पिथौरागढ़/देहरादून। उत्तराखंड में ग्राम प्रधानों की दस सूत्रीय मांगों को लेकर चल रहे आंदोलन के बाद शासन ने चार सदस्यीय समिति का गठन किया है। मुख्यमंत्री के निर्देश पर गठित इस समिति के माध्यम से प्रधानों की मांगों का बिंदुवार परीक्षण कर संस्तुति प्रस्तुत की जाएगी। शासन की इस पहल और मांगों के निराकरण के आश्वासन के बाद प्रदेश प्रधान संगठन उत्तराखंड ने अपना धरना-प्रदर्शन वापस लेने का निर्णय लिया है। अब सवाल यह है कि सरकार प्रधानों की मांगों पर कितनी गंभीरता से कार्रवाई करती है और उन्हें कब तक पूरा किया जाता है।
प्रदेश प्रधान संगठन उत्तराखंड पिछले करीब पांच महीनों से अपनी मांगों को लेकर संघर्ष कर रहा था। संगठन के अनुसार, इस दौरान कई बार सरकार और शासन के स्तर पर वार्ता की गई, लेकिन मांगों के समाधान को लेकर ठोस निर्णय नहीं हो पाया। इसके विरोध में संगठन ने 28 सितंबर से 7 अक्टूबर 2026 तक प्रतिदिन सुबह 10 बजे से शाम 4 बजे तक धरना-प्रदर्शन किया।
आंदोलन को आगे बढ़ाते हुए 8 अक्टूबर को प्रदेशभर के ग्राम प्रधानों ने देहरादून में सचिवालय कूच किया। इसके बाद सरकार ने मामले को संज्ञान में लेते हुए मांगों के परीक्षण के लिए समिति गठित करने की पहल की।
शासन की ओर से 8 अक्टूबर 2026 को जारी कार्यालय ज्ञाप के अनुसार, प्रदेश प्रधान संगठन की दस सूत्रीय मांगों के निराकरण के लिए चार सदस्यीय समिति गठित की गई है। समिति में सचिव, पंचायती राज को अध्यक्ष, सचिव, वित्त और सचिव, ग्राम्य विकास को सदस्य तथा निदेशक, पंचायती राज को सदस्य संयोजक बनाया गया है।
कार्यालय ज्ञाप में कहा गया है कि समिति प्रदेश प्रधान संगठन की मांगों का बिंदुवार परीक्षण कर अपनी संस्तुति सक्षम स्तर पर प्रस्तुत करेगी। हालांकि, समिति गठन का अर्थ मांगों की स्वीकृति या उनके लागू होने का अंतिम निर्णय नहीं है। मांगों पर वास्तविक कार्रवाई शासन की समीक्षा और आगे लिए जाने वाले फैसलों पर निर्भर करेगी।
प्रदेश प्रधान संगठन की ओर से 9 अक्टूबर 2026 को जारी पत्र में धरना-प्रदर्शन वापस लेने की जानकारी दी गई है। पत्र के अनुसार, सरकार की ओर से मिले आश्वासन के बाद संगठन ने संबंधित कार्यालय परिसर में चल रहे धरने को समाप्त करने का निर्णय लिया है।
संगठन ने यह भी कहा है कि भविष्य में यदि धरना-प्रदर्शन की आवश्यकता पड़ती है, तो इसकी सूचना संबंधित अधिकारियों को दी जाएगी। इस घटनाक्रम के बाद फिलहाल आंदोलन समाप्त हो गया है, लेकिन प्रधानों की मांगों के समाधान को लेकर अपेक्षाएं बनी हुई हैं।
प्रदेशव्यापी आंदोलन में पिथौरागढ़ जिले के ग्राम प्रधानों की भी भागीदारी रही। जिलाध्यक्ष हेमराज बिष्ट के नेतृत्व में जिले के विभिन्न विकासखंडों से जुड़े प्रधान आंदोलन में शामिल हुए।
इस दौरान बिन ब्लॉक से भारत, डीडीहाट से महिमन कन्याल और मनोज भंडारी, बेरीनाग से दीपक बचेटी, गंगोलीहाट से हरीश दसौला तथा मुनस्यारी से दीपक आंदोलन में मौजूद रहे। जिले के प्रधानों ने प्रदेश संगठन की मांगों के समर्थन में अपनी भागीदारी दर्ज कराई।
समिति के गठन और धरना समाप्त होने के बाद अब ग्राम प्रधानों को मांगों पर ठोस कार्रवाई का इंतजार है। समिति मांगों की समीक्षा कर अपनी संस्तुति देगी, लेकिन इसके बाद सरकार कितनी मांगों को स्वीकार करती है और उनके क्रियान्वयन के लिए क्या कदम उठाती है, यह आने वाला समय बताएगा।
सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या समिति का गठन ग्राम प्रधानों की समस्याओं के स्थायी समाधान का रास्ता खोलेगा, या आंदोलन के बाद मिला आश्वासन भी केवल आश्वासन बनकर रह जाएगा? फिलहाल प्रधानों ने धरना वापस ले लिया है और अब उनकी निगाहें सरकार के अगले फैसले पर टिकी हैं।


