रुद्रप्रयाग। चारधाम यात्रा के लिहाज से महत्वपूर्ण रुद्रप्रयाग में केदारनाथ और बदरीनाथ धाम जाने वाले मार्गों को जोड़ने वाली बहुप्रतीक्षित पुल-सुरंग परियोजना अब अपने अंतिम चरण में पहुंच गई है। अलकनंदा नदी पर बन रहे पुल की लोड टेस्टिंग सफलतापूर्वक पूरी कर ली गई है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने 11 सितंबर को जानकारी दी कि पुल का निर्माण कार्य लगभग पूरा हो चुका है। हालांकि बारिश के कारण कुछ अंतिम कार्य अभी शेष हैं, जिन्हें मौसम अनुकूल होते ही पूरा किया जाएगा।
200 मीटर लंबा डबल-लेन पुल, 900 मीटर की सुरंग इस परियोजना की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यह सिर्फ अलकनंदा नदी पर बन रहे पुल तक सीमित नहीं है। परियोजना के तहत करीब 200 मीटर लंबा डबल-लेन पुल और 900 मीटर लंबी सुरंग तैयार की जा रही है। सुरंग जखतोली से बेलणी क्षेत्र को जोड़ती है और इसके जरिए गौरीकुंड हाईवे को बदरीनाथ हाईवे से सीधा संपर्क मिलने की उम्मीद है।
करीब 156 करोड़ रुपये की लागत वाली इस परियोजना को रुद्रप्रयाग की यातायात व्यवस्था और चारधाम यात्रा प्रबंधन के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। अधिकारियों के मुताबिक परियोजना का उद्देश्य केवल नया पुल उपलब्ध कराना नहीं, बल्कि केदारनाथ और बदरीनाथ की ओर जाने वाले यातायात को अधिक व्यवस्थित करना है।
छह ट्रकों के साथ हुआ लोड टेस्ट पुल की मजबूती और तकनीकी क्षमता जांचने के लिए सितंबर की शुरुआत में लोड टेस्टिंग शुरू की गई थी। रिपोर्टों के अनुसार परीक्षण के दौरान छह ट्रकों को इस्तेमाल किया गया, जिनका कुल भार करीब 150 टन था। इंजीनियरों ने इस दौरान पुल के तकनीकी व्यवहार और संरचनात्मक मानकों की निगरानी की। इसके बाद लोड टेस्टिंग सफल घोषित की गई।
अब पुल के अंतिम निर्माण कार्य पूरे होने और संबंधित औपचारिकताएं पूरी होने के बाद इसके यातायात के लिए खोले जाने की दिशा में कदम बढ़ेंगे। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया है कि बारिश के कारण बचे काम मौसम अनुकूल होने पर पूरे किए जाएंगे। इसलिए फिलहाल पुल को पूरी तरह यातायात के लिए खुला हुआ मानना जल्दबाजी होगी।
चारधाम यात्रा के दौरान जाम से मिलेगी राहत रुद्रप्रयाग जिला मुख्यालय चारधाम यात्रा के दौरान बेहद महत्वपूर्ण यातायात केंद्र बन जाता है। यहां से बड़ी संख्या में वाहन केदारनाथ और बदरीनाथ की ओर जाते हैं। यात्रा सीजन में वाहनों का दबाव बढ़ने से शहर और आसपास के हिस्सों में जाम की समस्या भी सामने आती रही है।
नई पुल-सुरंग परियोजना के पूरा होने के बाद गौरीकुंड-केदारनाथ मार्ग और बदरीनाथ हाईवे के बीच संपर्क अधिक सुगम होने की उम्मीद है। अधिकारियों के अनुसार इससे रुद्रप्रयाग नगर क्षेत्र में यातायात का दबाव कम करने में मदद मिल सकती है और यात्रियों को भी वैकल्पिक तथा अधिक व्यवस्थित मार्ग मिल सकेगा।
स्थानीय लोगों को भी होगा फायदा परियोजना का लाभ केवल चारधाम यात्रियों तक सीमित नहीं रहेगा। पुल और सुरंग के बनने से आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों की जिला मुख्यालय से कनेक्टिविटी भी बेहतर होने की उम्मीद है।
पूर्व में अधिकारियों ने बताया था कि इससे धनपुर, रानीगढ़ और भरदार क्षेत्र के गांवों का कलेक्ट्रेट और विकास भवन से संपर्क आसान होगा। यानी परियोजना को तीर्थयात्रा के साथ-साथ स्थानीय आवागमन और क्षेत्रीय विकास की दृष्टि से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
पहले अगस्त में खोलने का था लक्ष्य परियोजना को लेकर पहले अधिकारियों ने इसे अगस्त 2026 तक यातायात के लिए खोलने का लक्ष्य रखा था। जून 2026 में निरीक्षण के दौरान परियोजना के अंतिम चरण में होने की जानकारी दी गई थी और तकनीकी परीक्षणों के बाद इसे यात्रा संचालन के लिए खोलने की योजना बताई गई थी। हालांकि बारिश और अंतिम कार्यों के कारण यह समयसीमा आगे बढ़ गई।
अब लोड टेस्टिंग सफल होने के बाद परियोजना का सबसे महत्वपूर्ण तकनीकी चरण पूरा हो चुका है। शेष कार्य मौसम की स्थिति पर निर्भर हैं।
पहाड़ में कनेक्टिविटी का नया अध्याय मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में उत्तराखंड में सड़क और पुलों के माध्यम से कनेक्टिविटी को लगातार मजबूत किया जा रहा है। उनका कहना है कि बेहतर कनेक्टिविटी से श्रद्धालुओं और पर्यटकों के आवागमन के साथ स्थानीय स्तर पर रोजगार और आर्थिक गतिविधियों के अवसर भी बढ़ेंगे।
रुद्रप्रयाग में बन रही यह पुल-सुरंग परियोजना इसी व्यापक कनेक्टिविटी अभियान की एक महत्वपूर्ण कड़ी है। अब निगाहें इस बात पर हैं कि बारिश थमने के बाद बचे अंतिम कार्य कितनी जल्दी पूरे होते हैं और पुल को नियमित यातायात के लिए कब खोला जाता है। _ मीडिया रिपोर्ट्स


