पिथौरागढ़, 16 सितंबर 2026। मोस्टामानू मेले के मंच पर बुधवार को उत्तराखंड की लोक संस्कृति, प्रेम, आस्था और पारिवारिक संघर्ष से जुड़ी सच्ची लोककथा ‘रामी बौराणी’ का भावपूर्ण नृत्य-नाटिका के रूप में मंचन किया गया। पर्वतीय संस्कृति एवं साहित्यिक कला समिति पिथौरागढ़, नवोदय पार्वती कला केंद्र की ओर से सूचना एवं लोक संपर्क विभाग पिथौरागढ़ तथा मेला समिति के तत्वावधान में प्रस्तुत इस कार्यक्रम ने दर्शकों को भावुक कर दिया।
लगभग 25 मिनट की नृत्य नाटिका चमोली जिले के गंगरार गांव की बताई जाने वाली सच्ची लोककथा पर आधारित रही। कथा में फौजी वीरू करीब 12 वर्षों तक लापता रहता है। इस दौरान उसका परिवार कठिन परिस्थितियों से गुजरता है। इसी बीच वीरू के पिता का निधन हो जाता है और घर में उसकी विधवा मां तथा पत्नी रामी रह जाते हैं। परिवार की आजीविका कृषि पर निर्भर रहती है।
कहानी में उस समय भावनात्मक मोड़ आता है, जब वर्षों बाद एक साधु गांव में पहुंचता है। खेत में काम कर रही रामी से उसकी मुलाकात होती है। बातचीत के दौरान साधु परिवार के हालात और रामी के जीवन के बारे में जानकारी लेता है। इसके बाद वह उसके घर पहुंचकर भिक्षा मांगता है। घर की बुजुर्ग मां से दुख-दर्द की कहानी सुनने के बाद साधु अपने असली रूप यानी फौजी वीरू के रूप में सामने आता है।
नृत्य, संवाद और लोकगीतों के माध्यम से प्रस्तुत इस कथा में सच्चे प्रेम, त्याग, विश्वास और आस्था को प्रभावी ढंग से दर्शाया गया। मंचन के दौरान कलाकारों के अभिनय और लोक संगीत ने दर्शकों को कहानी से जोड़े रखा।
नाटक में फौजी वीरू की भूमिका नवोदय के वरिष्ठ लोक कलाकार राजेंद्र कुमार तिवारी ने निभाई, जबकि रामी की भूमिका मीना पुनेडा बड़ोनी ने निभाई। मीना पुनेडा बड़ोनी संस्कृति आधारित कई फिल्मों में भी कार्य कर चुकी हैं। वीरू की माता की भूमिका श्रीमती उमा मुरारी ने निभाई।
कार्यक्रम में सदानंद भट्ट ने मुख्य संगीत एवं गायन तथा निशा श्रीवास्तव ने मुख्य गायिका के रूप में प्रस्तुति दी। कलाकारों की पारंपरिक वेशभूषा की जिम्मेदारी श्रीमती भवानी बिष्ट ने संभाली।
नृत्य नाटिका का निर्देशन एवं दल का नेतृत्व हेमराज बिष्ट ने किया। उन्होंने कहा कि आज की युवा पीढ़ी धीरे-धीरे अपनी लोक संस्कृति और पारंपरिक कला से दूर होती जा रही है। ऐसे आयोजनों के माध्यम से युवाओं और बच्चों को अपनी जड़ों से जोड़ना तथा उत्तराखंड की लोक कथाओं, लोकगीतों और परंपराओं को नई पीढ़ी तक पहुंचाना संस्था का प्रमुख उद्देश्य है।
मोस्टामानू मेले में हुए इस सांस्कृतिक मंचन को दर्शकों की खूब सराहना मिली और ‘रामी बौराणी’ की लोकगाथा ने मेले की सांस्कृतिक संध्या को यादगार बना दिया।
_ कपिल भट्ट वाणी न्यूज


