टिहरी, उत्तराखंड। उत्तराखंड के टिहरी में आयोजित मां कुंजापुरी मेले में मशहूर पंजाबी गायक दलेर मेहंदी की प्रस्तुति के दौरान हुए घटनाक्रम को लेकर विवाद बढ़ता नजर आ रहा है। इस मामले में उनके भाई और गायक मीका सिंह के समर्थन के बाद अब बाबा हरजीत सिंह जी का बयान भी सामने आया है। दोनों की ओर से कलाकार के सम्मान, गरिमा और सार्वजनिक मंचों पर जिम्मेदार व्यवहार की जरूरत पर जोर दिया गया है।

मीका सिंह ने अपने बयान में कहा कि मीडिया को किसी भी आरोप को प्रकाशित करने से पहले तथ्यों की जांच करनी चाहिए। उन्होंने मंच पर दलेर मेहंदी के साथ हुए व्यवहार को निराशाजनक बताते हुए सवाल उठाया कि किसी कलाकार पर आरोप लगाने से पहले उसकी बात सुनना और सच्चाई की पुष्टि करना जरूरी नहीं है क्या ? मीका सिंह के अनुसार, दलेर मेहंदी पिछले दो वर्षों से अस्वस्थ हैं और अभी भी स्वास्थ्य लाभ ले रहे हैं। इसके बावजूद वह अपने बैंड के साथ कार्यक्रमों में प्रस्तुति दे रहे हैं। मीका सिंह ने यह भी कहा कि वह अपने भाई को अच्छी तरह जानते हैं और उनके अनुसार दलेर मेहंदी शराब नहीं पीते।

उन्होंने मीडिया से अपील की कि किसी भी खबर की हेडलाइन किसी व्यक्ति की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचा सकती है, इसलिए खबर प्रकाशित करने से पहले तथ्यों की पुष्टि और संबंधित पक्ष का बयान लेना जरूरी है। दलेर मेहंदी के समर्थन में बाबा हरजीत सिंह जी का नाम भी सामने आया है। उनके समर्थन से जुड़े बयान में कहा गया है कि "कलाकारों के साथ सम्मानजनक व्यवहार किया जाना चाहिए और सार्वजनिक मंचों का इस्तेमाल जिम्मेदारी के साथ होना चाहिए। बाबा हरजीत सिंह ने ये भी कहा की देश के मंचों पर सनातन का अपमान किया जाता है तब आप चुप रहते हो लेकिन जिस प्रकार अपने मंत्री पद के घमंड मै आपने दलेर मेहंदी का अपमान किया वह उचित नहीं था !"

बयान में भाजपा के कैबिनेट मंत्री सुबोध उनियाल से इस घटनाक्रम को लेकर जवाब देने और दलेर मेहंदी के साथ कथित दुर्व्यवहार के लिए माफी मांगने की अपील की गई है। इसमें कहा गया है कि यदि किसी कलाकार की प्रस्तुति को लेकर शिकायत थी, तो उसे तथ्यों के आधार पर और गरिमा बनाए रखते हुए उठाया जाना चाहिए था।

विवाद के बीच यह सवाल उठ रहा है कि यदि दलेर मेहंदी की गायकी या प्रस्तुति को लेकर कोई शिकायत थी, तो क्या आयोजक उनसे बातचीत करके स्थिति स्पष्ट नहीं कर सकते थे? सार्वजनिक मंच पर किसी कलाकार को लेकर टिप्पणी करने के बजाय संबंधित पक्ष को अपना पक्ष रखने का अवसर देना अधिक उचित तरीका हो सकता था। इस मामले ने सार्वजनिक कार्यक्रमों में अतिथि-सम्मान और मीडिया की जिम्मेदारी को लेकर बहस छेड़ दी है। मीका सिंह ने जहां बिना पुष्टि के आरोप प्रकाशित नहीं करने की अपील की है, वहीं बाबा हरजीत सिंह जी के समर्थन से जुड़े बयान में कलाकारों की गरिमा और जवाबदेही पर जोर दिया गया है।

सवाल यही है कि किसी कलाकार की प्रस्तुति को लेकर शिकायत होने पर उसका समाधान सार्वजनिक मंच पर टिप्पणी करके किया जाना चाहिए या बातचीत और तथ्यों के आधार पर? कलाकारों का सम्मान, निष्पक्षता और जिम्मेदार संवाद इस पूरे विवाद के प्रमुख मुद्दे बनकर सामने आए हैं।