डीडीहाट, 15 अगस्त। देश आज 80वां स्वतंत्रता दिवस मना रहा है। जगह-जगह तिरंगा फहराया जा रहा है, देशभक्ति के कार्यक्रम हो रहे हैं और आजादी का जश्न मनाया जा रहा है। वहीं सीमांत क्षेत्र डीडीहाट में आजादी के जश्न के बीच एक ऐसा आयोजन हुआ, जो पिछले 15 वर्षों से अधूरे सरकारी वादे की याद दिला रहा है। डीडीहाट को जिला बनाने की मांग को लेकर संघर्ष कर रही डीडीहाट जिला बनाओ संघर्ष समिति ने आज एक बार फिर 15 पाउंड का केक काटकर सरकार का ध्यान अपनी वर्षों पुरानी मांग की ओर खींचा।
इस कार्यक्रम का सबसे दिलचस्प और व्यंग्यात्मक पहलू यह रहा कि जिस वर्ष डीडीहाट जिला बनाने की घोषणा हुई थी, उसके बाद हर साल बीतता गया और केक का आकार भी बढ़ता गया। आंदोलनकारियों का कहना है कि अगर सरकार डीडीहाट जिला बनाने की घोषणा को धरातल पर उतार देती तो शायद हर साल घोषणा की बरसी पर केक काटने की जरूरत ही नहीं पड़ती।
2011 की घोषणा, 2026 में भी इंतजार , 15 अगस्त 2011 को तत्कालीन मुख्यमंत्री रमेश पोखरियाल ‘निशंक’ ने डीडीहाट सहित चार नए जिले बनाने की घोषणा की थी। इस घोषणा से सीमांत क्षेत्र के लोगों में उम्मीद जगी थी कि अब प्रशासनिक सुविधाएं उनके और करीब आएंगी तथा क्षेत्र के विकास को नई गति मिलेगी। लेकिन घोषणा के 15 वर्ष बाद भी डीडीहाट अलग जिला नहीं बन पाया। समिति इसी अधूरी घोषणा को लेकर लगातार सरकारों पर सवाल उठाती रही है। कभी धरना, कभी अनशन और कभी प्रतीकात्मक विरोध के माध्यम से आंदोलनकारियों ने सरकार को उसका वादा याद दिलाया।
केक बड़ा होता गया, लेकिन जिला नहीं बना डीडीहाट के आज के कार्यक्रम में काटा गया 15 पाउंड का केक केवल एक केक नहीं, बल्कि आंदोलनकारियों के लिए सरकार की लंबित घोषणा का प्रतीक बन गया।
2011 में घोषणा हुई थी, साल बढ़ते गए, घोषणा की उम्र बढ़ती गई, और अब 15 साल पूरे होने पर केक भी 15 पाउंड का हो गया।
लेकिन सवाल वहीं का वहीं है ! डीहाट जिला कब बनेगा? डीडीहाट की जनता और जिला बनाओ संघर्ष समिति का सरकारों से सवाल है कि यदि डीडीहाट को जिला बनाने की घोषणा व्यवहारिक और प्रशासनिक रूप से उचित नहीं थी, तो वर्षों पहले यह घोषणा क्यों की गई ?
और यदि घोषणा उचित थी तो 15 साल बाद भी उसे लागू क्यों नहीं किया गया ? क्या सीमांत क्षेत्र के लोगों को सिर्फ घोषणाओं और आश्वासनों से ही संतुष्ट किया जाता रहेगा? क्या हर स्वतंत्रता दिवस पर डीडीहाट के लोगों को जिला बनने की उम्मीद की जगह घोषणा की बरसी मनानी पड़ेगी?
क्या अगले साल 16 पाउंड का केक कटेगा, या उससे पहले डीडीहाट को जिले का दर्जा मिल जाएगा ? आंदोलन का संदेश संघर्ष समिति का कहना है कि यह आयोजन किसी उत्सव से ज्यादा सरकार को उसके पुराने वादे की याद दिलाने वाला प्रतीकात्मक विरोध है।
डीडीहाट की जिला बनाने की मांग केवल प्रशासनिक सीमाओं का सवाल नहीं, बल्कि क्षेत्र के लोगों की लंबे समय से चली आ रही आकांक्षा से जुड़ी है। सीमांत क्षेत्र होने के कारण यहां के लोगों का तर्क है कि जिला मुख्यालय नजदीक होने से प्रशासनिक कामकाज, स्वास्थ्य, शिक्षा, राजस्व और अन्य सरकारी सेवाओं तक पहुंच आसान हो सकती है।
अब नजर इस बात पर है कि 15 साल पुरानी घोषणा की 15वीं बरसी के बाद सरकार इस मांग को लेकर क्या कदम उठाती है।
क्योंकि सवाल सिर्फ एक जिले का नहीं है ,सवाल उस भरोसे का है, जो एक सरकारी घोषणा के साथ जनता के मन में पैदा हुआ था।
_कपिल : VANI NEWS


