बागेश्वर। उत्तराखंड के बागेश्वर जिले में अमरकोट मोटर मार्ग से नदीगांव तक बन रही सड़क को लेकर उत्तराखण्ड स्वाभिमान मोर्चा के प्रदेश उपाध्यक्ष भूपेन्द्र कोरंगा ने गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने निर्माणाधीन सड़क का वीडियो जारी करते हुए बजट और निर्माण कार्य को लेकर सवाल खड़े किए हैं। कोरंगा ने लोक निर्माण विभाग (PWD) की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए पूरे मामले की पारदर्शी जांच की मांग की है।
भूपेन्द्र कोरंगा का दावा है कि महज 190 मीटर सड़क के निर्माण के लिए 750 करोड़ रुपये का बजट जारी किया गया है। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि इतनी बड़ी धनराशि वास्तव में इस छोटे से सड़क निर्माण कार्य के लिए स्वीकृत की गई है, तो इसकी लागत, स्वीकृति और खर्च का पूरा ब्योरा सार्वजनिक क्यों नहीं किया जाना चाहिए?
कोरंगा ने कहा कि इतनी बड़ी धनराशि से पहाड़ के दूरस्थ गांवों तक सड़क पहुंचाने और ग्रामीणों की आवागमन संबंधी समस्याओं को दूर करने में मदद मिल सकती है। ऐसे में इस निर्माण कार्य की लागत और बजट की वास्तविक स्थिति स्पष्ट होना बेहद जरूरी है।
कोरंगा ने पंचायतों में बनने वाले सीसी मार्गों का उदाहरण देते हुए कहा कि उनके अनुसार, कई स्थानों पर 100 मीटर सीसी मार्ग करीब एक लाख रुपये में बन जाता है। ऐसे में केवल 190 मीटर सड़क के लिए कथित तौर पर 750 करोड़ रुपये के बजट का दावा कई सवाल खड़े करता है।
हालांकि, सीसी मार्ग और मोटर मार्ग की निर्माण लागत में सड़क की चौड़ाई, पहाड़ी कटान, सुरक्षा दीवार, जल निकासी, भूस्खलन सुरक्षा और अन्य निर्माण कार्यों के कारण अंतर हो सकता है। इसलिए वास्तविक लागत का आकलन स्वीकृत डीपीआर, तकनीकी प्राक्कलन और विभागीय अभिलेखों के आधार पर ही किया जा सकता है।
कोरंगा द्वारा जारी वीडियो में निर्माणाधीन सड़क पर दो जेसीबी मशीनें काम करती दिखाई देने की बात सामने आई है। उन्होंने निर्माण कार्य और बजट के बीच पारदर्शिता सुनिश्चित करने पर जोर दिया है। उनका कहना है कि जनता के पैसे से होने वाले विकास कार्यों में खर्च का स्पष्ट हिसाब होना चाहिए और किसी भी प्रकार की अनियमितता की आशंका होने पर उसकी निष्पक्ष जांच कराई जानी चाहिए।
इस मामले में लोक निर्माण विभाग को सड़क की वास्तविक लंबाई, स्वीकृत बजट, निर्माण की निर्धारित लागत, कार्यदायी संस्था, ठेकेदार, कार्यादेश और अब तक किए गए भुगतान की जानकारी सार्वजनिक करनी चाहिए। यदि बजट और निर्माण लागत को लेकर कोई विसंगति है, तो उसका तकनीकी एवं वित्तीय परीक्षण कराया जाना चाहिए।
सबसे बड़ा सवाल: क्या अमरकोट मोटर मार्ग से नदीगांव तक 190 मीटर सड़क के लिए वास्तव में 750 करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए हैं, या बजट की राशि को लेकर कोई भ्रम है? इसका जवाब विभागीय दस्तावेजों और आधिकारिक स्पष्टीकरण से ही सामने आएगा।
फिलहाल, भूपेन्द्र कोरंगा के आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि और लोक निर्माण विभाग का आधिकारिक पक्ष सामने आना बाकी है। ऐसे में मामले की निष्पक्ष जांच और बजट का पूरा विवरण सार्वजनिक होना जरूरी है, ताकि जनता के सामने वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सके।


