कनालीछीना। उत्तराखंड भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार कल्याण बोर्ड की ओर से कनालीछीना ब्लॉक में श्रमिक किट वितरण को लेकर अव्यवस्थाओं के आरोप सामने आए हैं। ब्लॉक क्षेत्र की विभिन्न ग्राम सभाओं से बड़ी संख्या में श्रमिक किट प्राप्त करने की उम्मीद में कनालीछीना ब्लॉक पहुंचे, लेकिन स्वास्थ्य जांच, सत्यापन और अन्य प्रक्रियाओं में लंबा समय लगने के कारण लोगों को घंटों इंतजार करना पड़ा।

श्रमिकों का कहना है कि वे सुबह करीब 8 बजे ब्लॉक पहुंच गए थे, लेकिन शाम तक प्रक्रिया पूरी नहीं हो सकी। कई लोगों के अनुसार उन्हें रात तक इंतजार करना पड़ा। दूरदराज के गांवों से आए श्रमिकों और महिलाओं को इस दौरान काफी परेशानी का सामना करना पड़ा। कुछ महिलाओं के छोटे बच्चे भी घर पर थे, जिसके चलते उन्होंने व्यवस्था को लेकर नाराजगी जताई।

इस बीच सामने आए एक वीडियो में कुछ महिलाएं क्षेत्रीय विधायक विशन सिंह चुफाल के खिलाफ नारेबाजी करती दिखाई दे रही हैं। वीडियो और नारेबाजी के पूरे संदर्भ की स्वतंत्र पुष्टि किया जाना अभी बाकी है।

संगठन के जिला अध्यक्ष हेमराज सिंह बिष्ट ने पूरे मामले पर नाराजगी जताते हुए कहा कि श्रम विभाग की कार्यप्रणाली के कारण भोली-भाली और गरीब जनता को परेशानी उठानी पड़ी ।

उन्होंने कहा, “श्रम विभाग के कारनामे, भोली-भाली जनता और गरीब जनता को सुबह 8 बजे से रात 8 बजे तक कनालीछीना ब्लॉक में बिठाकर भूखे-प्यासे रखने के बाद बिना सामान दिए घरों को भेज दिया गया।”

हेमराज सिंह बिष्ट ने शासन-प्रशासन से सवाल करते हुए कहा कि गरीब और भोली-भाली जनता को विभाग कब तक इस तरह परेशान करता रहेगा और क्या इस मामले में कोई कार्रवाई होगी? उन्होंने यह भी कहा कि यदि कार्रवाई नहीं होती है तो जनता को अपने स्तर से कार्रवाई करने के लिए मजबूर होना पड़ेगा।

इस पूरे मामले में सबसे महत्वपूर्ण सवाल यह है कि भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार कल्याण बोर्ड के पास पंजीकृत श्रमिकों का रिकॉर्ड उपलब्ध होने के बावजूद इतनी बड़ी संख्या में लोगों को एक ही दिन ब्लॉक मुख्यालय क्यों बुलाया गया?

क्या विभाग ने पहले से ग्रामवार और ट्रेडवार लाभार्थियों की सूची तैयार की थी? क्या सभी लोगों ने श्रमिक किट के लिए आवेदन किया था? यदि आवेदन किए गए थे तो कनालीछीना ब्लॉक से कुल कितने आवेदन प्राप्त हुए और कितने श्रमिक पात्र पाए गए?

यह भी स्पष्ट किया जाना जरूरी है कि राजमिस्त्री, बढ़ई, प्लंबर, इलेक्ट्रिशियन, पेंटर, लोहार, वेल्डर तथा अन्य श्रेणियों के कितने श्रमिकों को किट के लिए चयनित किया गया था।

यदि श्रमिक किट के लिए अलग से आवेदन नहीं लिए गए थे, तो लाभार्थियों का चयन किस आधार पर किया गया? क्या सभी लाभार्थी पहले से बोर्ड में पंजीकृत श्रमिक थे? क्या उनके दस्तावेज और पात्रता का सत्यापन पहले ही हो चुका था?

यदि सत्यापन मौके पर किया जाना था तो विभाग को पहले से यह तय करना चाहिए था कि एक दिन में कितने श्रमिकों का सत्यापन किया जा सकता है। इतनी बड़ी संख्या में लोगों को एक साथ बुलाने के बजाय ग्रामवार या समय-स्लॉट के आधार पर बुलाया जाता तो लंबी कतार और घंटों के इंतजार से बचा जा सकता था।

कुल कितने श्रमिकों ने आवेदन किया था? कितने पात्र पाए गए? कितनी किट उपलब्ध थीं? कितने श्रमिकों को किट वितरित की जानी थी? लाभार्थियों का चयन किस आधार पर हुआ? और यदि किट उपलब्ध थीं तो कई श्रमिकों को बिना किट दिए वापस क्यों लौटना पड़ा?

साथ ही यह भी सवाल है कि सुबह से रात तक श्रमिकों को इंतजार कराने की जिम्मेदारी किसकी थी और भविष्य में ऐसी स्थिति दोबारा न बने, इसके लिए क्या व्यवस्था की जाएगी।

श्रमिकों के लिए बनाई गई कल्याणकारी योजना का उद्देश्य उन्हें सुविधा और सहायता उपलब्ध कराना है। ऐसे में यदि बड़ी संख्या में श्रमिकों को घंटों इंतजार करने के बाद भी बिना किट वापस लौटना पड़ा है, तो पूरे मामले की रिकॉर्ड के आधार पर जांच और जिम्मेदारी तय किए जाने की मांग उठना स्वाभाविक है। अब निगाहें शासन-प्रशासन और श्रम विभाग के जवाब पर हैं ।

_ कपिल भट्ट वाणी न्यूज