देहरादून। उत्तराखंड तकनीकी विश्वविद्यालय (यूटीयू) में परीक्षा से पहले प्रश्नपत्र लीक होने और दो परीक्षाओं के रद्द किए जाने के मामले को लेकर खटीमा विधानसभा क्षेत्र के विधायक एवं उत्तराखंड विधानसभा में उपनेता प्रतिपक्ष ने राज्य सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि यह घटना राज्य की परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल खड़े करती है और इससे हजारों छात्रों की वर्षों की मेहनत, समय तथा भविष्य प्रभावित हुआ है।
उपनेता प्रतिपक्ष ने कहा कि पूरे प्रकरण की निष्पक्ष, पारदर्शी एवं उच्चस्तरीय जांच कराई जानी चाहिए। उनके अनुसार पेपर लीक से जुड़े सभी पहलुओं, संबंधित संस्थानों, अधिकारियों और जिम्मेदार व्यक्तियों की भूमिका की गहन जांच होनी चाहिए तथा जो भी दोषी पाए जाएं, उनके विरुद्ध कानून के अनुसार कड़ी कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।
उन्होंने कहा कि केवल एक प्रोफेसर को सात वर्षों के लिए निलंबित कर देना या किसी आरोपी की गिरफ्तारी कर लेना पर्याप्त नहीं है। इससे छात्रों और युवाओं का विश्वास पूरी तरह बहाल नहीं होगा। सरकार को इस मामले में स्पष्ट जवाबदेही तय करनी होगी ताकि भविष्य में इस प्रकार की घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।
उपनेता प्रतिपक्ष ने मांग की कि जब तक पेपर लीक मामले की जांच पूरी नहीं हो जाती और जिम्मेदारियों का निर्धारण नहीं हो जाता, तब तक संबंधित मंत्री को नैतिक जिम्मेदारी स्वीकार करते हुए अपने पद से इस्तीफा देना चाहिए। उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में जवाबदेही और पारदर्शिता ही जनता तथा युवाओं का विश्वास बनाए रखने का आधार है।
उन्होंने नर्सिंग अभ्यर्थियों के आंदोलन का भी उल्लेख करते हुए कहा कि स्वास्थ्य मंत्री के आवास के बाहर एक अभ्यर्थी द्वारा फिनाइल पीने की घटना सरकार की संवेदनहीनता को दर्शाती है। उनके अनुसार यह घटना बताती है कि सरकार युवाओं की समस्याओं और जनभावनाओं के प्रति गंभीर नहीं है।
उपनेता प्रतिपक्ष ने कहा कि कांग्रेस उत्तराखंड के युवाओं और देश के युवाओं के अधिकारों की लड़ाई पूरी मजबूती के साथ लड़ती रहेगी तथा उनकी आवाज को सदन से लेकर सड़क तक उठाया जाएगा।
नोट: यह समाचार संबंधित विधायक एवं उपनेता प्रतिपक्ष द्वारा जारी बयान और लगाए गए आरोपों पर आधारित है।


