पिथौरागढ़। उत्तराखंड में मानसून के दौरान भारी बारिश को देखते हुए प्रशासन द्वारा स्कूलों में अवकाश घोषित किया जा रहा है। हालिया दिनों में भी प्रदेश के कई जिलों में मौसम की चेतावनी के चलते विद्यालय बंद रखने के आदेश जारी किए गए हैं।
हालांकि, दुर्गम ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले स्कूली बच्चों और अभिभावकों के सामने एक अलग तरह की परेशानी सामने आ रही है। अभिभावकों का कहना है कि कई बार अवकाश का आदेश देर से प्रसारित होने के कारण दूरदराज के गांवों से बच्चे सुबह ही विद्यालय के लिए निकल जाते हैं।
ग्रामीण क्षेत्रों में कई बच्चे प्रतिदिन सुबह करीब छह बजे घर से निकलकर कई किलोमीटर पैदल पहाड़ी रास्तों को पार करते हुए विद्यालय पहुंचते हैं। बारिश के मौसम में इन रास्तों पर कीचड़, फिसलन और छोटे-बड़े नालों का खतरा भी बना रहता है।
अभिभावकों के मुताबिक, बच्चे जब बारिश में कठिन पैदल रास्ता तय कर विद्यालय के नजदीक पहुंचते हैं, तब उन्हें पता चलता है कि प्रशासन ने स्कूलों में अवकाश घोषित कर दिया है। इससे बच्चों को न केवल अनावश्यक परेशानी उठानी पड़ती है, बल्कि उनकी सुरक्षा को लेकर भी चिंता बनी रहती है।
कुछ बच्चों ने अपनी परेशानी साझा करते हुए कहा कि बारिश में स्कूल पहुंचने तक उनके कपड़े और जूते पूरी तरह भीग जाते हैं। बच्चों का सवाल है कि जब कपड़े और जूते भीग गए हैं तो अगले दिन विद्यालय जाना भी मुश्किल हो जाता है।
एक अभिभावक ने कहा कि प्रशासन का बच्चों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए अवकाश घोषित करना जरूरी कदम है, लेकिन अवकाश की सूचना भी समय रहते गांवों तक पहुंचना उतना ही जरूरी है। उन्होंने कहा कि दुर्गम क्षेत्रों की भौगोलिक परिस्थितियां मैदानी इलाकों से बिल्कुल अलग हैं। यहां बच्चों को विद्यालय पहुंचने के लिए लंबी दूरी पैदल तय करनी पड़ती है।
अभिभावकों ने मांग की है कि यदि मौसम खराब होने की आशंका के चलते विद्यालयों में अवकाश घोषित किया जाना है तो इसकी सूचना एक दिन पहले या पर्याप्त समय पूर्व प्रसारित की जाए। साथ ही ग्राम स्तर पर संबंधित विद्यालय, शिक्षक, ग्राम पंचायत और अन्य माध्यमों से सूचना पहुंचाने की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।
ग्रामीणों का कहना है कि बच्चों की सुरक्षा सिर्फ स्कूल बंद करने के आदेश तक सीमित नहीं होनी चाहिए, बल्कि उस आदेश की समय पर जानकारी प्रत्येक गांव और अभिभावक तक पहुंचना भी प्रशासन की प्राथमिकता होनी चाहिए।
बारिश के बीच दुर्गम पहाड़ी रास्तों से विद्यालय जाने वाले बच्चों की यह समस्या प्रशासन के लिए एक महत्वपूर्ण सवाल खड़ा करती है—क्या स्कूल बंद करने का आदेश समय पर उन बच्चों तक पहुंच रहा है, जिन्हें उसकी सबसे ज्यादा जरूरत है?
_कपिल भट्ट, VANI NEWS


