टिहरी गढ़वाल। उत्तराखंड की समृद्ध लोक परंपराओं और प्रकृति के प्रति आस्था को दर्शाने वाला पारंपरिक ‘दुबड़ी’ लोक पर्व टिहरी गढ़वाल जिले के जौनपुर विकासखंड के ग्राम मौगी और पाब में धूमधाम से मनाया गया। इस अवसर पर अपर जिलाधिकारी शैलेन्द्र सिंह नेगी ने ग्रामीणों के साथ पर्व में प्रतिभाग किया और प्रकृति पूजन एवं पारंपरिक लोक रीति-रिवाजों में सहभागिता की।
जौनपुर उत्तराखंड के टिहरी गढ़वाल जिले का एक विकासखंड है। यह क्षेत्र टिहरी और देहरादून जनपदों के बीच स्थित पहाड़ी इलाके में आता है और अपनी विशिष्ट जौनपुरी लोक संस्कृति, पारंपरिक रीति-रिवाजों, लोकगीत-संगीत और कृषि आधारित जीवनशैली के लिए जाना जाता है। यहां के गांवों में आज भी कई पारंपरिक लोक पर्व और धार्मिक-सांस्कृतिक आयोजन सामूहिक रूप से मनाए जाते हैं।
दुबड़ी पर्व का सीधा संबंध ग्रामीण जीवन, कृषि और प्रकृति से जुड़ा हुआ है। इस अनूठी परंपरा में ग्रामीण खेतों में तैयार हो रही नई फसलों और करीब 12 प्रकार के अनाजों की पत्तियों को एकत्र कर उनसे विशेष रूप से ‘दुबड़ी’ तैयार करते हैं। यह परंपरा पहाड़ की उस जीवनशैली को दर्शाती है, जिसमें खेती और प्रकृति को केवल आजीविका का साधन नहीं, बल्कि जीवन और आस्था का अभिन्न हिस्सा माना जाता है।
दुबड़ी पर्व के दौरान महिलाओं की विशेष भूमिका रहती है। महिलाएं पारंपरिक पकवान तैयार कर उन्हें पूजा में शामिल करती हैं। इसके साथ ही दूध और मक्खन अर्पित कर विधि-विधान से पूजा-अर्चना की जाती है। ग्रामीणों की मान्यता के अनुसार यह पर्व प्रकृति, भूमि और कृषि के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने के साथ गांव की सुख-समृद्धि और खुशहाली की कामना से जुड़ा है। पर्व के दौरान लोकवाद्यों की गूंज और पारंपरिक वेशभूषा में ग्रामीणों की सहभागिता ने पूरे क्षेत्र को लोक संस्कृति के रंग में रंग दिया। ग्रामीणों ने सामूहिक रूप से पारंपरिक रीति-रिवाजों का निर्वहन किया। इससे नई पीढ़ी को भी अपनी जड़ों और सांस्कृतिक विरासत से जोड़ने का संदेश मिला।
इस अवसर पर अपर जिलाधिकारी शैलेन्द्र सिंह नेगी ने कहा कि दुबड़ी जैसे लोक पर्व मानव और प्रकृति के गहरे संबंध, सामाजिक एकजुटता और उत्तराखंड की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत के प्रतीक हैं। उन्होंने कहा कि ऐसी लोक परंपराओं के संरक्षण और नई पीढ़ी तक इनके महत्व को पहुंचाने की जरूरत है।
दुबड़ी पर्व केवल पूजा-अर्चना तक सीमित नहीं है, बल्कि यह कृषि, प्रकृति, सामुदायिक जीवन और लोक संस्कृति के आपसी संबंधों को मजबूत करने वाला पर्व है। जौनपुर क्षेत्र में आज भी इसका सामूहिक आयोजन उत्तराखंड की जीवंत ग्रामीण संस्कृति की तस्वीर पेश करता है। कपिल भट्ट वाणी न्यूज


