साहित्य
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ज़ख्मों से कराहता हिमालय, अब भी नहीं जाग रहे हम
बांधों, सुरंगों, सड़कों, अवैध खनन, जंगलों की आग और पेड़ों के कटान से बढ़ रहा हिमालय पर संकट; डॉ. तारा सिंह ने कहा—“नेपाल से सीख लेकर एकजुट हों, हिमालय बचाएं”
Vani Adminबुधवार, 9 सितंबर 20261 मिनट पढ़ें

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हरी भरी,जीव विविधता युक्त घाटियों में बांधों, सड़कों, भवनों का मनचाहा निर्माण, बढ़ता अवैध खनन उद्योग, पहाड़ों का सीना चीर बनती सुरंगें, नदियों का प्रवाह अवरुद्ध करने के निरंतर प्रयास, जंगलों में बढ़ती आग की घटनाएं,पेड़ो का लगातार कटान तथा प्रदूषण व जनसंख्या का बढ़ता दबाव जैसे गहरे जख्मों से हिमालय कराह रहा है।
मगर हम न तो उसकी पीड़ा समझना चाहते और न ही उसके आंसुओं को देख रहे हैं।
हिमालय है तो बर्फ है
बर्फ है तो पानी है, नदियां हैं
याद रखो,बिन पानी सब सून।
नेपाल से शिक्षा लो
एकजुट हो हिमाला बचाओ !
डा 0 तारा सिंह सामाजिक चिंतक
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