी देवी के योगदान को उत्तराखंड की सांस्कृतिक धरोहर के लिए प्रेरणास्रोत बताते हुए कहा कि उनकी आवाज आज भी लोकसंगीत प्रेमियों के दिलों में जीवंत है।

कार्यक्रम में उत्तराखंड के अनेक लोकगायकों एवं सांस्कृतिक कलाकारों ने अपने लोकगीतों की प्रस्तुति देकर स्वर्गीय कबूतरी देवी को संगीतमय श्रद्धांजलि अर्पित की। इस अवसर पर सुरेश राजन, गोविंद डीगारी, प्रकाश रावत, नानू बिष्ट, सुरेश प्रसाद सुरीला, मनोज रावत, नवीन भट्ट, कैलाश कुमार, खीम भोला, नेगी भाई, मुन्नी टम्टा, मीणा डीगारी, उत्तराखंड की खोज के जगजीवन कन्याल, हेमराज बिष्ट, सीता सोराड़ी सहित अनेक कलाकार एवं सांस्कृतिक प्रेमी उपस्थित रहे।

कार्यक्रम के अंत में आयोजकों ने सभी अतिथियों, लोक कलाकारों एवं उपस्थित जनसमुदाय का आभार व्यक्त करते हुए स्वर्गीय कबूतरी देवी के लोकसंगीत और सांस्कृतिक योगदान को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का संकल्प दोहराया। वक्ताओं ने कहा कि उत्तराखंड की लोकधरोहर को जीवित रखने में स्वर्गीय कबूतरी देवी का योगदान सदैव अविस्मरणीय रहेगा।